• आसानी से नहीं मिलता ये शोहरत का जाम;<br/>
काबिल-ए-तारीफ़ होने के लिए वाकिफ़-ए-तकलीफ़ होना पड़ता है!
    आसानी से नहीं मिलता ये शोहरत का जाम;
    काबिल-ए-तारीफ़ होने के लिए वाकिफ़-ए-तकलीफ़ होना पड़ता है!
  • आसानी से नहीं मिलता ये शोहरत का जाम;<br/>
काबिल-ए-तारीफ़ होने के लिए वाकिफ़-ए-तकलीफ़ होना पड़ता है!
    आसानी से नहीं मिलता ये शोहरत का जाम;
    काबिल-ए-तारीफ़ होने के लिए वाकिफ़-ए-तकलीफ़ होना पड़ता है!
  • हमारे हर सवाल का सिर्फ एक ही जवाब आया,<br/>
पैगाम जो पहूँचा हम तक बेवफा इल्जाम आया।
    हमारे हर सवाल का सिर्फ एक ही जवाब आया,
    पैगाम जो पहूँचा हम तक बेवफा इल्जाम आया।
  • मीलों का सफर पल में बर्बाद कर गया,<br/>
उसका ये कहना, कहो कैसे आना हुआ।
    मीलों का सफर पल में बर्बाद कर गया,
    उसका ये कहना, कहो कैसे आना हुआ।
  • हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं;<br/>
अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें!<br/><br/>
तहज़ीब: सभ्यता<br/>
क़बा: गाउन, चोंगा<br/>
बंद-ए-क़बा: कपड़े की गाँठ
    हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं;
    अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें!

    तहज़ीब: सभ्यता
    क़बा: गाउन, चोंगा
    बंद-ए-क़बा: कपड़े की गाँठ
    ~ Sahir Ludhianvi
  • रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल;<br/>
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है!
    रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल;
    जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है!
    ~ Mirza Ghalib
  • दिल टूटने से थोड़ी सी तकलीफ़ तो हुई;<br/>
लेकिन तमाम उम्र को आराम हो गया!
    दिल टूटने से थोड़ी सी तकलीफ़ तो हुई;
    लेकिन तमाम उम्र को आराम हो गया!
  • दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;<br/>
ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!
    दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;
    ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!
  • मत बनाओ मुझे फुर्सत के लम्हों का खिलोना;<br/>
मैं भी इंसान हूँ, दर्द मुझे भी होता है!
    मत बनाओ मुझे फुर्सत के लम्हों का खिलोना;
    मैं भी इंसान हूँ, दर्द मुझे भी होता है!
  • अंदाज़ा लगा लेते हैं सब दर्द का मेरे;<br/>
मुस्काते हुए चहरे का नुक़्सान यही हैं;<br/>
बहक जाती हैं तक़दीरें इश्क का मुरीद होकर;<br/>
सिर्फ़ दर्द से रिश्ता कोई शौक़ से नहीं करता।
    अंदाज़ा लगा लेते हैं सब दर्द का मेरे;
    मुस्काते हुए चहरे का नुक़्सान यही हैं;
    बहक जाती हैं तक़दीरें इश्क का मुरीद होकर;
    सिर्फ़ दर्द से रिश्ता कोई शौक़ से नहीं करता।