• दुनिया में मत ढूंढ नाम ए वफ़ा 'फ़राज़';
    दिलों से खेलते हैं लोग बना के हमसफ़र अपना।
    ~ Ahmad Faraz
  • ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी;<br/>
ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी;<br/>
बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत;<br/>
जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी।
    ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी;
    ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी;
    बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत;
    जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी।
  • दिल वो नगर नहीं है कि फिर आबाद हो सके;
    पछताओगे सुनो हो ये बस्ती उजाड़ कर।
    ~ Mir Taqi Mir
  • मोहब्बत मुक़द्दर है एक ख्वाब नहीं;<br/>
ये वो अदा है जिसमे सब कामयाब नहीं;<br/>
जिन्हें पनाह मिली उन्हें उँगलियों पर गिन लो;<br/>
मगर जो फना हुए उनका कोई हिसाब नहीं।
    मोहब्बत मुक़द्दर है एक ख्वाब नहीं;
    ये वो अदा है जिसमे सब कामयाब नहीं;
    जिन्हें पनाह मिली उन्हें उँगलियों पर गिन लो;
    मगर जो फना हुए उनका कोई हिसाब नहीं।
  • सपना हैं आँखों में मगर नींद नहीं है;<br/>
दिल तो है जिस्म में मगर धड़कन नहीं है;<br/>
कैसे बयाँ करें हम अपना हाल-ए-दिल;<br/>
जी तो रहें हैं मगर ये ज़िंदगी नहीं है।
    सपना हैं आँखों में मगर नींद नहीं है;
    दिल तो है जिस्म में मगर धड़कन नहीं है;
    कैसे बयाँ करें हम अपना हाल-ए-दिल;
    जी तो रहें हैं मगर ये ज़िंदगी नहीं है।
  • तेरी महफ़िल से उठे तो किसी को खबर तक ना थी,
    तेरा मुड़-मुड़कर देखना हमें बदनाम कर गया।
  • मंजिल भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था;
    एक मैं अकेला था, बाकी काफिला भी उसका था;
    साथ-साथ चलने की सोच भी उसकी थी;
    फ़िर रास्ता बदलने का फ़ैसला भी उसका था।
  • इश्क़ करना तो लगता है जैसे मौत से भी बड़ी एक सज़ा है;<br/>
क्या किसी से शिकायत करें जब अपनी तक़दीर ही बेवफा है।
    इश्क़ करना तो लगता है जैसे मौत से भी बड़ी एक सज़ा है;
    क्या किसी से शिकायत करें जब अपनी तक़दीर ही बेवफा है।
  • तुम्हारी नफरत पर भी लुटा दी ज़िन्दगी हमने;<br/>
सोचो अगर तुम मोहब्बत करते तो हम क्या करते।
    तुम्हारी नफरत पर भी लुटा दी ज़िन्दगी हमने;
    सोचो अगर तुम मोहब्बत करते तो हम क्या करते।
  • दोस्ती किस से न थी किस से मुझे प्यार न था;
    जब बुरे वक़्त पे देखा तो कोई यार न था।
    ~ Meer Hasan