• हम अपने दिल के मुकामात से हैं बेगाने;<br/>
इसी में वरना हरम है, इसी में बुतखाने!<br/><br/>

मुकामात = स्थान, घर;<br/>
बेगाना = अपरिचित, अनजान;<br/>
हरम  = काबा, खुदा का घर;<br/>  
बुतखाना - मंदिर, मूर्तिगृह
    हम अपने दिल के मुकामात से हैं बेगाने;
    इसी में वरना हरम है, इसी में बुतखाने!

    मुकामात = स्थान, घर;
    बेगाना = अपरिचित, अनजान;
    हरम = काबा, खुदा का घर;
    बुतखाना - मंदिर, मूर्तिगृह
    ~ Shad Azeembadi
  • दिल को बर्बाद किये जाती है गम बदस्तूर किये जाती है;<br/>
मर चुकीं सारी उम्मीदें, आरजू है कि जिये जाती है!<br/><br/>

बदस्तूर  =   पहले की तरह, यथावत, यथापूर्व
    दिल को बर्बाद किये जाती है गम बदस्तूर किये जाती है;
    मर चुकीं सारी उम्मीदें, आरजू है कि जिये जाती है!

    बदस्तूर = पहले की तरह, यथावत, यथापूर्व
    ~ Asar Lakhnavi
  • क्या बताऊँ किस क़दर ज़ंजीर-ए-पा साबित हुए;<br/>
चंद तिनके जिन को अपना आशियाँ समझा था मैं!<br/><br/>
ज़ंजीर-ए-पा = पैरों की ज़ंज़ीर
    क्या बताऊँ किस क़दर ज़ंजीर-ए-पा साबित हुए;
    चंद तिनके जिन को अपना आशियाँ समझा था मैं!

    ज़ंजीर-ए-पा = पैरों की ज़ंज़ीर
    ~ Jigar Moradabadi
  • लुत्फ-ए-बहार कुछ नहीं गो है वही बहार;<br/>
दिल क्या उजड़ गया कि जमाना उजड़ गया!<br/><br/>
लुत्फ: आनन्द, मजा
    लुत्फ-ए-बहार कुछ नहीं गो है वही बहार;
    दिल क्या उजड़ गया कि जमाना उजड़ गया!

    लुत्फ: आनन्द, मजा
    ~ Arzoo Lakhnavi
  • रहें न रिंद ये वाइज़ के बस की बात नहीं;<br/>
तमाम शहर है दो-चार-दस की बात नहीं।
    रहें न रिंद ये वाइज़ के बस की बात नहीं;
    तमाम शहर है दो-चार-दस की बात नहीं।
    ~ Kaifi Azami
  • एक उम्र वो थी कि जादू में भी यक़ीन था;<br/>
एक उम्र ये है कि हक़ीक़त पर भी शक़ है।
    एक उम्र वो थी कि जादू में भी यक़ीन था;
    एक उम्र ये है कि हक़ीक़त पर भी शक़ है।
  • रूठूँगा अगर तुझसे तो इस कदर रूठूँगा कि,<br/>
ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी।
    रूठूँगा अगर तुझसे तो इस कदर रूठूँगा कि,
    ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी।
  • गिर कर उठने तक तो हाथ पकड़े रखा उसने मेरा,<br/>
जरा सँभल कर चलना सीखा तो फिर से खो गए भीड़ में!
    गिर कर उठने तक तो हाथ पकड़े रखा उसने मेरा,
    जरा सँभल कर चलना सीखा तो फिर से खो गए भीड़ में!
  • मेरे फन को तराशा है सभी के नेक इरादों ने;<br/>
किसी की बेवफाई ने, किसी के झूठे वादों ने।
    मेरे फन को तराशा है सभी के नेक इरादों ने;
    किसी की बेवफाई ने, किसी के झूठे वादों ने।
  • कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,<br/>
दोनों जहान की सैरें, हासिल हैं सब यहीं से!<br/><br/>


सरजमीं  =  पृथ्वी, जमीन, देश, मुल्क
    कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,
    दोनों जहान की सैरें, हासिल हैं सब यहीं से!

    सरजमीं = पृथ्वी, जमीन, देश, मुल्क
    ~ Jigar Moradabadi