• जिंदगी इतना दर्द नहीं देती कि मरने को जी चाहे;<br/>
बस लोग इतने दर्द दे जाते हैं कि, जीने को दिल नहीं करता।Upload to Facebook
    जिंदगी इतना दर्द नहीं देती कि मरने को जी चाहे;
    बस लोग इतने दर्द दे जाते हैं कि, जीने को दिल नहीं करता।
  • आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की;<br/>
हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की।Upload to Facebook
    आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की;
    हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की।
  • आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना;<br/>
कुछ आग बच रही थी सो आशिक़ का दिल बना!Upload to Facebook
    आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना;
    कुछ आग बच रही थी सो आशिक़ का दिल बना!
    ~ Mohammad Rafi Sauda
  • मत पूछ कि मेरा कारोबार क्या है;<BR/>
मोहब्बत की छोटी सी दुकान है नफरत के बाजार में!Upload to Facebook
    मत पूछ कि मेरा कारोबार क्या है;
    मोहब्बत की छोटी सी दुकान है नफरत के बाजार में!
  • बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का;<br/>
जो चीरा तो इक क़तरा-ए-ख़ूँ न निकला!
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    बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का;
    जो चीरा तो इक क़तरा-ए-ख़ूँ न निकला!
    ~ Aatish Haidar Ali
  • दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यों;<br/>
रोयेंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यों।Upload to Facebook
    दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यों;
    रोयेंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यों।
    ~ Mirza Ghalib
  • जब खाक ही होना था मुझको तो खाक-ए-रह-ए-सहरा होता,<br/>
इक कोशिश-ए-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।<br/><br/>
 
1. खाक - धूल, रंज, गर्द, मिट्टी जमीन<br/>
2. खाक-ए-रह-ए-सहरा - मरूस्थल या रेगिस्तान के रास्ते की धूलUpload to Facebook
    जब खाक ही होना था मुझको तो खाक-ए-रह-ए-सहरा होता,
    इक कोशिश-ए-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।

    1. खाक - धूल, रंज, गर्द, मिट्टी जमीन
    2. खाक-ए-रह-ए-सहरा - मरूस्थल या रेगिस्तान के रास्ते की धूल
    ~ Jameel Mazhari
  • अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,<br/>
गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।<br/><br/>

1. आस्ताँ - चौखट, दहलीज, ड्योढ़ीUpload to Facebook
    अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,
    गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।

    1. आस्ताँ - चौखट, दहलीज, ड्योढ़ी
    ~ Jaleel Manikpuri
  • अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;<br/>
मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।<br/><br/>

1. अजल - मृत्यु<br/>
2. सोगवारों - शोक करने वालोंUpload to Facebook
    अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;
    मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।

    1. अजल - मृत्यु
    2. सोगवारों - शोक करने वालों
    ~ Daagh Dehlvi
  • कुछ दर्द होना ही चाहिए, जिंदगी मे जनाब;<br/>
ज़िंदा होने का अनुमान बना रहता है।Upload to Facebook
    कुछ दर्द होना ही चाहिए, जिंदगी मे जनाब;
    ज़िंदा होने का अनुमान बना रहता है।