• चालाकी कहाँ मिलती है, मुझे भी बता दो दोस्तों;<br/>
हर कोई ठग ले जाता है, जरा सा मीठा बोल कर!Upload to Facebook
    चालाकी कहाँ मिलती है, मुझे भी बता दो दोस्तों;
    हर कोई ठग ले जाता है, जरा सा मीठा बोल कर!
  • कोई सुलह करा दे जिदंगी की उलझनों से;<br/>
बड़ी तलब लगी है आज मुस्कुराने की!Upload to Facebook
    कोई सुलह करा दे जिदंगी की उलझनों से;
    बड़ी तलब लगी है आज मुस्कुराने की!
  • बचा लिया मुझे तूफां की मौज ने वर्ना;<br/>
किनारे वाले सफीना मेरा डुबो देते।<br/><br/>
अर्थ:<br/>
सफीना - नावUpload to Facebook
    बचा लिया मुझे तूफां की मौज ने वर्ना;
    किनारे वाले सफीना मेरा डुबो देते।

    अर्थ:
    सफीना - नाव
    ~ Majrooh Sultanpuri
  • गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं;<br/>
मैं आ गया हूँ, बता इंतज़ाम क्या क्या हैं;<br/>
फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं;<br/>
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या है।Upload to Facebook
    गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं;
    मैं आ गया हूँ, बता इंतज़ाम क्या क्या हैं;
    फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं;
    तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या है।
    ~ Rahat Indori
  • गर जिंदगी में मिल गए फिर इत्तेफ़ाक़ से;<br/>
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम।Upload to Facebook
    गर जिंदगी में मिल गए फिर इत्तेफ़ाक़ से;
    पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • आह जो दिल से निकाली जाएगी;<br/>
क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी।Upload to Facebook
    आह जो दिल से निकाली जाएगी;
    क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी।
    ~ Akbar Allahabadi
  • वह अफसाना जिसे अंजाम तक, लाना न हो मुमकिन;<br/>
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर, छोड़ना अच्छा।Upload to Facebook
    वह अफसाना जिसे अंजाम तक, लाना न हो मुमकिन;
    उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर, छोड़ना अच्छा।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में;<br/>
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।Upload to Facebook
    लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में;
    तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।
    ~ Bashir Badr
  • वो बात बात पे देता है परिंदों की मिसाल;<br/>
साफ़ साफ़ नहीं कहता मेरा शहर ही छोड़ दो।Upload to Facebook
    वो बात बात पे देता है परिंदों की मिसाल;
    साफ़ साफ़ नहीं कहता मेरा शहर ही छोड़ दो।
    ~ Ahmad Faraz
  • उन्हें सआदते-मंजिल-रसी नसीब क्या होगी;<br/>
वह पाँव जो राहे-तलब में डगमगा न सके।<br/><br/>
अर्थ:<br/>
1. सआदते - प्रताप, तेज, इकबाल <br/>
2. रसी - मंजिल की प्राप्ति, मंजिल तक पहुंच <br/>
3. राहे-तलब - रास्ते की खोजUpload to Facebook
    उन्हें सआदते-मंजिल-रसी नसीब क्या होगी;
    वह पाँव जो राहे-तलब में डगमगा न सके।

    अर्थ:
    1. सआदते - प्रताप, तेज, इकबाल
    2. रसी - मंजिल की प्राप्ति, मंजिल तक पहुंच
    3. राहे-तलब - रास्ते की खोज
    ~ Jigar Moradabadi