• लोगों से कह दो हमारी तक़दीर से जलना छोड़ दें;<br/>
हम घर से खुदा की दुआ लेकर निकलते हैं;<br/>
कोई न दे हमें खुश रहने की दुआ तो भी कोई बात नहीं;<br/>
वैसे भी हमें खुशियां रास नहीं अक्सर इस वजह से लोग छूट जाते हैं।Upload to Facebook
    लोगों से कह दो हमारी तक़दीर से जलना छोड़ दें;
    हम घर से खुदा की दुआ लेकर निकलते हैं;
    कोई न दे हमें खुश रहने की दुआ तो भी कोई बात नहीं;
    वैसे भी हमें खुशियां रास नहीं अक्सर इस वजह से लोग छूट जाते हैं।
  • कैसे बयान करें आलम दिल की बेबसी का;
    वो क्या समझे दर्द आंखों की इस नमी का;
    उनके चाहने वाले इतने हो गए हैं अब कि;
    उन्हे अब एहसास ही नहीं हमारी कमी का।
  • वो बेगानो में अपने, हम अपनों में अंजान लगते हैं;<br/>
हमारे खून की कीमत नहीं, उनके अश्कों के भी दाम लगते हैं।Upload to Facebook
    वो बेगानो में अपने, हम अपनों में अंजान लगते हैं;
    हमारे खून की कीमत नहीं, उनके अश्कों के भी दाम लगते हैं।
  • एक दिन की बात हो तो उसे भूल जाएँ हम;
    नाज़िल हों दिल पे रोज़ बलाएँ तो क्या करें।
    ~ Akhtar Sheerani
  • हमारा ज़िक्र छोड़ो, हम ऐसे लोग हैं कि जिन्हे;
    नफ़रत कुछ नहीं करती, मोहब्बत मार देती है।
  • खून बन कर मुनासिब नहीं दिल बहे;
    दिल नहीं मानता कौन दिल से कहे;
    तेरी दुनिया में आये बहुत दिन रहे;
    सुख ये पाया कि हमने बहुत दुःख सहे।
    ~ Hafeez Jalandhari
  • आज ये तन्हाई का एहसास कुछ ज्यादा है;<br/>
तेरे संग ना होना का मलाल कुछ ज्यादा है;<br/>
फिर भी काट रहे हैं जिए जाने की सज़ा यही सोचकर;<br/>
शायद इस ज़िंदगानी में मेरे गुनाह कुछ ज्यादा हैं।Upload to Facebook
    आज ये तन्हाई का एहसास कुछ ज्यादा है;
    तेरे संग ना होना का मलाल कुछ ज्यादा है;
    फिर भी काट रहे हैं जिए जाने की सज़ा यही सोचकर;
    शायद इस ज़िंदगानी में मेरे गुनाह कुछ ज्यादा हैं।
  • सोचते हैं सीख लें हम भी बेरुखी करना;<br/>
प्यार निभाते-निभाते लगता है हमने अपनी ही कदर खो दी।Upload to Facebook
    सोचते हैं सीख लें हम भी बेरुखी करना;
    प्यार निभाते-निभाते लगता है हमने अपनी ही कदर खो दी।
  • एक लफ्ज़ उनको सुनाने के लिए;<br/>
कितने अल्फ़ाज़ लिखे हमने ज़माने के लिए;<br/>
उनका मिलना ही मुक़द्दर में न था;<br/>
वर्ना क्या कुछ नहीं किया उनको पाने के लिए।Upload to Facebook
    एक लफ्ज़ उनको सुनाने के लिए;
    कितने अल्फ़ाज़ लिखे हमने ज़माने के लिए;
    उनका मिलना ही मुक़द्दर में न था;
    वर्ना क्या कुछ नहीं किया उनको पाने के लिए।
  • दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;
    रोता है दिल जब वो पास नहीं होता;
    बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में;
    और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता।