• वही गर्दिशें वही...

    वही गर्दिशें वही पेच-ओ-ख़म तेरे बाद भी;
    वही हौसले मेरे दम बा दम तेरे बाद भी;
    तेरे साथ थी तेरी जफ़ा मुझे मो'अतबार ;
    तेरे सारे ग़म मुझे मोहतरम तेरे बाद भी;
    मेरे साथ ही मेरी हर ख़ुशी तेरी मुन्तज़िर;
    तेरी मुन्तज़िर मेरी चश्म-ए-नम तेरे बाद भी;
    तू किसी के क़लब-ओ-आरज़ू में ढल गया;
    मैं ना हो सका कभी खुद में जम्म तेरे बाद भी;
    मेरे बाद कितने ही रूप तूने बदल लिए;
    मैं वहीँ हूँ अब तेरी कसम तेरे बाद भी।
  • कभी नजरे मिलाने में...

    कभी नजरे मिलाने में जमाने बीत जाते है;
    कभी नजरे चुराने में जमाने बीत जाते है;

    किसी ने आँखे भी ना खोली तो सोने की नगरी में;
    किसी को घर बनाने में जमाने बीत जाते है;

    कभी काली सियाह राते हमें एक पल की लगती है;
    कभी एक पल बिताने में ज़माने बीत जाते है;

    कभी खोला दरवाजा सामने खड़ी थी मंजिल;
    कभी मंजिल को पाने में जमाने बीत जाते है;

    एक पल में टूट जाते है, उम्र भर के वो रिश्ते;
    जिन्हें बनाने में जमाने बीत जाते है।
  • दुःख देकर सवाल...

    दुःख देकर सवाल करते हो;
    तुम भी जानम! कमाल करते हो;

    देख कर पूछ लिया हाल मेरा;
    चलो कुछ तो ख्याल करते हो;

    शहर-ए दिल में ये उदासियाँ कैसी;
    ये भी मुझसे सवाल करते हो;

    मरना चाहें तो मर नहीं सकते;
    तुम भी जीना मुहाल करते हो;

    अब किस-किस की मिसाल दूँ तुम को;
    हर सितम बे-मिसाल करते हो।
  • ए रात सोने दे...

    ए रात सोने दे यूं तंग ना किया कर;
    बेकार सवालों में पाबंद ना किया कर;

    इस के सिवा और भी ज़माने के काम हैं;
    तु मेरे ख्यालात बे-ढंग ना किया कर;

    दुनियाँ में और लोग भी बस्ते हैं तन्हा;
    तु सिर्फ मेरे साथ ही जंग न किया कर;

    ए रात सोने दे यूँ तंग ना किया कर;
    मज़बूत हूँ, पर इतना भी नहीं हूँ;

    दुनिया के सभी ग़म मेरे संग ना किया कर;
    ए रात सोने दे यूँ तंग न किया कर।
  • ​उनको देखने से.​..​

    उनके ​देखने से जो आ जाती है मुँह पे रौनक;
    वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है;

    देखिए पाते हैं उशशाक़ बुतों से क्या फ़ैज़;
    इक बराह्मन ने कहा है कि ये साल अच्छा है;

    हमको मालूम है जन्नत की हक़ीकत लेकिन;
    दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है।
    ~ Mirza Ghalib
  • ​मैं उसके चेहरे को...

    मैं उसके चेहरे को दिल से उतार देती हूँ;
    मैं कभी कभी तो खुद को भी मार देती हूँ;
    ​​
    ​ ये मेरा हक़ है कि मैं उसको थोडा दुःख भी दूं;
    मैं चाहत भी तो उसे बेशुमार देती हूँ;
    ​​
    ​ खफा वो रह नहीं सकता लम्हा भर भी;
    ​मैं बहुत पहले ही उसको पुकार लेती हूँ;
    ​​
    ​ मुझे सिवा उसके कोई भी काम नहीं सूझता;
    वो जो भी करता है, मैं सब हिसाब लेती हूँ;​​
    ​​
    ​ वो सभी नाज़ उठाता है मैं जो भी कहती हूँ;
    वो जो भी कहता है मैं चुपके से मान लेती हूँ।
  • ​​​हवा बन कर​​...

    ​​ हवा बन कर बिखरने से​;​
    उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है​;​​​

    ​ मेरे जीने या मरने से​;​
    उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है​;​

    ​ उसे तो अपनी खुशियों से​;​
    ज़रा भी फुर्सत नहीं मिलती​;​

    ​ मेरे ग़म के उभरने से​;​
    उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है​;​

    ​ उस शख्स की यादों में​;​
    मैं चाहे रोते रहूँ लेकिन​;​

    ​ ​मेरे ऐसा करने से​;​
    उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है​। ​
  • कठिन है राह-गुज़र​...​​ ​​

    ​​ ​​कठिन है राह-गुज़र थोड़ी देर साथ चलो​;​
    बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी देर साथ चलो​;​​​

    ​ तमाम उम्र कहाँ कोई साथ देता है;​
    ये जानता हूँ मगर थोड़ी दूर साथ चलो​;​

    ​ नशे में चूर हूँ मैं भी तुम्हें भी होश नहीं;​
    बड़ा मज़ा हो अगर थोड़ी दूर साथ चलो।
  • ​ज़िन्दगी से यही​...​
    ​​​
    ​​​ ज़िन्दगी से यही ग़िला है मुझे​;​
    तू बहुत देर से मिला है मुझे​;​​​​
    ​​​
    ​​ हमसफ़र चाहिए हुजूम नहीं​;​​
    मुसाफ़िर ही काफ़िला है मुझे​;​​
    ​​​
    ​​ दिल धड़कता नहीं सुलगता है​;​​​
    ​ वो जो ख़्वाहिश थी आबला है मुझे​;​​​
    ​​​
    ​ लबकुशा हूँ तो इस यक़ीन के साथ​;​​​
    ​ क़त्ल होने का हौसला है मुझे​;​​​
    ​​​
    ​ कौन जाने कि चाहतों में 'फ़राज़'​;​​​
    ​ क्या गँवाया है क्या मिला है मुझे।
    ~ Ahmad Faraz
  • जब भी मिलता

    जब भी मिलता हूँ तुझसे;
    मेरी ज़िन्दगी उदास हो जाती है;
    मेरी हर धड़कन ख़ामोश हो जाती है;
    तेरी सुरमई आँखों की कसम;
    मेरी मोहब्बत सरे-बाज़ार बदनाम हो जाती है;
    तेरी धुंधली यादें सरे-आम मुझको डसती हैं;
    जब भी चेहरे से तू नक़ाब उठाती है;
    तेरे दर्द का सिलसिला तब तक चलता रहता है;
    जब तक तू न नज़रें मेरे चेहरे से हटाती है;
    जब भी मिलता हूँ तुझसे;
    मेरी ज़िन्दगी उदास हो जाती है।