• मुझे अपने चंद सवालों...

    मुझे अपने चंद सवालों का जवाब चाहिए;
    तुम्हारे दिल में थोड़ी सी जगह चाहिए;

    तुझ को मेरे सिवा किसी और का ख़याल ना रहे;
    तेरी ज़िंदगी में मुझको वो मुक़ाम चाहिए;

    जो वक़्त भी हम ने तेरे बिना गुज़ारे हैं;
    वापिस मुझे वो अपने शब्-ओ-रोज़ चाहिए;

    तेरी ज़िंदगी में मेरी क्या अहमियत है रज़ा;
    सब कुछ छोड़, इस बात का जवाब चाहिए।
  • वो मुझसे मेरी खामोशी...

    वो मुझसे मेरी खामोशी की वजह पूछता है;
    कितना पागल है रात के सनाटे की वजह पूछता है;

    वो मुझसे मेरे आँसू की वजह पूछता है;
    कितना पागल है बारिश के बरसने की वजह पूछता है;

    वो मुझसे मेरी मोहब्बत के बारे में पूछता है;
    कितना पागल है खुद अपने बारे में पूछता है;

    वो मुझसे मेरी वफ़ा की इंतेहा पूछता है;
    कितना पागल है साहिल पे रह कर, समुद्र की गहराई पूछता है।
  • ​मुझसे मिलने को​...​

    मुझसे मिलने को करता था वो बहाने कितने;
    अब मेरे बिना गुजरेगा वो जमाने कितने;

    मैं गिरा था तो रुके थे बहुत लोग;​
    सोचता हूँ उनमें से आए थे उठाने कितने;
    ​​​​
    ​अब और न दे दर्द मेरे दिल को ज़ालिम;​
    भरे नहीं अभी तक जख्म पुराने कितने।
  • बहार के मौसम में...

    बहार के मौसम में उजड़े रास्ते;
    चला करोगे तो रो पड़ोगे;

    कि चाँदनी रातों में अब किसी से;
    मिला करोगे तो रो पड़ोगे;

    बरसती बारिश में याद रखना;
    तुम्हें सताएंगी मेरी आँखें;

    किसी वली की मज़ार पर जब;
    दुआ करोगे तो रो पड़ोगे।
  • मेरी आँखों में...

    मेरी आँखों में आँसू आए ना होते;
    अगर वो हमें देखकर मुस्कुराए ना होते;

    सोचता हूँ अक्सर तन्हाई में मैं;
    मेरी ज़िंदगी में काश वो आए ना होते;

    ना तड़पते हम उनके लिए इतना;
    दिल ने ख़्वाब अगर उनके सजाए ना होते;

    ना टूट कर बिखरता मैं इस कदर;
    अगर वो मेरे दिल में अपना घर बसाए ना होते।
  • वही गर्दिशें वही...

    वही गर्दिशें वही पेच-ओ-ख़म तेरे बाद भी;
    वही हौसले मेरे दम बा दम तेरे बाद भी;
    तेरे साथ थी तेरी जफ़ा मुझे मो'अतबार ;
    तेरे सारे ग़म मुझे मोहतरम तेरे बाद भी;
    मेरे साथ ही मेरी हर ख़ुशी तेरी मुन्तज़िर;
    तेरी मुन्तज़िर मेरी चश्म-ए-नम तेरे बाद भी;
    तू किसी के क़लब-ओ-आरज़ू में ढल गया;
    मैं ना हो सका कभी खुद में जम्म तेरे बाद भी;
    मेरे बाद कितने ही रूप तूने बदल लिए;
    मैं वहीँ हूँ अब तेरी कसम तेरे बाद भी।
  • कभी नजरे मिलाने में...

    कभी नजरे मिलाने में जमाने बीत जाते है;
    कभी नजरे चुराने में जमाने बीत जाते है;

    किसी ने आँखे भी ना खोली तो सोने की नगरी में;
    किसी को घर बनाने में जमाने बीत जाते है;

    कभी काली सियाह राते हमें एक पल की लगती है;
    कभी एक पल बिताने में ज़माने बीत जाते है;

    कभी खोला दरवाजा सामने खड़ी थी मंजिल;
    कभी मंजिल को पाने में जमाने बीत जाते है;

    एक पल में टूट जाते है, उम्र भर के वो रिश्ते;
    जिन्हें बनाने में जमाने बीत जाते है।
  • दुःख देकर सवाल...

    दुःख देकर सवाल करते हो;
    तुम भी जानम! कमाल करते हो;

    देख कर पूछ लिया हाल मेरा;
    चलो कुछ तो ख्याल करते हो;

    शहर-ए दिल में ये उदासियाँ कैसी;
    ये भी मुझसे सवाल करते हो;

    मरना चाहें तो मर नहीं सकते;
    तुम भी जीना मुहाल करते हो;

    अब किस-किस की मिसाल दूँ तुम को;
    हर सितम बे-मिसाल करते हो।
  • ए रात सोने दे...

    ए रात सोने दे यूं तंग ना किया कर;
    बेकार सवालों में पाबंद ना किया कर;

    इस के सिवा और भी ज़माने के काम हैं;
    तु मेरे ख्यालात बे-ढंग ना किया कर;

    दुनियाँ में और लोग भी बस्ते हैं तन्हा;
    तु सिर्फ मेरे साथ ही जंग न किया कर;

    ए रात सोने दे यूँ तंग ना किया कर;
    मज़बूत हूँ, पर इतना भी नहीं हूँ;

    दुनिया के सभी ग़म मेरे संग ना किया कर;
    ए रात सोने दे यूँ तंग न किया कर।
  • ​उनको देखने से.​..​

    उनके ​देखने से जो आ जाती है मुँह पे रौनक;
    वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है;

    देखिए पाते हैं उशशाक़ बुतों से क्या फ़ैज़;
    इक बराह्मन ने कहा है कि ये साल अच्छा है;

    हमको मालूम है जन्नत की हक़ीकत लेकिन;
    दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है।
    ~ Mirza Ghalib