• मोहब्बत है कि नफरत है, कोई इतना समझाए;<br />
कभी मैं दिल से लड़ती हूँ कभी दिल मुझ से लड़ता है।
    मोहब्बत है कि नफरत है, कोई इतना समझाए;
    कभी मैं दिल से लड़ती हूँ कभी दिल मुझ से लड़ता है।
  • 'दर्द' के मिलने से ऐ यार बुरा क्यों माना;
    उस को कुछ और सिवा दीद के मंज़ूर न था।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • वादा करके वो निभाना भूल जाते हैं;<br />
लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं;<br />
ऐसी आदत हो गयी है अब तो उस हरजाई की;<br />
रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं।
    वादा करके वो निभाना भूल जाते हैं;
    लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं;
    ऐसी आदत हो गयी है अब तो उस हरजाई की;
    रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं।
  • मेरा यही अंदाज इस जमाने को खलता है;
    कि इतना पीने के बाद भी सीधा कैसे चलता है!
  • सब फ़साने हैं दुनियादारी के,<br />
किस से किस का सुकून लूटा है;<br />
सच तो ये है कि इस ज़माने में,<br />
मैं भी झूठा हूँ तू भी झूठा है।
    सब फ़साने हैं दुनियादारी के,
    किस से किस का सुकून लूटा है;
    सच तो ये है कि इस ज़माने में,
    मैं भी झूठा हूँ तू भी झूठा है।
  • ज़िंदा रहे तो क्या है, जो मर जायें हम तो क्या;
    दुनिया से ख़ामोशी से गुज़र जायें हम तो क्या;
    हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने;
    एक ख्वाब हैं जहान में बिखर जायें हम तो क्या।
  • किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह;
    वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह;
    किसे ख़बर थी बढ़ेगी कुछ और तारीकी;
    छुपेगा वो किसी बदली में चाँदनी की तरह।
    ~ Qateel Shifai
  • गर्मिये हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं;<br />
हम चिरागों की तरह शाम से जल जाते हैं;<br />
शमा जलती है जिस आग में नुमाइश के लिए;<br />
हम उसी आग में गुमनाम से जल जाते हैं;<br />
जब भी आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ;<br />
जाने क्यों लोग मेरे नाम से जल जाते हैं।
    गर्मिये हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं;
    हम चिरागों की तरह शाम से जल जाते हैं;
    शमा जलती है जिस आग में नुमाइश के लिए;
    हम उसी आग में गुमनाम से जल जाते हैं;
    जब भी आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ;
    जाने क्यों लोग मेरे नाम से जल जाते हैं।
  • वादा करके निभाना भूल जाते हैं;<br />
लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं;<br />
ऐसी आदत हो गयी है अब तो सनम की;<br />
रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं।
    वादा करके निभाना भूल जाते हैं;
    लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं;
    ऐसी आदत हो गयी है अब तो सनम की;
    रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं।
  • सुनो एक बार और मोहब्बत करनी है तुमसे;<br />
लेकिन इस बार बेवफाई हम करेंगे।
    सुनो एक बार और मोहब्बत करनी है तुमसे;
    लेकिन इस बार बेवफाई हम करेंगे।