• प्यार के नाम पे यहाँ तो लोग खून पीते हैं;
    मुझे खुद पे नाज़ है कि मैं सिर्फ शराब पीता हूँ।
  • तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी;
    मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी;
    रहे मोहब्बत में ज़िन्दगी भर, रहेगी ये कशमकश बराबर;
    ना तुमको कुर्बत में जीत होगी ना मुझको फुर्कत में हार होगी;
    हज़ार उल्फ़त सताए लेकिन मेरे इरादों से है ये मुमकिन;
    अगर शराफ़त को तुमने छेड़ा तो ज़िन्दगी तुम पे वार होगी।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • मेरे लफ़्ज़ों से न कर मेरे क़िरदार का फ़ैसला;<br/>
तेरा वज़ूद मिट जायेगा मेरी हकीक़त ढूंढ़ते ढूंढ़ते।
    मेरे लफ़्ज़ों से न कर मेरे क़िरदार का फ़ैसला;
    तेरा वज़ूद मिट जायेगा मेरी हकीक़त ढूंढ़ते ढूंढ़ते।
  • वो रास्ते में पलटा तो रुक गया मैं भी;
    फिर कदम, कदम न रहे, सफर, सफर न रहा;
    नज़रों से गिराया उसको कुछ इस तरह हम ने;
    कि वो खुद अपनी नज़रों में मुताबिर न रहा।
  • किसी के दिल में बसना कुछ बुरा तो नही;<br/>
किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नही;<br/>
गुनाह हो यह ज़माने की नजर में तो क्या;<br/>
यह ज़माने वाले कोई खुदा तो नही।
    किसी के दिल में बसना कुछ बुरा तो नही;
    किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नही;
    गुनाह हो यह ज़माने की नजर में तो क्या;
    यह ज़माने वाले कोई खुदा तो नही।
  • अपना समझा तो कह दिया वरना;<br/>
गैरों से तो कोई गिला नहीं होता;<br/>
कुछ न कुछ पहले खोना पड़ता है;<br/>
मुफ्त में तो कोई तज़ुर्बा नहीं मिलता।
    अपना समझा तो कह दिया वरना;
    गैरों से तो कोई गिला नहीं होता;
    कुछ न कुछ पहले खोना पड़ता है;
    मुफ्त में तो कोई तज़ुर्बा नहीं मिलता।
  • गुलों को छू के शमीम-ए-दुआ नहीं आई;
    खुला हुआ था दरीचा सबा नहीं आई;
    हवा-ए-दश्त अभी तो जुनूँ का मौसम था;
    कहाँ थे हम तेरी आवाज़ नहीं आई।
    ~ Ada Jafri
  • तुझे फुर्सत न मिली पढ़ने की वरना;<br/>
हम तो तेरे शहर में बिकते रहे किताबों की तरह।
    तुझे फुर्सत न मिली पढ़ने की वरना;
    हम तो तेरे शहर में बिकते रहे किताबों की तरह।
  • उसकी तलाश में निकलूं भी तो क्या फ़ायदा;
    वो बदल गया है खोया होता तो अलग बात होती।
  • घर बना कर मेरे दिल में वो छोड़ गया;
    न ख़ुद रहता है न किसी और को बसने देता है।