• ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें,<br/>
ख़्वाहिशें दफ़न करें, या चादर बड़ी करें!
    ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें,
    ख़्वाहिशें दफ़न करें, या चादर बड़ी करें!
  • खामोशियाँ ही बेहतर हैं जिंदगी के सफर में;<br/>
लफ्जों की मार ने कई घर तबाह किये!
    खामोशियाँ ही बेहतर हैं जिंदगी के सफर में;
    लफ्जों की मार ने कई घर तबाह किये!
  • दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है,<br/>
आखिर इस दर्द की दवा क्या है,<br/> 
हमको उनसे है उम्मीद वफ़ा की,<br/> 
जो जानते ही नहीं वफ़ा क्या है।
    दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है,
    आखिर इस दर्द की दवा क्या है,
    हमको उनसे है उम्मीद वफ़ा की,
    जो जानते ही नहीं वफ़ा क्या है।
  • सुना है इस महफिल में शायर बहुत हैं,<br/>
कुछ हमें भी सुनाओ, आज हम घायल बहुत हैं!
    सुना है इस महफिल में शायर बहुत हैं,
    कुछ हमें भी सुनाओ, आज हम घायल बहुत हैं!
  • तपिश और बढ़ गई इन चंद बूंदों के बाद,<br/> 
काले स्याह बादल ने भी बस यूँ ही बहलाया मुझे।
    तपिश और बढ़ गई इन चंद बूंदों के बाद,
    काले स्याह बादल ने भी बस यूँ ही बहलाया मुझे।
  • आइने और दिल का बस एक ही फसाना है,<br/>
टूट कर एक दिन दोनों को बिखर जाना है।
    आइने और दिल का बस एक ही फसाना है,
    टूट कर एक दिन दोनों को बिखर जाना है।
  • शब्द तो यदा-कदा, चुभते ही रहते हैं,<BR/>
मौन चुभ जाए किसी का तो सम्भल जाना चाहिए!
    शब्द तो यदा-कदा, चुभते ही रहते हैं,
    मौन चुभ जाए किसी का तो सम्भल जाना चाहिए!
  • दर्द ही दर्द है दिल में बयान कैसे करें,<br/> 
ज़िंदगी ग़मों की गुलाम रिहा कैसे करें,<br/> 
यूँ तो हमें हमारे दिल ने धोखे दिए बहुत,<br/>  
पर अपने दिल से हम दगा कैसे करें।
    दर्द ही दर्द है दिल में बयान कैसे करें,
    ज़िंदगी ग़मों की गुलाम रिहा कैसे करें,
    यूँ तो हमें हमारे दिल ने धोखे दिए बहुत,
    पर अपने दिल से हम दगा कैसे करें।
  • रोज एक नई तकलीफ रोज एक नया गम;<br/>
ना जाने कब एलान होगा कि मर गए हम!
    रोज एक नई तकलीफ रोज एक नया गम;
    ना जाने कब एलान होगा कि मर गए हम!
  • क्या फूलों की कतरन से बनें हैं तेरे लब;<br/>
थके हैं मेरे होंठ इन्हें आराम चाहिये!
    क्या फूलों की कतरन से बनें हैं तेरे लब;
    थके हैं मेरे होंठ इन्हें आराम चाहिये!