• किसी बे दर्द ने...

    किसी बे दर्द ने यूँ मेरा दिल तोड़ दिया;
    मेरी आदत बिगाड़ कर साथ छोड़ दिया;

    हद तो देखो उसके दिलकश फरेब की;
    मंज़िल दिखा कर राह को मोड़ दिया;

    पुराने ज़ख्म छेड़ देती है हर रात;
    उसने हर दिन नया एक गम जोड़ दिया;

    महल ​अरमानों का मुश्किल से बना;
    उसने हर लम्हा एक शीशा तोड़ दिया;

    बेवफा दुनियाँ से 'ताज' कभी नहीं हारी;
    मगर तूने मेरी रूह तक को झिंझोड़ दिया।
    ~ Taj
  • टूटे हुए दिलों की...

    टूटे हुए दिलों की दुआ मेरे साथ है;
    दुनिया तेरी तरफ है ख़ुदा मेरे साथ है;

    आवाज़ घुंघरुओं की नहीं है तो क्या हुआ;
    सागर के टूटने की सदा मेरे साथ है;

    तन्हाई किस को कहते हैं मुझ को पता नहीं;
    क्या जाने किस हसीं की दुआ मेरे साथ है;

    पैमाना सामने है तो कुछ ग़म नहीं निज़ाम;
    अब दर्द-ए-दिल की कोई दवा मेरे साथ है।
    ~ Nizam Rampuri
  • तुमने यह फूल...

    तुमने यह फूल जो ज़ुल्फ़ों में लगा रखा है;
    एक दीया है जो अंधेरे में जला रखा है;

    जीत ले जाये कोई मुझे नसीबों वाला;
    ज़िंदगी ने मुझे दाव् पे लगा रखा है;

    जाने कब आया कोई दिल में झांकने वाला;
    इस लिए मैने गिरेबान को खुला रखा है;

    इम्तिहान और मेरी ज़ब्त का तुम क्या लोगे;
    मैने धड़कन को भी सीने में छिपा रखा है।
    ~ Qateel Shifai
  • हम प्यार तो उन्ही से....

    हम प्यार तो उन्ही से करते है​;​
    पर अब ये जताना छोड़ दिया;​

    हम उनसे कभी रूठे ही नहीं​;​
    और उसने भी मनाना छोड़ दिया;​

    मरना भी मुश्किल है, जिस शख्श के बगैर्;​
    उस शक़्स् ने ख्वाबो में भी आना छोड़ दिया​;​

    ऱोना तो कभी हमें आता ही ना था;​
    पर अब हमने मुस्कराना छोड़ दिया;​

    सब पूछ्ते है कि हम क्यों लिखते नहीं;​
    कैसे कहे कि ज़ख्मो को ​कागज़ पे सजाना छोड दिया।
  • दुश्मन भी पेश...

    दुश्मन भी पेश आए हैं दिलदार की तरह;
    नफरत मिली है उनसे मुझे प्यार की तरह;

    कैसे मिलेंगे चाहने वाले बताईये;
    दुनिया खड़ी है राह में दीवार की तरह;

    वो बेवफ़ाई करके भी शर्मिंदा ना हुए;
    सूली पे हम चढ़े हैं गुनहगार की तरह;

    तूफ़ान में मुझ को छोड़ कर वो लोग चल दिए;
    साहिल पर थे जो साथ में पतवार की तरह;

    चेहरे पर हादसों ने लिखीं वो इबारतें;
    पढ़ने लगा हर कोई मुझे अख़बार की तरह;

    दुश्मन भी हो गए हैं मसीहा सिफ़त जमाल;
    मिलते हैं टूट कर वो गले यार की तरह।
  • ज़िंदगी पर किताब...

    ज़िंदगी पर किताब लिखूंगा;
    उसमें सारे हिसाब लिखूंगा;

    प्यार को वक़्त गुज़ारी लिख कर;
    चाहतों को अज़ाब लिखूंगा;

    हुई बर्बाद मोहब्बत कैसे;
    कैसे बिखरे हैं ख़्वाब लिखूंगा;

    अपनी ख़्वाहिश का तज़करा कर के;
    नाम तेरा जवाब लिखूंगा;

    तेरी आँखें शराब की मनींद;
    तेरा चेहरा गुलाब लिखूंगा;

    मैं तुझ से जुदाई का सबब;
    अपनी किस्मत खराब लिखूंगा ​​।
  • जो मेरे लिए...

    जो मेरे लिए ही सजा करे;
    जो मेरे लिए ही बना करे;

    मैं जो रूट जाऊँ मनाये वो;
    मैं उदास हूँ तो हंसाए वो;

    सदा चुपके-चुपके दबे क़दम;
    मेरे साथ ही बस चला करे;

    कभी उस से मैं जो दूर हूँ;
    मेरी वापसी की दुआ करे;

    कोई अपना ऐसा हुआ करे;
    कोई अपना ऐसा हुआ करे।
  • ज़िंदगी सभी को मिली...

    ज़िंदगी सभी को मिली हो ये जरूरी तो नहीं;
    हर किसी की चाहत पूरी हो ये जरुरी तो नहीं;
    ज़िंदगी सभी को मिली हो...

    आग गुलशन में बहारें भी लगा सकती है;
    सिर्फ बिजली ही गिरी हो ये ज़रूरी तो नहीं;
    ज़िंदगी सभी को मिली हो...

    नींद तो दर्द के बिस्तर पर भी आ सकती है;
    तेरी आगोश में ही सर हो ये ज़रूरी तो नहीं;
    ज़िंदगी सभी को मिली हो...

  • सर झुकाओगे तो...

    सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा;
    इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जाएगा;

    हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है;
    जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा;

    मैं ख़ुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तों;
    ज़हर भी इसमें अगर होगा दवा हो जाएगा;

    रूठ जाना तो मोहब्बत की अलामत है मगर;
    क्या खबर थी मुझ से वो इतना खफा हो जाएगा;

    सर झुकाओगे तो देवता पत्थर हो जाएगा;
    इतना मत चाहो उसे वो बेवफा हो जाएगा।
  • ​सबसे छुपा कर...

    सबसे छुपा कर दर्द जो वो मुस्कुरा दिया;
    उस की हंसी ने तो आज मुझे रुला दिया;​​

    लहज़े से उठ रहा था हर एक दर्द का धुआँ;
    चेहरा बता रहा है कि कुछ गँवा दिया;
    ​​
    ​ आवाज़ में ठहरा​व था आँखों में नमी थी;
    और कह रहा था कि मैंने सब कुछ भुला दिया;
    ​​
    ​ जाने क्या उस को लोगों से थी शिकायतें;
    तन्हाईयो के देश में खुद को बसा दिया;
    ​​
    ​ खुद भी वो हम से बिछड़ कर अधूरा सा हो गया;
    मुझ को भी इतने लोगों में तन्हा बना दिया।​