ग़ज़ल Hindi Shayari (Page 2)

बहुत तारीक सहरा हो गया...

बहुत तारीक सहरा हो गया है;
हवा का शोर गहरा हो गया है;

किसी के लम्स का ये मोजज़ा है;
बदन सारा सुनहरा हो गया है;

ये दिल देखूँ कि जिस के चार जानिब;
तेरी यादों का पहरा हो गया है;

वही है ख़ाल-ओ-ख़द में रौशनी सी;
पे तिल आँखों का गहरा हो गया है;

कभी उस शख़्स को देखा है तुम ने;
मोहब्बत से सुनहरा हो गया है।
~ Noshi Gilani
जब रूख़-ए-हुस्न से नक़ाब उठा...

जब रूख़-ए-हुस्न से नक़ाब उठा;
बन के हर ज़र्रा आफ़्ताब उठा;

डूबी जाती है ज़ब्त की कश्ती;
दिल में तूफ़ान-ए-इजि़्तराब उठा;

मरने वाले फ़ना भी पर्दा है;
उठ सके गर तो ये हिजाब उठा;

हम तो आँखों का नूर खो बैठे;
उन के चेहरे से क्या नक़ाब उठा;

आलम-ए-हुस्न-ए-सादगी तौबा;
इश्क़ खा खा के पेच-ओ-ताब उठा;

होश नक़्स-ए-ख़ुदी है ऐ 'एहसान';
ला उठा शीशा-ए-शराब उठा।
~ Ahsaan Danish
सर-ए-सहरा मुसाफ़िर को...

सर-ए-सहरा मुसाफ़िर को सितारा याद रहता है;
मैं चलता हूँ मुझे चेहरा तुम्हारा याद रहता है;

तुम्हारा ज़र्फ़ है तुम को मोहब्बत भूल जाती है;
हमें तो जिस ने हँस कर भी पुकारा याद रहता है;

मोहब्बत में जो डूबा हो उसे साहिल से क्या लेना;
किसे इस बहर में जा कर किनारा याद रहता है;

बहुत लहरों को पकड़ा डूबने वाले के हाथों ने;
यही बस एक दरिया का नज़ारा याद रहता है;

मैं किस तेज़ी से ज़िंदा हूँ मैं ये तो भूल जाता हूँ;
नहीं आना है दुनिया में दोबारा याद रहता है।
~ Adeem Hashmi
गुलों के साथ अजल के...

गुलों के साथ अजल के पयाम भी आए;
बहार आई तो गुलशन में दाम भी आए;

हमीं न कर सके तज्दीद-ए-आरज़ू वरना;
हज़ार बार किसी के पयाम भी आए;

चला न काम अगर चे ब-ज़ोम-ए-राह-बरी;
जनाब-ए-ख़िज़्र अलैहिस-सलाम भी आए;

जो तिश्ना-ए-काम-ए-अज़ल थे वो तिश्ना-काम रहे;
हज़ार दौर में मीना ओ जाम भी आए;

बड़े बड़ों के क़दम डगमगा गए 'ताबाँ';
रह-ए-हयात में ऐसे मक़ाम भी आए।
~ Ghulam Rabbani Taban
दर्द से मेरा दामन...

दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह;
फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह;

मैनें तुझसे चाँद सितारे कब माँगे;
रौशन दिल बेदार नज़र दे या अल्लाह;

सूरज सी इक चीज़ तो हम सब देख चुके;
सचमुच की अब कोई सहर दे या अल्लाह;

या धरती के ज़ख़्मों पर मरहम रख दे;
या मेरा दिल पत्थर कर दे या अल्लाह।
~ Qateel Shifai
जब भी कश्ती मेरी...

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है;
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है;

रोज़ मैं अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूँ;
रोज़ उँगली मेरी तेज़ाब में आ जाती है;

दिल की गलियों से तेरी याद निकलती ही नहीं;
सोहनी फिर इसी पंजाब में आ जाती है;

रात भर जागते रहने का सिला है शायद;
तेरी तस्वीर-सी महताब में आ जाती है;

ज़िन्दगी तू भी भिखारिन की रिदा ओढ़े हुए;
कूचा-ए-रेशम-ओ-कमख़्वाब में आ जाती है;

दुख किसी का हो छलक उठती हैं मेरी आँखें;
सारी मिट्टी मेरे तालाब में आ जाती है।
~ Munawwar Rana
झूठा निकला क़रार तेरा...

झूठा निकला क़रार तेरा;
अब किसको है ऐतबार तेरा;

दिल में सौ लाख चुटकियाँ लीं;
देखा बस हम ने प्यार तेरा;

दम नाक में आ रहा था अपने;
था रात से इंतज़ार तेरा;

कर ज़बर जहाँ तलक़ तू चाहे;
मेरा क्या, इख्तियार तेरा;

लिपटूँ हूँ गले से आप अपने;
समझूँ कि है किनार तेरा;

'इंशा' से मत रूठ, खफा हो;
है बंदा जानिसार तेरा।
~ Insha Allah Khan Insha
अब किस से कहें और कौन सुने...

अब किस से कहें और कौन सुने जो हाल तुम्हारे बाद हुआ;
इस दिल की झील सी आँखों में इक ख़्वाब बहुत बर्बाद हुआ;

ये हिज्र-हवा भी दुश्मन है इस नाम के सारे रंगों की;
वो नाम जो मेरे होंठों पे ख़ुशबू की तरह आबाद हुआ;

उस शहर में कितने चेहरे थे कुछ याद नहीं सब भूल गए;
इक शख़्स किताबों जैसा था वो शख़्स ज़ुबानी याद हुआ;

वो अपने गाँव की गलियाँ थी दिल जिन में नाचता गाता था;
अब इस से फ़र्क नहीं पड़ता नाशाद हुआ या शाद हुआ;

बेनाम सताइश रहती थी इन गहरी साँवली आँखों में;
ऐसा तो कभी सोचा भी न था अब जितना बेदाद हुआ।
~ Noshi Gilani
सोज़ में भी वही इक नग़्मा है...

सोज़ में भी वही इक नग़्मा है जो साज़ में है;
फ़र्क़ नज़दीक़ की और दूर की आवाज़ में है;

ये सबब है कि तड़प सीना-ए-हर-साज़ में है;
मेरी आवाज़ भी शामिल तेरी आवाज़ में है;

जो न सूरत में न म'आनी में न आवाज़ में है;
दिल की हस्ती भी उसी सिलसिला-ए-राज़ में है;

आशिकों के दिले-मजरूह से कोई पूछे;
वो जो इक लुत्फ़ निगाहे-ग़लत -अंदाज़ में है;

गोशे-मुश्ताक़ की क्या बात है अल्लाह-अल्लाह;
सुन रहा हूँ मैं जो नग़्मा जो अभी साज़ में है।
~ Jigar Moradabadi
कुछ दिन से इंतज़ारे...

कुछ दिन से इंतज़ारे-सवाले-दिगर में है;
वह मुज़्महिल हया जो किसी की नज़र में है;

सीखी यहीं मिरे दिले-काफ़िर ने बंदगी;
रब्बे-करीम है तो तेरी रहगुज़र में है;

माज़ी में जो मज़ा मेरी शामो-सहर में था;
अब वह फ़क़त तसव्वुरे-शामो-सहर में है;

क्या जाने किसको किससे है अब दाद की तलब;
वह ग़म जो मेरे दिल में है तेरी नज़र में है।
~ Faiz Ahmad Faiz

Quotes

किसी कार्य को खूबसूरती से करने के लिए मनुष्य को उसे स्वयं करना चाहिए।

Trivia

Mary Gibbs (voice of Boo in Monsters Inc.) was too young to sit to record her lines, so they followed her around with a mike.

Graffiti

The old songs are best because nobody sings them any more.