• बड़ी चालाक होती है ये जिंदगी हमारी,
    रोज़ नया कल देकर, उम्र छीनती रहती है।
  • हर बात मानी है तेरी सिर झुका कर ए जिंदगी,
    हिसाब बराबर कर तू भी तो कुछ शर्तें मान मेरी।
  • "दरिया" बन कर किसी को डुबोना बहुत आसान है,
    मगर "जरिया" बनकर किसी को बचायें तो कोई बात बने।
  • रास्ते कहाँ खत्म होते हैं जिंदगी के इस सफर में,
    मंजिल तो वही है जहाँ ख्वाहिशें थम जायें।
  • समझ ना आया ए ज़िन्दगी तेरा ये फ़लसफ़ा,
    एक तरफ़ कहते हैं सब्र का फल मीठा है
    और दूसरी तरफ़ कहते हैं वक्त किसी का इंतज़ार नहीं करता।
  • जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाये,
    शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर कर जिया जाये;
    जब जलेबी की तरह उलझ ही रही है तू ए जिंदगी,
    तो फिर क्यों न तुझे चाशनी में डुबा कर मजा ले ही लिया जाये।
  • ऐ जिन्दगी तेरे जज्बे को सलाम,
    पता है कि मंजिल मौत है फिर भी दौड रही है तू।
  • बारिश में रख दो इस जिंदगी के पन्नों को, ताकि धुल जाए स्याही,
    ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन करता है कभी-कभी।
  • एक नींद है जो लोगों को रात भर नहीं आती,
    और एक जमीर है जो हर वक़्त सोया रहता है।
  • ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही ख्वाहिशों का है,
    ना तो किसी को गम चाहिए और ना ही किसी को कम चाहिए।