• आँखों में पानी रखो, होंठो पे चिंगारी रखो;<br/>
जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो;<br/>
राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें;<br/>
रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो।
    आँखों में पानी रखो, होंठो पे चिंगारी रखो;
    जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो;
    राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें;
    रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो।
    ~ Rahat Indori
  • वो दरिया ही नहीं जिसमे नहीं रवानी;<br/>
जब जोश ही नहीं तो फिर किस काम की है जवानी।
    वो दरिया ही नहीं जिसमे नहीं रवानी;
    जब जोश ही नहीं तो फिर किस काम की है जवानी।
    ~ Navjot Singh Sidhu
  • 'सुकून' की बात मत कर ऐ ग़ालिब;<br/>
बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता।
    'सुकून' की बात मत कर ऐ ग़ालिब;
    बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता।
  • उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले;<br/>
गो दब गए हैं बार-ए-गम-ए-जिन्दगी से हम।<br/><br/>
अर्थ:<br/>
वलवले - उत्साह, हौंसला, उम्मीद<br/>
बारे - बोझ, भार, वजन
    उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले;
    गो दब गए हैं बार-ए-गम-ए-जिन्दगी से हम।

    अर्थ:
    वलवले - उत्साह, हौंसला, उम्मीद
    बारे - बोझ, भार, वजन
    ~ Sahir Ludhianvi
  • ऐ ज़िंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझ से;<br/>
ये रूठे हुए लोग मुझ से मनाये नहीं जाते!
    ऐ ज़िंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझ से;
    ये रूठे हुए लोग मुझ से मनाये नहीं जाते!
  • कहाँ-कहाँ से इकट्ठा करूँ, ऐ ज़िंदगी तुझको,<br/>

जिधर भी देखूँ, तू ही तू बिखरी पड़ी है।
    कहाँ-कहाँ से इकट्ठा करूँ, ऐ ज़िंदगी तुझको,
    जिधर भी देखूँ, तू ही तू बिखरी पड़ी है।
  • मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा;<br/>
चुप-चाप से बहना, अपनी मौज में रहना।
    मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा;
    चुप-चाप से बहना, अपनी मौज में रहना।
  • चलो मैं भी दौड़ता हूँ इस होड़ की दौड़ में;<br/>
तुम सिर्फ ये बता दो इसकी मंज़िल कहाँ है!
    चलो मैं भी दौड़ता हूँ इस होड़ की दौड़ में;
    तुम सिर्फ ये बता दो इसकी मंज़िल कहाँ है!
  • कट गया पेड़ मगर ताल्लुक की बात थी;<br/>
बैठे रहे ज़मीन पर वो परिंदे रात भर!
    कट गया पेड़ मगर ताल्लुक की बात थी;
    बैठे रहे ज़मीन पर वो परिंदे रात भर!
  • जब से पता चला है कि मरने का नाम है ज़िंदगी;<br/>
तब से कफ़न बांधे कातिल को ढूँढ़ते हैं!
    जब से पता चला है कि मरने का नाम है ज़िंदगी;
    तब से कफ़न बांधे कातिल को ढूँढ़ते हैं!