• अहमियत यहाँ हैसियत को मिलती है;<br/>
हम है कि, जज्बात लिए फिरते हैं।
    अहमियत यहाँ हैसियत को मिलती है;
    हम है कि, जज्बात लिए फिरते हैं।
  • जादू है या तिलिस्म है तुम्हारी जुबान में;<br/><br/>
तुम झूठ कह रहे थे, मुझे ऐतबार था।<br/><br/>

Meaning:<br/>
तिलिस्म - माया, इंद्रजाल, जादू, दृष्टिबंध, नजरबंदी
    जादू है या तिलिस्म है तुम्हारी जुबान में;

    तुम झूठ कह रहे थे, मुझे ऐतबार था।

    Meaning:
    तिलिस्म - माया, इंद्रजाल, जादू, दृष्टिबंध, नजरबंदी
    ~ Bekhud Dehlvi
  • प्यास दिल की बुझाने वो कभी आया भी नहीं;<br/>
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं;<br/>
बेरुखी इससे बड़ी और भला क्या होगी;<br/>
एक मुद्दत से हमें उसने सताया भी नहीं।
    प्यास दिल की बुझाने वो कभी आया भी नहीं;
    कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं;
    बेरुखी इससे बड़ी और भला क्या होगी;
    एक मुद्दत से हमें उसने सताया भी नहीं।
  • की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं;<br/>
होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं।
    की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं;
    होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं।
    ~ Mirza Ghalib
  • अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी;<br/>
तिरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर संभल न जाए।
    अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी;
    तिरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर संभल न जाए।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • समझ में साफ़ आ जाए फ़साहत इस को कहते हैं;<br/>
असर हो सुनने वाले पर बलाग़त इस को कहते हैं।<br/><br/>
Meaning:<br/>
फ़साहत  =  शुद्ध या अच्छी भाषा<br/>
बलाग़त  =  भाषण
    समझ में साफ़ आ जाए फ़साहत इस को कहते हैं;
    असर हो सुनने वाले पर बलाग़त इस को कहते हैं।

    Meaning:
    फ़साहत = शुद्ध या अच्छी भाषा
    बलाग़त = भाषण
    ~ Akbar Allahabadi
  • सख्तियां करता हूं दिल पर गैर से गाफिल हूं मैं;<br/>
हाय क्या अच्छी कही जालिम हूं, जाहिल हूं मैं।<br/><br/>
Meaning:<br/>
गाफिल - अनजान
    सख्तियां करता हूं दिल पर गैर से गाफिल हूं मैं;
    हाय क्या अच्छी कही जालिम हूं, जाहिल हूं मैं।

    Meaning:
    गाफिल - अनजान
    ~ Allama Iqbal
  • कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से,<br/>
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।
    कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से,
    ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।
    ~ Bashir Badr
  • उम्मीदों का फटा पैरहन;<br/>
रोज़-रोज़ सिलना पड़ता है;<br/>
तुम से मिलने की कोशिश में;<br/>
किस-किस से मिलना पड़ता है!
    उम्मीदों का फटा पैरहन;
    रोज़-रोज़ सिलना पड़ता है;
    तुम से मिलने की कोशिश में;
    किस-किस से मिलना पड़ता है!
    ~ Dr. Kumar Vishwas
  • आज जिस्म में जान है तो देखते नही हैं लोग;<br/>
जब रूह निकल जाएगी तो कफन हटा हटा कर देखेंगे लोग!
    आज जिस्म में जान है तो देखते नही हैं लोग;
    जब रूह निकल जाएगी तो कफन हटा हटा कर देखेंगे लोग!