• सब्र रखते हैं, बड़े ही सब्र से हम;<br/>
वरना ज़िंदगी जीना कोई आसान तो नहीं!
    सब्र रखते हैं, बड़े ही सब्र से हम;
    वरना ज़िंदगी जीना कोई आसान तो नहीं!
  • जब बेअसर से लगने लगें मन्नतों के धागे;<br/>
समझ लो अभी और बाकी है इम्तिहान इसके आगे!
    जब बेअसर से लगने लगें मन्नतों के धागे;
    समझ लो अभी और बाकी है इम्तिहान इसके आगे!
  • रूतबा ही अलग होता है उन आँखों का जिनके पास उनकी मोहब्बत होती है;<br/>
वरना कुछ क़तरे ही काफी होते हैं हमेशा किसी नज़र की वीरानी बता जाने को।
    रूतबा ही अलग होता है उन आँखों का जिनके पास उनकी मोहब्बत होती है;
    वरना कुछ क़तरे ही काफी होते हैं हमेशा किसी नज़र की वीरानी बता जाने को।
  • ख्वाहिश तो ना थी किसी से दिल लगाने की;<br/>
मगर जब किस्मत में ही दर्द लिखा था, तो मोहब्बत कैसे ना होती!
    ख्वाहिश तो ना थी किसी से दिल लगाने की;
    मगर जब किस्मत में ही दर्द लिखा था, तो मोहब्बत कैसे ना होती!
  • कोई देख ना सका उसकी बेबसी;<br/>
जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों मे डालकर।
    कोई देख ना सका उसकी बेबसी;
    जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों मे डालकर।
  • दर्द को मुस्कुराकर सहना क्या सीख लिया;<br/>
सब ने सोच लिया मुझे तकलीफ़ नहीं होती।
    दर्द को मुस्कुराकर सहना क्या सीख लिया;
    सब ने सोच लिया मुझे तकलीफ़ नहीं होती।
  • हमनें दुनिया में मोहब्बत का असर ज़िंदा किया है;<br/>
हमनें नफ़रत को गले मिल-मिल के शर्मिंदा किया है।
    हमनें दुनिया में मोहब्बत का असर ज़िंदा किया है;
    हमनें नफ़रत को गले मिल-मिल के शर्मिंदा किया है।
  • मेरे सजदों में कमी तो न थी ऐ खुदा;<br/>
या मुझ से भी बढ़कर किसी ने माँगा था उसको।
    मेरे सजदों में कमी तो न थी ऐ खुदा;
    या मुझ से भी बढ़कर किसी ने माँगा था उसको।
  • दिल की बर्बादियों पे नाज़ाँ हूँ;<br/>
फ़तेह पा कर शिकस्त खाई है।
    दिल की बर्बादियों पे नाज़ाँ हूँ;
    फ़तेह पा कर शिकस्त खाई है।
    ~ Shakeel Badayuni
  • अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें;<br/>
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं।
    अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें;
    कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं।
    ~ Jaan Nisar Akhtar