• जरा तमीज़ से बटोरना बुझे दियों को दोस्तों,<br/>
इन्होंने कल अमावस की अन्धेरी रात में हमें रौशनी दी थी;<br/>
किसी और को जलाकर खुश होना अलग बात है,<br/>
इन्होंने तो ख़ुद को जलाकर हमें ख़ुशी दी थी।
    जरा तमीज़ से बटोरना बुझे दियों को दोस्तों,
    इन्होंने कल अमावस की अन्धेरी रात में हमें रौशनी दी थी;
    किसी और को जलाकर खुश होना अलग बात है,
    इन्होंने तो ख़ुद को जलाकर हमें ख़ुशी दी थी।
  • ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गयी तू;<br/>
मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे!
    ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गयी तू;
    मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • यूँ तो ऐ ज़िंदगी तेरे सफर से शिकायतें बहुत थी;<br/>
मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारें बहुत थी।
    यूँ तो ऐ ज़िंदगी तेरे सफर से शिकायतें बहुत थी;
    मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारें बहुत थी।
  • यह भी एक ज़माना देख लिया है हम ने;<br/>
​दर्द जो सुनाया अपना तो तालियां बज उठीं​।
    यह भी एक ज़माना देख लिया है हम ने;
    ​दर्द जो सुनाया अपना तो तालियां बज उठीं​।
  • फलक देता है जिसको ऐश उसको गम भी देता है;<br/>
जहाँ बजते हैं नक्कारे, वहीं मातम भी होते हैं।<br/><br/>

फलक - आकाश, आसमान, अर्
    फलक देता है जिसको ऐश उसको गम भी देता है;
    जहाँ बजते हैं नक्कारे, वहीं मातम भी होते हैं।

    फलक - आकाश, आसमान, अर्
    ~ Daagh Dehlvi
  • वो शायर होते हैं जो शायरी करते हैं;<br/>
हम तो बदनाम से लोग हैं, बस दर्द लिखते हैं।
    वो शायर होते हैं जो शायरी करते हैं;
    हम तो बदनाम से लोग हैं, बस दर्द लिखते हैं।
  • जिंदगी इतना दर्द नहीं देती कि मरने को जी चाहे;<br/>
बस लोग इतने दर्द दे जाते हैं कि, जीने को दिल नहीं करता।
    जिंदगी इतना दर्द नहीं देती कि मरने को जी चाहे;
    बस लोग इतने दर्द दे जाते हैं कि, जीने को दिल नहीं करता।
  • आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की;<br/>
हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की।
    आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की;
    हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की।
  • आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना;<br/>
कुछ आग बच रही थी सो आशिक़ का दिल बना!
    आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना;
    कुछ आग बच रही थी सो आशिक़ का दिल बना!
    ~ Mohammad Rafi Sauda
  • मत पूछ कि मेरा कारोबार क्या है;<BR/>
मोहब्बत की छोटी सी दुकान है नफरत के बाजार में!
    मत पूछ कि मेरा कारोबार क्या है;
    मोहब्बत की छोटी सी दुकान है नफरत के बाजार में!