• यहाँ हर कोई रखता है खबर, गैरों के गुनाहों की;<br/>
अजीब फ़ितरत है, कोई आइना नही रखता।
    यहाँ हर कोई रखता है खबर, गैरों के गुनाहों की;
    अजीब फ़ितरत है, कोई आइना नही रखता।
  • मेरे दिल से निकलने का रास्ता भी न ढूंढ सके,<br/>
और कहते थे तुम्हारी रग-रग से वाकिफ़ है हम!
    मेरे दिल से निकलने का रास्ता भी न ढूंढ सके,
    और कहते थे तुम्हारी रग-रग से वाकिफ़ है हम!
  • लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये;<br/>
ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये!
    लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये;
    ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये!
  • चाँद को अपनी चौकट पे सजाने की तमन्ना ना कर,<BR/>
ये जमाना तो आँखों से ख्वाब भी छीन लेता है!
    चाँद को अपनी चौकट पे सजाने की तमन्ना ना कर,
    ये जमाना तो आँखों से ख्वाब भी छीन लेता है!
  • फासला भी जरूरी है, चिराग रौशन करने वक्त;<br/>
तजुर्बा ये हुआ हाथ जल जाने के बाद।
    फासला भी जरूरी है, चिराग रौशन करने वक्त;
    तजुर्बा ये हुआ हाथ जल जाने के बाद।
  • कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता;<br/>

तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता!
    कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता;
    तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता!
  • सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई;<br/>
दुनिया की वही रौनक़ दिल की वही तंहाई!
    सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई;
    दुनिया की वही रौनक़ दिल की वही तंहाई!
  • प्यार करना हर किसी के बस की बात नहीं;<br/>

जिगर चाहिए अपनी ही खुशियां बर्बाद करने के लिए।
    प्यार करना हर किसी के बस की बात नहीं;
    जिगर चाहिए अपनी ही खुशियां बर्बाद करने के लिए।
  • कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख;<br/>
तू भी तो कभौ मुझको मनाने के लिये आ!<br/><br/>

पिंदार-ए-मोहब्बत : प्यार का अभिमान<br/>
भरम: भ्रम
    कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख;
    तू भी तो कभौ मुझको मनाने के लिये आ!

    पिंदार-ए-मोहब्बत : प्यार का अभिमान
    भरम: भ्रम
    ~ Ahmad Faraz
  • बड़ी अजीब सी है शहरों की रौशनी,<br/>

उजालों के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल है!
    बड़ी अजीब सी है शहरों की रौशनी,
    उजालों के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल है!