• मत पुछो कि मेरा कारोबार क्या है,<br/>
मुस्कुराहट की छोटीसी दुकान है, नफरत के बाजार मे!
    मत पुछो कि मेरा कारोबार क्या है,
    मुस्कुराहट की छोटीसी दुकान है, नफरत के बाजार मे!
  • जिसकी आँखों में कटी थी सदियाँ,<br/>
उसने सदियों की जुदाई दी है।
    जिसकी आँखों में कटी थी सदियाँ,
    उसने सदियों की जुदाई दी है।
  • दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ;<br/>
बाज़ार से ग़ुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ!
    दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ;
    बाज़ार से ग़ुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ!
    ~ Akbar Allahabadi
  • तुझ पे उठ्ठी हैं वो खोई हुयी साहिर आँखें;<br/>
तुझ को मालूम है क्यों उम्र गवाँ दी हमने!
    तुझ पे उठ्ठी हैं वो खोई हुयी साहिर आँखें;
    तुझ को मालूम है क्यों उम्र गवाँ दी हमने!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • जिस दिल को सौंपा था मोड़ भी आया उसे;<br/>
वो चाहता था छोड़ना मैं छोड़ भी आया उसे;<br/>
अब के ताल्लुक ना रखेगा वो कोई मुझसे;<br/>
मैं दोनों हाथों को अब जोड़ भी आया उसे!
    जिस दिल को सौंपा था मोड़ भी आया उसे;
    वो चाहता था छोड़ना मैं छोड़ भी आया उसे;
    अब के ताल्लुक ना रखेगा वो कोई मुझसे;
    मैं दोनों हाथों को अब जोड़ भी आया उसे!
  • हिज्र के साहिल पे था जो इश्क का आशियाना;<br/>
ग़म की बरसात में नदीम इक रोज़ ढह गया!
    हिज्र के साहिल पे था जो इश्क का आशियाना;
    ग़म की बरसात में नदीम इक रोज़ ढह गया!
  • थक गया मेरा पुर्जा-पुर्जा तकलीफों से निकलने में;<br/>
हार मानने का दिल नहीं करता और जीत नजर नहीं आती!
    थक गया मेरा पुर्जा-पुर्जा तकलीफों से निकलने में;
    हार मानने का दिल नहीं करता और जीत नजर नहीं आती!
  • माना की मरने वालों को भुला देतें है सभी;<br/>
मुझे जिंदा भूलकर तुमने तो कहावत ही बदल दी!
    माना की मरने वालों को भुला देतें है सभी;
    मुझे जिंदा भूलकर तुमने तो कहावत ही बदल दी!
  • तेरी बाँहों में हमें उम्र कैद की सज़ा चाहिए;<br/>
और ये सज़ा हमें बेवजह चाहिए!
    तेरी बाँहों में हमें उम्र कैद की सज़ा चाहिए;
    और ये सज़ा हमें बेवजह चाहिए!
  • साँसों की माला में पिरो कर रखे हैं तेरी चाहतो के मोती,<br/>
अब तो तमन्ना यही है कि बिखरूं तो सिर्फ तेरे आगोश में!
    साँसों की माला में पिरो कर रखे हैं तेरी चाहतो के मोती,
    अब तो तमन्ना यही है कि बिखरूं तो सिर्फ तेरे आगोश में!