• इस दिल को और बेकरार तो होना ही था;<br/>
किसी न किसी से उसे प्यार तो होना ही था!<br/>
तुम अपने आस्तीन में गर साँप पाल रहे हो;<br/>
आप को थौड़ा ख़बरदार तो होना ही था!
    इस दिल को और बेकरार तो होना ही था;
    किसी न किसी से उसे प्यार तो होना ही था!
    तुम अपने आस्तीन में गर साँप पाल रहे हो;
    आप को थौड़ा ख़बरदार तो होना ही था!
  • फ़िक्र-ए-रोज़गार ने फ़ासले बढा दिए;<br/>
वरना सब यार एक साथ थे, अभी कल ही की तो बात है!
    फ़िक्र-ए-रोज़गार ने फ़ासले बढा दिए;
    वरना सब यार एक साथ थे, अभी कल ही की तो बात है!
  • मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं।<BR/>
मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है।
    मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं।
    मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है।
  • ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें,<br/>
ख़्वाहिशें दफ़न करें, या चादर बड़ी करें!
    ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें,
    ख़्वाहिशें दफ़न करें, या चादर बड़ी करें!
  • खामोशियाँ ही बेहतर हैं जिंदगी के सफर में;<br/>
लफ्जों की मार ने कई घर तबाह किये!
    खामोशियाँ ही बेहतर हैं जिंदगी के सफर में;
    लफ्जों की मार ने कई घर तबाह किये!
  • दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है,<br/>
आखिर इस दर्द की दवा क्या है,<br/> 
हमको उनसे है उम्मीद वफ़ा की,<br/> 
जो जानते ही नहीं वफ़ा क्या है।
    दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है,
    आखिर इस दर्द की दवा क्या है,
    हमको उनसे है उम्मीद वफ़ा की,
    जो जानते ही नहीं वफ़ा क्या है।
  • सुना है इस महफिल में शायर बहुत हैं,<br/>
कुछ हमें भी सुनाओ, आज हम घायल बहुत हैं!
    सुना है इस महफिल में शायर बहुत हैं,
    कुछ हमें भी सुनाओ, आज हम घायल बहुत हैं!
  • तपिश और बढ़ गई इन चंद बूंदों के बाद,<br/> 
काले स्याह बादल ने भी बस यूँ ही बहलाया मुझे।
    तपिश और बढ़ गई इन चंद बूंदों के बाद,
    काले स्याह बादल ने भी बस यूँ ही बहलाया मुझे।
  • आइने और दिल का बस एक ही फसाना है,<br/>
टूट कर एक दिन दोनों को बिखर जाना है।
    आइने और दिल का बस एक ही फसाना है,
    टूट कर एक दिन दोनों को बिखर जाना है।
  • शब्द तो यदा-कदा, चुभते ही रहते हैं,<BR/>
मौन चुभ जाए किसी का तो सम्भल जाना चाहिए!
    शब्द तो यदा-कदा, चुभते ही रहते हैं,
    मौन चुभ जाए किसी का तो सम्भल जाना चाहिए!