• तुझे मोहब्बत करना नहीं आता;
    मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ और नहीं आता;
    ज़िन्दगी गुजारने के बस दो ही तरीके हैं;
    एक तुझे नहीं आता और एक मुझे नहीं आता।
  • अजीब अँधेरा है साकी तेरी महफ़िल में;
    हमने दिल भी जलाया तो भी रौशनी न हुई!
  • बदले तो नहीं हैं वो दिल-ओ-जान के क़रीने;
    आँखों की जलन, दिल की चुभन अब भी वही है।
    ~ Ada Jafri
  • तमाम रात मेरे घर का एक दर खुला रहा;<br/>
मैं राह देखती रही वो रास्ता बदल गया।
    तमाम रात मेरे घर का एक दर खुला रहा;
    मैं राह देखती रही वो रास्ता बदल गया।
    ~ Parveen Shakir
  • चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी;
    ये मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी;
    आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद;
    आज की रात बड़ी देर के बाद आयी।
    ~ Kaifi Azmi
  • वो, जिनके घर मेहमानों का आना-जाना होता है;
    उनको घर का हर कमरा हर रोज़ सजाना होता है;
    जिस देहरी की क़िस्मत में स्वागत या वंदनवार न हों;
    उस चौखट के भीतर केवल इक तहख़ाना होता है।
  • तूने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया;<br/>
कितने रिश्ते तेरी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ;<br/>
कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है;<br/>
कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ।
    तूने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया;
    कितने रिश्ते तेरी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ;
    कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है;
    कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ।
  • शर्मिंदा होंगे जाने भी दो इम्तिहान को;
    रखेगा कौन तुम को अज़ीज़ अपनी जान से।
    ~ Mir Taqi Mir
  • दिल तो चाहा पर शिकस्त-ए-दिल ने मोहलत ही न दी;
    कुछ गिले-शिकवे भी कर लेते मुनाजतों के बाद।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • सजा लबों से अपने सुनाई तो होती;<br/>
रूठ जाने की वजह बताई तो होती;<br/>
बेच देता मैं खुद को तुम्हारे लिए;<br/>
कभी खरीदने की चाहत जताई तो होती।
    सजा लबों से अपने सुनाई तो होती;
    रूठ जाने की वजह बताई तो होती;
    बेच देता मैं खुद को तुम्हारे लिए;
    कभी खरीदने की चाहत जताई तो होती।