• न माँझी, न रहबर, न हक में हवायें;<br/>
है कश्ती भी जर्जर, ये कैसा सफर है;<br/>
अलग ही मजा है, फ़कीरी का अपना;<br/>
न पाने की चिन्ता न खोने का डर है।
    न माँझी, न रहबर, न हक में हवायें;
    है कश्ती भी जर्जर, ये कैसा सफर है;
    अलग ही मजा है, फ़कीरी का अपना;
    न पाने की चिन्ता न खोने का डर है।
  • जादू है या तिलिस्म तुम्हारी ज़बान में;<br/>
तुम झूठ कह रहे थे मुझे ऐतबार था।
    जादू है या तिलिस्म तुम्हारी ज़बान में;
    तुम झूठ कह रहे थे मुझे ऐतबार था।
    ~ Bekhud Dehlvi
  • और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा;<br/>
मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा;<br/>
यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार;<br/>
प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा।
    और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा;
    मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा;
    यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार;
    प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा।
  • कुछ तर्ज़-ए-सितम भी है कुछ अंदाज़-ए-वफ़ा भी;<br/>
खुलता नहीं हाल उन की तबियत का ज़रा भी।
    कुछ तर्ज़-ए-सितम भी है कुछ अंदाज़-ए-वफ़ा भी;
    खुलता नहीं हाल उन की तबियत का ज़रा भी।
    ~ Akbar Allahabadi
  • बेखबर से रहते हो, खबर भी रखते हो;<br/>
बात भी नहीं करते और प्यार भी करते हो!
    बेखबर से रहते हो, खबर भी रखते हो;
    बात भी नहीं करते और प्यार भी करते हो!
  • हर-चंद ऐतबार में धोखे भी हैं मगर;<br/>
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए!
    हर-चंद ऐतबार में धोखे भी हैं मगर;
    ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए!
    ~ Jaan Nisar Akhtar
  • इक जहाँ है जिसका मुश्ताक-ए-जमाल;<br/>
सख्त हैरत है, वह क्यों रूपोश है!
    इक जहाँ है जिसका मुश्ताक-ए-जमाल;
    सख्त हैरत है, वह क्यों रूपोश है!
    ~ Hasrat Mohani
  • सख्तियां करता हूँ दिल पर गैर से गाफिल हूँ मैं;<br/>
हाय क्या अच्छी कही जालिम हूँ, जाहिल हूँ मैं!<br/><br/>
Meaning:<br/>
गाफिल - अनजान
    सख्तियां करता हूँ दिल पर गैर से गाफिल हूँ मैं;
    हाय क्या अच्छी कही जालिम हूँ, जाहिल हूँ मैं!

    Meaning:
    गाफिल - अनजान
    ~ Allama Iqbal
  • मुझ पर इल्ज़ाम झूठा है दोस्तों;<br/>
मोहब्बत की नहीं... हो गयी थी!
    मुझ पर इल्ज़ाम झूठा है दोस्तों;
    मोहब्बत की नहीं... हो गयी थी!
  • मै दीपक हूँ, मेरी दुश्मनी तो सिर्फ़ अंधेरे से है;<br/>
हवा तो बेवजह ही मेरे ख़िलाफ़ है।<br/>
हवा से कह दो कि खुद को आज़मा के दिखाए;<br/>
बहुत दीपक बुझाती है कभी जला के दिखाए।
    मै दीपक हूँ, मेरी दुश्मनी तो सिर्फ़ अंधेरे से है;
    हवा तो बेवजह ही मेरे ख़िलाफ़ है।
    हवा से कह दो कि खुद को आज़मा के दिखाए;
    बहुत दीपक बुझाती है कभी जला के दिखाए।