• उसकी जफ़ाओं ने मुझे एक तहज़ीब सिखा दी है 'फ़राज़';
    मैं रोते हुए सो जाता हूँ पर शिकवा नहीं करता।
    ~ Ahmad Faraz
  • हर ख़ुशी के पहलू हाथों से छूट गए;
    अब तो खुद के साये भी हमसे रूठ गए;
    हालात हैं अब ऐसे ज़िंदगी में हमारी;
    प्यार की राहों में हम खुद ही टूट गए।
  • दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना;<br/>
अपने अनमोल आँसू इस तरह बेकार मत करना;<br/>
कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं;<br/>
फूलों पर कभी इस तरह तुम ऐतबार मत करना।
    दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना;
    अपने अनमोल आँसू इस तरह बेकार मत करना;
    कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं;
    फूलों पर कभी इस तरह तुम ऐतबार मत करना।
  • ठोकरें खा कर भी ना संभले तो मुसाफ़िर का नसीब;<br/>
वरना पत्थरों ने तो अपना फर्ज़ निभा ही दिया।
    ठोकरें खा कर भी ना संभले तो मुसाफ़िर का नसीब;
    वरना पत्थरों ने तो अपना फर्ज़ निभा ही दिया।
  • वो हमें भूल भी जायें तो कोई गम नहीं;
    जाना उनका जान जाने से भी कम नहीं;
    जाने कैसे ज़ख़्म दिए हैं उसने इस दिल को;
    कि हर कोई कहता है कि इस दर्द की कोई मरहम नहीं।
  • तुम्हारा दुःख हम सह नहीं सकते;<br/>
भरी महफ़िल में कुछ कह नहीं सकते;<br/>
हमारे गिरते हुए आँसुओं को पढ़ कर देखो;<br/>
वो भी कहते हैं कि हम आपके बिन रह नहीं सकते।
    तुम्हारा दुःख हम सह नहीं सकते;
    भरी महफ़िल में कुछ कह नहीं सकते;
    हमारे गिरते हुए आँसुओं को पढ़ कर देखो;
    वो भी कहते हैं कि हम आपके बिन रह नहीं सकते।
  • ग़म इसका नहीं कि तू मेरा न हो सका;<br/>

मेरी मोहब्बत में मेरा सहारा ना बन सका;<br/>

ग़म तो इसका भी नहीं कि सुकून दिल का लुट गया;<br/>

ग़म तो इसका है कि मोहब्बत से भरोसा ही उठ गया।
    ग़म इसका नहीं कि तू मेरा न हो सका;
    मेरी मोहब्बत में मेरा सहारा ना बन सका;
    ग़म तो इसका भी नहीं कि सुकून दिल का लुट गया;
    ग़म तो इसका है कि मोहब्बत से भरोसा ही उठ गया।
  • उम्र की राह में रास्ते बदल जाते हैं;
    वक़्त की आंधी में इंसान बदल जाते हैं;
    सोचते हैं तुम्हें इतना याद ना करें लेकिन;
    आँख बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं।
  • वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे;<br/>
हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे;<br/>
हमें ही मिल गया बेवफ़ा का ख़िताब क्योंकि;<br/>
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।
    वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे;
    हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे;
    हमें ही मिल गया बेवफ़ा का ख़िताब क्योंकि;
    हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।
  • माना कि तुम्हें मुझसे ज्यादा ग़म होगा;<br/>
मगर रोने से ये ग़म कभी कम न होगा;<br/>
जीत ही लेंगे दिल की नाकाम बाजियां हम;<br/>
अगर मोहब्बत में हमारी दम होगा।
    माना कि तुम्हें मुझसे ज्यादा ग़म होगा;
    मगर रोने से ये ग़म कभी कम न होगा;
    जीत ही लेंगे दिल की नाकाम बाजियां हम;
    अगर मोहब्बत में हमारी दम होगा।