• एक दिन हम तुम से दूर हो जायेंगे;<br/>

अंधेरी गलियों में यूं ही खो जायेंगे;<br/>

आज हमारी फिक्र नहीं है आपको;<br/>

कल से हम भी बेफिक्र हो जायेंगे।
    एक दिन हम तुम से दूर हो जायेंगे;
    अंधेरी गलियों में यूं ही खो जायेंगे;
    आज हमारी फिक्र नहीं है आपको;
    कल से हम भी बेफिक्र हो जायेंगे।
  • उस की आँखों में नज़र आता है सारा जहाँ मुझ को;<br/>

अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा मैंने।
    उस की आँखों में नज़र आता है सारा जहाँ मुझ को;
    अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा मैंने।
  • मेरे प्यार को बहकावा समझ लिया उन्होंने;
    मेरे एहसास को पछतावा समझ लिया उन्होंने;
    मैं रोती रही उनकी याद में पर हुआ ये कि;
    मुझे ही बेवफ़ा समझ लिया उन्होंने।
  • रात क्या ढली सितारे चले गए;<br/>
गैरों से क्या शिकायत जब हमारे चले गए;<br/>
जीत सकते थे हम भी इश्क़ की बाज़ी;<br/>
पर उनको जिताने की धुन में हम हारे चले गए।
    रात क्या ढली सितारे चले गए;
    गैरों से क्या शिकायत जब हमारे चले गए;
    जीत सकते थे हम भी इश्क़ की बाज़ी;
    पर उनको जिताने की धुन में हम हारे चले गए।
  • संग-ए-मरमर से तराशा खुदा ने तेरे बदन को,<br/>

बाकी जो पत्थर बचा उससे तेरा दिल बना दिया।
    संग-ए-मरमर से तराशा खुदा ने तेरे बदन को,
    बाकी जो पत्थर बचा उससे तेरा दिल बना दिया।
  • दिलों को खरीदने वाले लोग हज़ार मिल जायेंगे;<br/>

तुमको दगा देने वाले बार-बार मिल जायेंगे;<br/>

मिलेगा न हमें तुम जैसा कोई;<br/>

मिलने को तो लोग हमें बेशुमार मिल जायेंगे!
    दिलों को खरीदने वाले लोग हज़ार मिल जायेंगे;
    तुमको दगा देने वाले बार-बार मिल जायेंगे;
    मिलेगा न हमें तुम जैसा कोई;
    मिलने को तो लोग हमें बेशुमार मिल जायेंगे!
  • जता-जता के मोहब्बत, दिखा-दिखा के ख़ुलूस;<br/>
बहुत क़रीब से लूटा है मेरे दोस्तों ने मुझे।
    जता-जता के मोहब्बत, दिखा-दिखा के ख़ुलूस;
    बहुत क़रीब से लूटा है मेरे दोस्तों ने मुझे।
  • उनके होंठों पे मेरा नाम जब आया होगा;<br/>
ख़ुद को रुसवाई से फिर कैसे बचाया होगा;<br/>
सुन के फ़साना औरों से मेरी बर्बादी का;<br/>
क्या उनको अपना सितम न याद आय होगा?
    उनके होंठों पे मेरा नाम जब आया होगा;
    ख़ुद को रुसवाई से फिर कैसे बचाया होगा;
    सुन के फ़साना औरों से मेरी बर्बादी का;
    क्या उनको अपना सितम न याद आय होगा?
  • मोहब्बत से वो देखते हैं सभी को,
    बस हम पर कभी ये इनायत नहीं होती;
    मैं तो शीशा हूँ टूटना मेरी फ़ितरत है,
    इसलिए मुझे पत्थरों से कोई शिकायत नहीं होती।
  • चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये हैं;
    इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं;
    महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश;
    जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये हैं।
    ~ Rahat Indori