• गिरते हुऐ `अश्क` की `कीमत` `न` पूछना;<br/>
इश्क़` के हर बूंद में `लाखों` `सवाल` होते हैं!
    गिरते हुऐ "अश्क" की "कीमत" "न" पूछना;
    इश्क़" के हर बूंद में "लाखों" "सवाल" होते हैं!
  • शर्मिंदा होंगे, जाने भी दो इम्तिहान को;<br/>
रखेगा तुम को कौन अज़ीज़, अपनी जान से!
    शर्मिंदा होंगे, जाने भी दो इम्तिहान को;
    रखेगा तुम को कौन अज़ीज़, अपनी जान से!
    ~ Mir Taqi Mir
  • इतना दर्द तो मुझे मरने से भी नही होगा;<br/>
जितना दर्द तुम्हारी खामोशी ने दिया है!
    इतना दर्द तो मुझे मरने से भी नही होगा;
    जितना दर्द तुम्हारी खामोशी ने दिया है!
  • हम तो फूलों की तरह, अपनी आदत से बेबस हैं;<br/>
तोडने वाले को भी, खुशबू की सजा देते हैं!
    हम तो फूलों की तरह, अपनी आदत से बेबस हैं;
    तोडने वाले को भी, खुशबू की सजा देते हैं!
  • बुलंदीयो को पाने कि ख्वाईश तो बहुत हे मेरी;<br/>
मगर ओरो को रोंदने का हुनर कहा से लाऊ!
    बुलंदीयो को पाने कि ख्वाईश तो बहुत हे मेरी;
    मगर ओरो को रोंदने का हुनर कहा से लाऊ!
  • इतने कहाँ मसरूफ हो गए हो आजकल;<br/>
की अब दिल दुखाने भी नहीं आते!
    इतने कहाँ मसरूफ हो गए हो आजकल;
    की अब दिल दुखाने भी नहीं आते!
  • एक उम्र से तराश रहा हूँ खुद को, कि हो जाऊं लोगो के मुताबिक;<br/>

पर हर रोज ये जमाना मुझमे, एक नया ऐब निकाल लेता है!
    एक उम्र से तराश रहा हूँ खुद को, कि हो जाऊं लोगो के मुताबिक;
    पर हर रोज ये जमाना मुझमे, एक नया ऐब निकाल लेता है!
  • जिंदगी जैसे जलानी थी वैसे जला दी हमने गालिब;<BR/>
अब धुएँ पर बहस कैसी और राख पर ऐतराज कैसा!
    जिंदगी जैसे जलानी थी वैसे जला दी हमने गालिब;
    अब धुएँ पर बहस कैसी और राख पर ऐतराज कैसा!
  • सुना था लोगों से वक्त बदलता है;<br/>
आज वक्त ने बताया लोग बदलते हैं!
    सुना था लोगों से वक्त बदलता है;
    आज वक्त ने बताया लोग बदलते हैं!
  • इस दिल को और बेकरार तो होना ही था;<br/>
किसी न किसी से उसे प्यार तो होना ही था!<br/>
तुम अपने आस्तीन में गर साँप पाल रहे हो;<br/>
आप को थौड़ा ख़बरदार तो होना ही था!
    इस दिल को और बेकरार तो होना ही था;
    किसी न किसी से उसे प्यार तो होना ही था!
    तुम अपने आस्तीन में गर साँप पाल रहे हो;
    आप को थौड़ा ख़बरदार तो होना ही था!