• कुछ अपनों की वजह से,<br/>
कल अपनों के बीच नहीं रहेंगे हम!
    कुछ अपनों की वजह से,
    कल अपनों के बीच नहीं रहेंगे हम!
  • तस्वीर खिंचवाने के रिवाज़ ने कितना मजबूर कर दिया,<br/>
ग़म कितना भी हो दिल में मुस्कुराना पड़ता है!
    तस्वीर खिंचवाने के रिवाज़ ने कितना मजबूर कर दिया,
    ग़म कितना भी हो दिल में मुस्कुराना पड़ता है!
  • मेरे ऐब तो ज़माने में उजागर है,<br/>
फ़िक्र वो करे जिनके गुनाह पर्दे में हैं!
    मेरे ऐब तो ज़माने में उजागर है,
    फ़िक्र वो करे जिनके गुनाह पर्दे में हैं!
  • अगर तुम ना होते, तो टूट के बिखर जाते,<br/>
गर तुम पास होते, तो इतना भी ना टूटते!
    अगर तुम ना होते, तो टूट के बिखर जाते,
    गर तुम पास होते, तो इतना भी ना टूटते!
  • गज़ब की धूप है इस शहर में फिर भी पता  नहीं;<br/>
लोगों के दिल यहाँ, पिघलते क्यों नहीं।
    गज़ब की धूप है इस शहर में फिर भी पता नहीं;
    लोगों के दिल यहाँ, पिघलते क्यों नहीं।
  • कौन पूछता है पिंजरे में बंद 'परिंदों' को ग़ालिब;<br/>
याद वही आते हैं उड़ जाते हैं!
    कौन पूछता है पिंजरे में बंद 'परिंदों' को ग़ालिब;
    याद वही आते हैं उड़ जाते हैं!
  • ख़्वाबों की ज़मीन पर रखा था पाँव छिल गया;<br/>
कौन कहता है ख्वाब मखमली होते हैं!
    ख़्वाबों की ज़मीन पर रखा था पाँव छिल गया;
    कौन कहता है ख्वाब मखमली होते हैं!
  • ये किस अंदाज में तुमने मेरी मोहब्बत का सौदा किया;<br/>
ना दूसरों के लायक छोड़ा ना खुद का होने दिया!
    ये किस अंदाज में तुमने मेरी मोहब्बत का सौदा किया;
    ना दूसरों के लायक छोड़ा ना खुद का होने दिया!
  • फिर छलावे में हमदर्दों के चोट खाओगे;<br/>
किसी को ज़ख्म दिखाए तो सज़ा पाओगे!
    फिर छलावे में हमदर्दों के चोट खाओगे;
    किसी को ज़ख्म दिखाए तो सज़ा पाओगे!
  • ज़िंदगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं है,<br/>
मैंने हर शख़्स को यहाँ ख़ुशियों का इंतजार करते देखा है!
    ज़िंदगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं है,
    मैंने हर शख़्स को यहाँ ख़ुशियों का इंतजार करते देखा है!