• छोटा कर के देखिए जीवन का विस्तार;<br/>
आँखों भर आकाश है, बाहों भर संसार।Upload to Facebook
    छोटा कर के देखिए जीवन का विस्तार;
    आँखों भर आकाश है, बाहों भर संसार।
    ~ Nida Fazli
  • तुम्हारी एक निगाह से कतल होते हैं लोग फ़राज़;<br/>
एक नज़र हम को भी देख लो कि तुम बिन ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती।Upload to Facebook
    तुम्हारी एक निगाह से कतल होते हैं लोग फ़राज़;
    एक नज़र हम को भी देख लो कि तुम बिन ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती।
    ~ Ahmad Faraz
  • आँखों में पानी रखो, होंठो पे चिंगारी रखो;<br/>
जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो;<br/>
राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें;<br/>
रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो।Upload to Facebook
    आँखों में पानी रखो, होंठो पे चिंगारी रखो;
    जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो;
    राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें;
    रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो।
    ~ Rahat Indori
  • वो दरिया ही नहीं जिसमे नहीं रवानी;<br/>
जब जोश ही नहीं तो फिर किस काम की है जवानी।Upload to Facebook
    वो दरिया ही नहीं जिसमे नहीं रवानी;
    जब जोश ही नहीं तो फिर किस काम की है जवानी।
    ~ Navjot Singh Sidhu
  • 'सुकून' की बात मत कर ऐ ग़ालिब;<br/>
बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता।Upload to Facebook
    'सुकून' की बात मत कर ऐ ग़ालिब;
    बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता।
  • उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले;<br/>
गो दब गए हैं बार-ए-गम-ए-जिन्दगी से हम।<br/><br/>
अर्थ:<br/>
वलवले - उत्साह, हौंसला, उम्मीद<br/>
बारे - बोझ, भार, वजनUpload to Facebook
    उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले;
    गो दब गए हैं बार-ए-गम-ए-जिन्दगी से हम।

    अर्थ:
    वलवले - उत्साह, हौंसला, उम्मीद
    बारे - बोझ, भार, वजन
    ~ Sahir Ludhianvi
  • ऐ ज़िंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझ से;<br/>
ये रूठे हुए लोग मुझ से मनाये नहीं जाते!

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    ऐ ज़िंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझ से;
    ये रूठे हुए लोग मुझ से मनाये नहीं जाते!
  • कहाँ-कहाँ से इकट्ठा करूँ, ऐ ज़िंदगी तुझको,<br/>

जिधर भी देखूँ, तू ही तू बिखरी पड़ी है।Upload to Facebook
    कहाँ-कहाँ से इकट्ठा करूँ, ऐ ज़िंदगी तुझको,
    जिधर भी देखूँ, तू ही तू बिखरी पड़ी है।
  • मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा;<br/>
चुप-चाप से बहना, अपनी मौज में रहना।Upload to Facebook
    मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा;
    चुप-चाप से बहना, अपनी मौज में रहना।
  • चलो मैं भी दौड़ता हूँ इस होड़ की दौड़ में;<br/>
तुम सिर्फ ये बता दो इसकी मंज़िल कहाँ है!Upload to Facebook
    चलो मैं भी दौड़ता हूँ इस होड़ की दौड़ में;
    तुम सिर्फ ये बता दो इसकी मंज़िल कहाँ है!