ग़ज़ल Hindi Shayari (Page 2)

आफत की शोख़ियां हैं...

आफत की शोख़ियां हैं तुम्हारी निगाह में;
मेहशर के फितने खेलते हैं जल्वा-ए-गाह में;

वो दुश्मनी से देखते हैं देखते तो हैं;
मैं शाद हूँ कि हूँ तो किसी की निगाह में;

आती है बात बात मुझे याद बार बार;
कहता हूँ दौड़ दौड़ के कासिद से राह में;

इस तौबा पर है नाज़ मुझे ज़ाहिद इस कदर;
जो टूट कर शरीक हूँ हाल-ए-तबाह में;

मुश्ताक इस अदा के बहुत दर्दमंद थे;
ऐ दाग़ तुम तो बैठ गये एक आह में।
~ Daagh Dehlvi
निगाहों का मर्कज़...

निगाहों का मर्कज़ बना जा रहा हूँ;
मोहब्बत के हाथों लुटा जा रहा हूँ;

मैं क़तरा हूँ लेकिन ब-आग़ोशे-दरिया;
अज़ल से अबद तक बहा जा रहा हूँ;

वही हुस्न जिसके हैं ये सब मज़ाहिर;
उसी हुस्न से हल हुआ जा रहा हूँ;

न जाने कहाँ से न जाने किधर को;
बस इक अपनी धुन में उड़ा जा रहा हूँ;

न सूरत न मआनी न पैदा, न पिन्हाँ
ये किस हुस्न में गुम हुआ जा रहा हूँ।
~ Jigar Moradabadi
भीड़ है बर-सर-ए-बाज़ार...

भीड़ है बर-सर-ए-बाज़ार कहीं और चलें;
आ मेरे दिल मेरे ग़म-ख़्वार कहीं और चलें;

कोई खिड़की नहीं खुलती किसी बाग़ीचे में;
साँस लेना भी है दुश्वार कहीं और चलें;

तू भी मग़मूम है मैं भी हूँ बहुत अफ़्सुर्दा;
दोनों इस दुख से हैं दो-चार कहीं और चलें;

ढूँढते हैं कोई सर-सब्ज़ कुशादा सी फ़ज़ा;
वक़्त की धुंध के उस पार कहीं और चलें;

ये जो फूलों से भरा शहर हुआ करता था;
उस के मंज़र हैं दिल-आज़ार कहीं और चलें;

ऐसे हँगामा-ए-महशर में तो दम घुटता है;
बातें कुछ करनी हैं इस बार कहीं और चलें।
~ Aitbar Sajid
कोई हँस रहा है...

कोई हँस रहा है कोई रो रहा है;
कोई पा रहा है कोई खो रहा है;

कोई ताक में है किसी को है गफ़लत;
कोई जागता है कोई सो रहा है;

कहीँ नाउम्मीदी ने बिजली गिराई;
कोई बीज उम्मीद के बो रहा है;

इसी सोच में मैं तो रहता हूँ 'अकबर';
यह क्या हो रहा है यह क्यों हो रहा है
~ Akbar Allahabadi
ख़ुद को औरों की तवज्जो का...

ख़ुद को औरों की तवज्जो का तमाशा न करो;
आइना देख लो, अहबाब से पूछा न करो;

वह जिलाएंगे तुम्हें शर्त बस इतनी है कि तुम;
सिर्फ जीते रहो, जीने की तमन्ना न करो;

जाने कब कोई हवा आ के गिरा दे इन को;
पंछियो ! टूटती शाख़ों पे बसेरा न करो;

आगही बंद नहीं चंद कुतुब-ख़ानों में;
राह चलते हुए लोगों से भी याराना करो;

चारागर छोड़ भी दो अपने मरज़ पर हम को;
तुम को अच्छा जो न करना है, तो अच्छा न करो;

शेर अच्छे भी कहो, सच भी कहो, कम भी कहो;
दर्द की दौलते-नायाब को रुसवा न करो।
~ Abdul Ahad Saaz
आँखों में धूप दिल में हरारत...

आँखों में धूप दिल में हरारत लहू की थी;
आतिश जवान था तो क़यामत लहू की थी;

ज़ख़्मी हुआ बदन तो वतन याद आ गया;
अपनी गिरह में एक रिवायत लहू की थी;

ख़ंजर चला के मुझ पे बहुत ग़म-ज़दा हुआ;
भाई के हर सुलूक में शिद्दत लहू की थी;

कोह-ए-गिराँ के सामने शीशे की क्या बिसात;
अहद-ए-जुनूँ में सारी शरारत लहू की थी;

'ख़ालिद' हर एक ग़म में बराबर का शरीक था;
सारे जहाँ के बीच रफ़ाकत लहू की थी।
~ Khalid Mahmood
जो मेरा दोस्त भी है...

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है;
वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है;

मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ;
मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है;

सवाल नींद का होता तो कोई बात ना थी;
हमारे सामने ख्वाबों का मसला भी है;

जवाब दे ना सका, और बन गया दुश्मन;
सवाल था, के तेरे घर में आईना भी है;

ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन;
ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है।
~ Rahat Indori
आए हैं मीर मुँह को बनाए...

आए हैं मीर मुँह को बनाए जफ़ा से आज;
शायद बिगड़ गयी है उस बेवफा से आज;

जीने में इख्तियार नहीं वरना हमनशीं;
हम चाहते हैं मौत तो अपने खुदा से आज;

साक़ी टुक एक मौसम-ए-गुल की तरफ़ भी देख;
टपका पड़े है रंग चमन में हवा से आज;

था जी में उससे मिलिए तो क्या क्या न कहिये 'मीर';
पर कुछ कहा गया न ग़म-ए-दिल हया से आज।
~ Meer Taqi Meer
बुझी नज़र तो करिश्मे भी...

बुझी नज़र तो करिश्मे भी रोज़-ओ-शब के गये;
कि अब तलक नही पलटे हैं लोग कब के गये;

करेगा कौन तेरी बेवफ़ाइयों का गिला;
यही है रस्म-ए-ज़माना तो हम भी अब के गये;

मगर किसी ने हमे हमसफ़र नही जाना;
ये और बात कि हम साथ साथ सब के गये;

अब आये हो तो यहाँ क्या है देखने के लिये;
ये शहर कब से है वीरां वो लोग कब के गये;

गिरफ़्ता दिल थे मगर हौसला नही हारा;
गिरफ़्ता दिल हैं मगर हौसले भी अब के गये;

तुम अपनी शम-ए-तमन्ना को रो रहे हो 'फ़राज़';
इन आँधियों मे तो प्यार-ए-चिराग सब के गये।
~ Ahmad Faraz
बहुत तारीक सहरा हो गया...

बहुत तारीक सहरा हो गया है;
हवा का शोर गहरा हो गया है;

किसी के लम्स का ये मोजज़ा है;
बदन सारा सुनहरा हो गया है;

ये दिल देखूँ कि जिस के चार जानिब;
तेरी यादों का पहरा हो गया है;

वही है ख़ाल-ओ-ख़द में रौशनी सी;
पे तिल आँखों का गहरा हो गया है;

कभी उस शख़्स को देखा है तुम ने;
मोहब्बत से सुनहरा हो गया है।
~ Noshi Gilani

Quotes

राजनेता सब जगह एक जैसे ही हैं। वो वहाँ भी पुल बनाने की बात करते हैं जहाँ कोई नदी भी नहीं है।

Trivia

A young rabbit is called a 'kitten'.

Graffiti

If it weren't for the rains, people would be all dry.