• जिंदगी दो लफ्ज़ों में यूँ अर्ज है;<br/>
आधी कर्ज है, तो आधी फर्ज है!
    जिंदगी दो लफ्ज़ों में यूँ अर्ज है;
    आधी कर्ज है, तो आधी फर्ज है!
  • सख़्त हाथों से भी छूट जाती हैं कभी उंगलियाँ;<br/>
रिश्ते ज़ोर से नहीं तमीज़ से थामे जाते हैं!
    सख़्त हाथों से भी छूट जाती हैं कभी उंगलियाँ;
    रिश्ते ज़ोर से नहीं तमीज़ से थामे जाते हैं!
  • मोहब्बत की कहूँ देवी या तुमको बंदगी कह दूँ;
    बुरा मानो न गर हमदम तो तुमको ज़िन्दगी कह दूँ!
  • ज़िन्दगी तो सभी के लिए रंगीन किताब है;<br/>
फर्क है तो बस इतना कि कोई;<br/> 
हर पन्ने को दिल से पढ़ रहा है;<br/> 
और कोई दिल रखने के लिए पन्ने पलट रहा है!
    ज़िन्दगी तो सभी के लिए रंगीन किताब है;
    फर्क है तो बस इतना कि कोई;
    हर पन्ने को दिल से पढ़ रहा है;
    और कोई दिल रखने के लिए पन्ने पलट रहा है!
  • लगता है, आज ज़िन्दगी कुछ ख़फ़ा है;<br/>
चलिए छोड़िये, कौन सा पहली दफ़ा है!
    लगता है, आज ज़िन्दगी कुछ ख़फ़ा है;
    चलिए छोड़िये, कौन सा पहली दफ़ा है!
  • फासलें इस कदर हैं आजकल रिश्तों में;
    जैसे कोई घर खरीदा हो किश्तों में!
  • चुपचाप गुज़ार देगें तेरे बिना भी ये ज़िन्दगी;<br/>
लोगो को सिखा देगें मोहब्बत ऐसे भी होती है!
    चुपचाप गुज़ार देगें तेरे बिना भी ये ज़िन्दगी;
    लोगो को सिखा देगें मोहब्बत ऐसे भी होती है!
  • रास्ते कहाँ ख़त्म होते हैं, जिन्दगी के सफ़र में;
    मंजिल तो वहीं है जहाँ, ख्वाहिशें थम जाए!
  • हाल पूछ लेने से कौन सा हाल ठीक हो जाता है;
    बस एक तसल्ली सी हो जाती है कि इस भीड़ भरी दुनिया में कोई अपना भी है।
  • हर एक लकीर, एक तजुर्बा है जनाब,<br/>
झुर्रियां चेहरों पर, यूँ ही आया नही करती।
    हर एक लकीर, एक तजुर्बा है जनाब,
    झुर्रियां चेहरों पर, यूँ ही आया नही करती।