• जिन्दगी की उलझनों ने;<br/>
कम कर दी हमारी शरारते;<br/>
और लोग समझते हैं कि;<br/>
हम समझदार हो गये।
    जिन्दगी की उलझनों ने;
    कम कर दी हमारी शरारते;
    और लोग समझते हैं कि;
    हम समझदार हो गये।
  • मौत अंजाम-ए-ज़िन्दगी है मगर;<br/> 
लोग मरते हैं ज़िन्दगी के लिए।
    मौत अंजाम-ए-ज़िन्दगी है मगर;
    लोग मरते हैं ज़िन्दगी के लिए।
    ~ Sahil Manak Puri
  • कौन देता है उम्र भर का सहारा;<br />
लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं!
    कौन देता है उम्र भर का सहारा;
    लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं!
  • तेरे आज़ाद बन्दों की ना ये दुनिया ना वो दुनिया;<br/>
यहाँ मरने की पाबंदी, वहां जीने की पाबंदी!
    तेरे आज़ाद बन्दों की ना ये दुनिया ना वो दुनिया;
    यहाँ मरने की पाबंदी, वहां जीने की पाबंदी!
  • जिंदगी जिसको तेरा प्यार मिला वो जाने;<br/>
हम तो नाकाम ही रहे चाहने वालों की तरह!
    जिंदगी जिसको तेरा प्यार मिला वो जाने;
    हम तो नाकाम ही रहे चाहने वालों की तरह!
  • आंधियां गम की चलेंगी तो संवर जाऊंगा;<br/>
मैं तो दरिया हूँ समंदर में उतर जाऊंगा;<br/>
मुझे सूली पे चढाने की ज़रूरत क्या है;<br/>
मेरे हाथ से कलम छीन लो मैं मर जाऊंगा!
    आंधियां गम की चलेंगी तो संवर जाऊंगा;
    मैं तो दरिया हूँ समंदर में उतर जाऊंगा;
    मुझे सूली पे चढाने की ज़रूरत क्या है;
    मेरे हाथ से कलम छीन लो मैं मर जाऊंगा!
  • देखा है ज़िन्दगी को कुछ इतना करीब से, कि चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से;
    इस रेंगती हयात का कब तक उठाएं भार, बीमार अब उलझने लगे हैं तबीब से;
    कुछ इस तरह दिया है ज़िन्दगी ने हमारा साथ जैसे कोई निभा रहा हो रकीब से;
    ए रूह-ए-असर जाग कहाँ सो रही है तू, आवाज़ दे रहे हैं पयम्बर सलीब से!
  • खुशनसीब हैं वो जो दिल मे किसी को जगह देते हैं;<br/>
बेचैनी सहकर भी दूसरों को हंसना सिखा देते हैं;<br/>
दुनियावाले लाख चाहें बदनाम उन्हें कर लें;<br/>
मगर वो अपनी सादगी से हर दिल में जगह बना लेतें हैं!
    खुशनसीब हैं वो जो दिल मे किसी को जगह देते हैं;
    बेचैनी सहकर भी दूसरों को हंसना सिखा देते हैं;
    दुनियावाले लाख चाहें बदनाम उन्हें कर लें;
    मगर वो अपनी सादगी से हर दिल में जगह बना लेतें हैं!
  • थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ;<br />
ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ;<br />
कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी यादें;<br />
जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ।
    थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ;
    ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ;
    कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी यादें;
    जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ।
  • ज़िन्दगी दरस्त-ए-ग़म थी और कुछ नहीं;<br/>
ये मेरा ही हौंसला है की दरम्यां से गुज़र गया!
    ज़िन्दगी दरस्त-ए-ग़म थी और कुछ नहीं;
    ये मेरा ही हौंसला है की दरम्यां से गुज़र गया!