• जरुरी नहीं है कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाए;<br/>
अंदाज बदल कर बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है!
    जरुरी नहीं है कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाए;
    अंदाज बदल कर बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है!
  • नजर से दूर रहकर भी किसी की सोच में रहना;<br/>
किसी के पास रहने का तरीका हो तो ऐसा हो!
    नजर से दूर रहकर भी किसी की सोच में रहना;
    किसी के पास रहने का तरीका हो तो ऐसा हो!
  • साफ़ दामन का दौर अब खत्म हुआ,<br/>
लोग अपने धब्बों पे गुरूर करने लगे!
    साफ़ दामन का दौर अब खत्म हुआ,
    लोग अपने धब्बों पे गुरूर करने लगे!
  • वजह की तलाश में, वक्त ना गवाया करो;<br/>
बेवजह, बेपरवाह, बेझिझक बस मुस्कुराया करो!
    वजह की तलाश में, वक्त ना गवाया करो;
    बेवजह, बेपरवाह, बेझिझक बस मुस्कुराया करो!
  • यहाँ हर कोई रखता है खबर, गैरों के गुनाहों की;<br/>
अजीब फ़ितरत है, कोई आइना नही रखता।
    यहाँ हर कोई रखता है खबर, गैरों के गुनाहों की;
    अजीब फ़ितरत है, कोई आइना नही रखता।
  • मेरे दिल से निकलने का रास्ता भी न ढूंढ सके,<br/>
और कहते थे तुम्हारी रग-रग से वाकिफ़ है हम!
    मेरे दिल से निकलने का रास्ता भी न ढूंढ सके,
    और कहते थे तुम्हारी रग-रग से वाकिफ़ है हम!
  • लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये;<br/>
ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये!
    लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये;
    ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये!
  • चाँद को अपनी चौकट पे सजाने की तमन्ना ना कर,<BR/>
ये जमाना तो आँखों से ख्वाब भी छीन लेता है!
    चाँद को अपनी चौकट पे सजाने की तमन्ना ना कर,
    ये जमाना तो आँखों से ख्वाब भी छीन लेता है!
  • फासला भी जरूरी है, चिराग रौशन करने वक्त;<br/>
तजुर्बा ये हुआ हाथ जल जाने के बाद।
    फासला भी जरूरी है, चिराग रौशन करने वक्त;
    तजुर्बा ये हुआ हाथ जल जाने के बाद।
  • कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता;<br/>

तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता!
    कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता;
    तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता!