• बेशक महसूस नहीं होती, तुम्हें नजदीकिया मेरी,<br/>
मगर फिर भी मेरी आंखों ने, हर रोज तुम्हें छुआ हैं करीब से!
    बेशक महसूस नहीं होती, तुम्हें नजदीकिया मेरी,
    मगर फिर भी मेरी आंखों ने, हर रोज तुम्हें छुआ हैं करीब से!
  • क्यों कोशिश करते हो दिल-ए-नादान सबको खुश रखने की;<br/>
यहा कुछ लोगों की नाराजगी भी जरुरी होती है चर्चे में बने रहने के लिए!
    क्यों कोशिश करते हो दिल-ए-नादान सबको खुश रखने की;
    यहा कुछ लोगों की नाराजगी भी जरुरी होती है चर्चे में बने रहने के लिए!
  • नाकाम हुए हम दोनों बहुत ही बुरी तरह से;<br/>
तुम हमें चाह ना सके और हम तुम्हें भूला ना सके!
    नाकाम हुए हम दोनों बहुत ही बुरी तरह से;
    तुम हमें चाह ना सके और हम तुम्हें भूला ना सके!
  • जलने और जलाने का बस इतना सा फलसफा है `साहिब`;<br/>
फिक्र में होते है तो, खुद जलते हैं, बेफ़िक्र होते हैं तो दुनिया जलती है!
    जलने और जलाने का बस इतना सा फलसफा है `साहिब`;
    फिक्र में होते है तो, खुद जलते हैं, बेफ़िक्र होते हैं तो दुनिया जलती है!
  • मेरे शहर में खुदाओं की कमी नहीं,<br/>
दिक्कत मुझे इंसान ढूँढने में होती है।
    मेरे शहर में खुदाओं की कमी नहीं,
    दिक्कत मुझे इंसान ढूँढने में होती है।
  • अगर मुस्कुराहट के लिए ईश्वर का शुक्रिया नहीं किया,<br/>
तो आँखों मे आये आँसुओं के लिये शिकायत का हक़ कैसा!
    अगर मुस्कुराहट के लिए ईश्वर का शुक्रिया नहीं किया,
    तो आँखों मे आये आँसुओं के लिये शिकायत का हक़ कैसा!
  • तुम समझते हो कि जीने की तलब है मुझको,<br/>
मैं तो इस आस में ज़िंदा हूँ कि मरना कब है।
    तुम समझते हो कि जीने की तलब है मुझको,
    मैं तो इस आस में ज़िंदा हूँ कि मरना कब है।
  • धूप लगती थी गाँव में मगर चुभती नहीं थी;<br/>
ऐ शहर तेरी छांव ने भी पसीने निकाल दिए!
    धूप लगती थी गाँव में मगर चुभती नहीं थी;
    ऐ शहर तेरी छांव ने भी पसीने निकाल दिए!
  • मिलता ही नही तुम्हारे जैसा कोई और इस शहर मै,<br/>
हमे क्या मालूम था कि तुम एक हो और वो भी किसी और के!
    मिलता ही नही तुम्हारे जैसा कोई और इस शहर मै,
    हमे क्या मालूम था कि तुम एक हो और वो भी किसी और के!
  • किसको क्या मिले इसका कोई हिसाब नहीं;<br/>
तेरे पास रूह नहीं मेरे पास लिबास नहीं!
    किसको क्या मिले इसका कोई हिसाब नहीं;
    तेरे पास रूह नहीं मेरे पास लिबास नहीं!