• एक लम्हा ना दिया साथ तुने मेरा;
    जबकि तेरे लिए हमने ज़िंदगी गुजार दी।
  • फूलों को तो बहारों में आना ही था;<br/>
खारों को क्यों संग में लाना था;<br/>
जिसे चाहा हमने दिल से अपनाया;<br/>
क्या उसी को हमसे दूर जाना था।
    फूलों को तो बहारों में आना ही था;
    खारों को क्यों संग में लाना था;
    जिसे चाहा हमने दिल से अपनाया;
    क्या उसी को हमसे दूर जाना था।
  • इतने कहाँ मशरूफ़ हो गए हो तुम;
    आजकल दिल तोड़ने भी नहीं आते!
  • जो तेरी मुंतज़िर तीन वो आँखें ही बुझ गई;
    अब क्यों सजा रहा है चिरागों से शाम को।
    ~ Mohsin Naqvi
  • यह अजब क़यामतें हैं तेरी रहगुज़र में गुज़ारी;
    ना हो के मर मिटें हम, ना हो के जी उठें हम।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • बंद मुट्ठी से जो उड़ जाती है क़िस्मत की परी;<br/>
इस हथेली में कोई छेद पुराना होगा।
    बंद मुट्ठी से जो उड़ जाती है क़िस्मत की परी;
    इस हथेली में कोई छेद पुराना होगा।
  • हाथों की लकीरों पर मत जा ऐ ग़ालिब;
    नसीब उन के भी होते हैं जिन के हाथ नहीं होते।
    ~ Mirza Ghalib
  • कहाँ तक सुनेगी रात कहाँ तक सुनाएंगे हम;
    शिकवे सारे सब आज तेरे रुबरु करें।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • जाने क्यों अकेले रहने को मज़बूर हो गए;<br/>
यादों के साये भी हमसे दूर हो गए;<br/>
हो गए तन्हा इस महफ़िल में;<br/>
कि हमारे अपने भी हमसे दूर हो गए।
    जाने क्यों अकेले रहने को मज़बूर हो गए;
    यादों के साये भी हमसे दूर हो गए;
    हो गए तन्हा इस महफ़िल में;
    कि हमारे अपने भी हमसे दूर हो गए।
  • अब भी इल्जाम-ए-मोहब्बत है हमारे सिर पर;
    अब तो बनती भी नहीं यार हमारी उसकी।