• अगर तुम ना होते, तो टूट के बिखर जाते,<br/>
गर तुम पास होते, तो इतना भी ना टूटते!
    अगर तुम ना होते, तो टूट के बिखर जाते,
    गर तुम पास होते, तो इतना भी ना टूटते!
  • गज़ब की धूप है इस शहर में फिर भी पता  नहीं;<br/>
लोगों के दिल यहाँ, पिघलते क्यों नहीं।
    गज़ब की धूप है इस शहर में फिर भी पता नहीं;
    लोगों के दिल यहाँ, पिघलते क्यों नहीं।
  • कौन पूछता है पिंजरे में बंद 'परिंदों' को ग़ालिब;<br/>
याद वही आते हैं उड़ जाते हैं!
    कौन पूछता है पिंजरे में बंद 'परिंदों' को ग़ालिब;
    याद वही आते हैं उड़ जाते हैं!
  • ख़्वाबों की ज़मीन पर रखा था पाँव छिल गया;<br/>
कौन कहता है ख्वाब मखमली होते हैं!
    ख़्वाबों की ज़मीन पर रखा था पाँव छिल गया;
    कौन कहता है ख्वाब मखमली होते हैं!
  • ये किस अंदाज में तुमने मेरी मोहब्बत का सौदा किया;<br/>
ना दूसरों के लायक छोड़ा ना खुद का होने दिया!
    ये किस अंदाज में तुमने मेरी मोहब्बत का सौदा किया;
    ना दूसरों के लायक छोड़ा ना खुद का होने दिया!
  • फिर छलावे में हमदर्दों के चोट खाओगे;<br/>
किसी को ज़ख्म दिखाए तो सज़ा पाओगे!
    फिर छलावे में हमदर्दों के चोट खाओगे;
    किसी को ज़ख्म दिखाए तो सज़ा पाओगे!
  • ज़िंदगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं है,<br/>
मैंने हर शख़्स को यहाँ ख़ुशियों का इंतजार करते देखा है!
    ज़िंदगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं है,
    मैंने हर शख़्स को यहाँ ख़ुशियों का इंतजार करते देखा है!
  • हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे,<br/>
लफ़्ज़ कागज़ पर उतर जादूगरी करने लगे;<br/>
क़ामयाबी जिसने पाई उनके घर तो बस गये,<br/>
जिनके दिल टूटे वो आशिक़ शायरी करने लगे!
    हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे,
    लफ़्ज़ कागज़ पर उतर जादूगरी करने लगे;
    क़ामयाबी जिसने पाई उनके घर तो बस गये,
    जिनके दिल टूटे वो आशिक़ शायरी करने लगे!
  • कुछ कह गए, कुछ सह गए, कुछ कहते कहते रह गए;<br/>
मैं सही तुम गलत के खेल में, न जाने कितने रिश्ते ढह गए!
    कुछ कह गए, कुछ सह गए, कुछ कहते कहते रह गए;
    मैं सही तुम गलत के खेल में, न जाने कितने रिश्ते ढह गए!
  • एक फ़क़त याद है जाना उसका;
    और कुछ उसके सिवा याद नहीं!