• ज़रा देखो ये दरवाज़े पर दस्तक किसने दी है;<br/>
अगर इश्क़ हो तो कहना यहाँ दिल नही रहता।
    ज़रा देखो ये दरवाज़े पर दस्तक किसने दी है;
    अगर इश्क़ हो तो कहना यहाँ दिल नही रहता।
  • प्यार किसी से जितना किया रुस्वाई ही मिली है;
    वफ़ा चाहे जितनी भी की बेवफाई ही मिली है;
    जितना भी किसी को अपना बना कर देखा;
    जब आँख खुली तो तन्हाई ही मिली है।
  • उसकी याद में हम बरसों रोते रहे;
    बेवफ़ा वो निकले बदनाम हम होते रहे;
    प्यार में मदहोशी का आलम तो देखिये;
    धूल चेहरे पे थी और हम आईना साफ़ करते रहे।
  • किस फ़िक्र किस ख्याल में खोया हुआ सा है;
    दिल आज तेरी याद को भूला हुआ सा है;
    गुलशन में इस तरह कब आई थी फसल-ए-गुल;
    हर फूल अपनी शाख से टूटा हुआ सा है।

    शब्दार्थ:
    फसल-ए-गुल = बहार का मौसम
    ~ Shahryar
  • हर वक़्त तेरी यादें तडपाती हैं मुझे;
    आखिर इतना क्यों ये सताती है मुझे;
    इश्क तो किया था तूने भी बड़े शौंक से;
    अब क्यों नहीं यह एहसास दिलाती है तुझे।
  • काश उसे चाहने का अरमान ना होता;<br/>
मैं होश में रहते हुए अनजान ना होता;<br/>
ना प्यार होता किसी पत्थर दिल से हमको;<br/>
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान ना होता।
    काश उसे चाहने का अरमान ना होता;
    मैं होश में रहते हुए अनजान ना होता;
    ना प्यार होता किसी पत्थर दिल से हमको;
    या फिर कोई पत्थर दिल इंसान ना होता।
  • कोई 'अनीस' कोई आश्ना नहीं रखते;
    किसी आस बग़ैर अज खुदा नहीं रखते;
    किसी को क्या हो दिलों की शिकस्तगी की खबर;
    कि टूटने में यह दिल सदा नहीं रखते।

    शब्दार्थ:
    शिकस्तगी = उदासी
    सदा = आवाज़
    ~ Meer Anees
  • मोहब्बत हर इंसान को आज़माती है;<br/>
किसी से रूठ जाती है किसी पे मुस्कुराती है;<br/>
यह मोहब्बत का खेल ही कुछ ऐसा है;<br/>
किसी का कुछ नहीं जाता और किसी की जान चली जाती है।
    मोहब्बत हर इंसान को आज़माती है;
    किसी से रूठ जाती है किसी पे मुस्कुराती है;
    यह मोहब्बत का खेल ही कुछ ऐसा है;
    किसी का कुछ नहीं जाता और किसी की जान चली जाती है।
  • सबके दुःख हैं एक से मगर हौंसले हैं जुदा-जुदा;<br/>
कोई टूट कर बिखर गया तो कोई यूँ ही मुस्कुरा कर चल दिया।
    सबके दुःख हैं एक से मगर हौंसले हैं जुदा-जुदा;
    कोई टूट कर बिखर गया तो कोई यूँ ही मुस्कुरा कर चल दिया।
  • इश्क़ पाने की तमन्ना में कभी कभी ज़िंदगी खिलौना बन जाती है;<br/>
जिसे दिल में बसाना चाहते हैं वो सूरत सिर्फ याद बन रह जाती है।
    इश्क़ पाने की तमन्ना में कभी कभी ज़िंदगी खिलौना बन जाती है;
    जिसे दिल में बसाना चाहते हैं वो सूरत सिर्फ याद बन रह जाती है।