• दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यों;<br/>
रोयेंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यों।
    दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यों;
    रोयेंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यों।
    ~ Mirza Ghalib
  • जब खाक ही होना था मुझको तो खाक-ए-रह-ए-सहरा होता,<br/>
इक कोशिश-ए-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।<br/><br/>
 
1. खाक - धूल, रंज, गर्द, मिट्टी जमीन<br/>
2. खाक-ए-रह-ए-सहरा - मरूस्थल या रेगिस्तान के रास्ते की धूल
    जब खाक ही होना था मुझको तो खाक-ए-रह-ए-सहरा होता,
    इक कोशिश-ए-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।

    1. खाक - धूल, रंज, गर्द, मिट्टी जमीन
    2. खाक-ए-रह-ए-सहरा - मरूस्थल या रेगिस्तान के रास्ते की धूल
    ~ Jameel Mazhari
  • अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,<br/>
गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।<br/><br/>

1. आस्ताँ - चौखट, दहलीज, ड्योढ़ी
    अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,
    गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।

    1. आस्ताँ - चौखट, दहलीज, ड्योढ़ी
    ~ Jaleel Manikpuri
  • अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;<br/>
मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।<br/><br/>

1. अजल - मृत्यु<br/>
2. सोगवारों - शोक करने वालों
    अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;
    मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।

    1. अजल - मृत्यु
    2. सोगवारों - शोक करने वालों
    ~ Daagh Dehlvi
  • कुछ दर्द होना ही चाहिए, जिंदगी मे जनाब;<br/>
ज़िंदा होने का अनुमान बना रहता है।
    कुछ दर्द होना ही चाहिए, जिंदगी मे जनाब;
    ज़िंदा होने का अनुमान बना रहता है।
  • सौ बार मरना चाहा निगाहों में डूब कर 'फ़राज़';<br/>
वो निगाह झुका लेते हैं हमें मरने नहीं देते।
    सौ बार मरना चाहा निगाहों में डूब कर 'फ़राज़';
    वो निगाह झुका लेते हैं हमें मरने नहीं देते।
    ~ Ahmad Faraz
  • न कुछ फ़ना की ख़बर है न है बक़ा मालूम;<br/>
बस एक बे-ख़बरी है सो वो भी क्या मालूम!<br/><br/>
Meaning:<br/>
फना  -  मृत्यु, विनाश<br/>
बका  -  अमरता, स्थायित्व
    न कुछ फ़ना की ख़बर है न है बक़ा मालूम;
    बस एक बे-ख़बरी है सो वो भी क्या मालूम!

    Meaning:
    फना - मृत्यु, विनाश
    बका - अमरता, स्थायित्व
    ~ Asghar Gondvi
  • झूठी हँसी से जख्म और बढ़ता गया;<br/>
इससे बेहतर था खुलकर रो लिए होते!
    झूठी हँसी से जख्म और बढ़ता गया;
    इससे बेहतर था खुलकर रो लिए होते!
  • सब्र रखते हैं, बड़े ही सब्र से हम;<br/>
वरना ज़िंदगी जीना कोई आसान तो नहीं!
    सब्र रखते हैं, बड़े ही सब्र से हम;
    वरना ज़िंदगी जीना कोई आसान तो नहीं!
  • जब बेअसर से लगने लगें मन्नतों के धागे;<br/>
समझ लो अभी और बाकी है इम्तिहान इसके आगे!
    जब बेअसर से लगने लगें मन्नतों के धागे;
    समझ लो अभी और बाकी है इम्तिहान इसके आगे!