• अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं;<br/>
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं!
    अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं;
    रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं!
    ~ Nida Fazli
  • कभी कभी रिश्तों की कीमत वो लोग समझा देते है;<br/>
जिनसे हमारा कोई रिश्ता ही नहीं है!
    कभी कभी रिश्तों की कीमत वो लोग समझा देते है;
    जिनसे हमारा कोई रिश्ता ही नहीं है!
  • हम तेरी धुन मैं परेशान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी;<br/>
और तू हम से गुरेजा ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी;<br/>
तू कहीं साकी गली में खो गयी है और यहाँ;<br/>
डंस गया इंसान को इंसान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी!
    हम तेरी धुन मैं परेशान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी;
    और तू हम से गुरेजा ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी;
    तू कहीं साकी गली में खो गयी है और यहाँ;
    डंस गया इंसान को इंसान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी!
  • एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद;<br/>
दूसरा सपना देखने के हौसले को 'ज़िंदगी' कहते हैं!
    एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद;
    दूसरा सपना देखने के हौसले को 'ज़िंदगी' कहते हैं!
    ~ Gulzar
  • दिल खोल कर साँस ले, अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर;<br/>
कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे, सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर!
    दिल खोल कर साँस ले, अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर;
    कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे, सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर!
  • जिंदगी जैसे जलानी थी वैसे जला दी हमने गालिब;<br/>
अब धुएँ पर बहस कैसी और राख पर ऐतराज कैसा!
    जिंदगी जैसे जलानी थी वैसे जला दी हमने गालिब;
    अब धुएँ पर बहस कैसी और राख पर ऐतराज कैसा!
  • कागज की कश्ती में सवार है हम;<br/>

फिर भी कल के लिये, परेशान है हम!
    कागज की कश्ती में सवार है हम;
    फिर भी कल के लिये, परेशान है हम!
  • हौंसलों का सबूत देना था किसी को;<br/>
इसलिए ठोकरें खा के भी मुस्कुरा पड़े!
    हौंसलों का सबूत देना था किसी को;
    इसलिए ठोकरें खा के भी मुस्कुरा पड़े!
  • बड़े महँगे किरदार है ज़िंदगी में, जनाब;<BR/>
समय समय पर सबके भाव बढ़ जाते हैं!
    बड़े महँगे किरदार है ज़िंदगी में, जनाब;
    समय समय पर सबके भाव बढ़ जाते हैं!
  • बड़े महँगे किरदार है ज़िंदगी में, जनाब;<br/>
समय समय पर सबके भाव बढ़ जाते हैं!
    बड़े महँगे किरदार है ज़िंदगी में, जनाब;
    समय समय पर सबके भाव बढ़ जाते हैं!