• शोला था जल बुझा हूँ, हवाएं मुझे न दो;<br/>
मैं तो कब का जा चुका हूँ, सदायें मुझे न दो;<br/>
वो ज़हर भी पी चुका हूँ, जो तुमने मुझे दिया था;<br/>
आ गया हम मौत के आग़ोश में अब मुझे ज़िंदगी की दुआएं न दो।
    शोला था जल बुझा हूँ, हवाएं मुझे न दो;
    मैं तो कब का जा चुका हूँ, सदायें मुझे न दो;
    वो ज़हर भी पी चुका हूँ, जो तुमने मुझे दिया था;
    आ गया हम मौत के आग़ोश में अब मुझे ज़िंदगी की दुआएं न दो।
  • तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी;
    मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी;
    रहे मुहब्बत में ज़िन्दगी भर रहेगी ये कशमकश बराबर;
    ना तुमको क़ुरबत में जीत होगी ना मुझको फुर्कत में हार होगी।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • इरादों में अभी भी क्यों इतनी जान बाकी है;<br/>
तेरे किये वादों का इम्तिहान अभी बाकी है;<br/>
अधूरी क्यों रह गयी तुम्हारी यह बेरुखी;<br/>
जबकि दिल के हर टुकड़े में तेरा नाम बाकी है।
    इरादों में अभी भी क्यों इतनी जान बाकी है;
    तेरे किये वादों का इम्तिहान अभी बाकी है;
    अधूरी क्यों रह गयी तुम्हारी यह बेरुखी;
    जबकि दिल के हर टुकड़े में तेरा नाम बाकी है।
  • जिनकी आँखें आँसुओं से नम नहीं;<br/>
क्या समझते हो कि उन्हें कोई ग़म नहीं;<br/>
तुम तड़प कर रो दिए तो क्या हुआ;<br/>
ग़म छुपा कर हँसने वाले भी कम नहीं।
    जिनकी आँखें आँसुओं से नम नहीं;
    क्या समझते हो कि उन्हें कोई ग़म नहीं;
    तुम तड़प कर रो दिए तो क्या हुआ;
    ग़म छुपा कर हँसने वाले भी कम नहीं।
  • देख कर उसको अक्सर हमे एहसास होता है;<br/>
कभी कभी गम देने वाला भी बहुत ख़ास होता है;<br/>
ये और बात है वो हर पल नही होता पास हमारे;<br/>
मगर उसका दिया गम अक्सर हमारे पास होता है।
    देख कर उसको अक्सर हमे एहसास होता है;
    कभी कभी गम देने वाला भी बहुत ख़ास होता है;
    ये और बात है वो हर पल नही होता पास हमारे;
    मगर उसका दिया गम अक्सर हमारे पास होता है।
  • मुमकिन नहीं कि तेरी मोहब्बत की बू न हो;<br/>
काफ़िर अगर हज़ार बरस दिल में तू न हो;<br/>
क्या लुत्फ़-ए-इंतज़ार जो तू हीला-जू न हो;<br/>
किस काम का विसाल अगर आरज़ू न हो।<br/><br/>

शब्दार्थ:<br/>
हीला-जू = बहाना करने वाला<br/>
विसाल = मिलन
    मुमकिन नहीं कि तेरी मोहब्बत की बू न हो;
    काफ़िर अगर हज़ार बरस दिल में तू न हो;
    क्या लुत्फ़-ए-इंतज़ार जो तू हीला-जू न हो;
    किस काम का विसाल अगर आरज़ू न हो।

    शब्दार्थ:
    हीला-जू = बहाना करने वाला
    विसाल = मिलन
    ~ Daagh Dehlvi
  • एहसान किसी का वो रखते नहीं मेरा भी चुका दिया;
    जितना खाया था नमक मेरा, मेरे जख्मों पर लगा दिया।
  • ये सानेहा भी मोहब्बत में बार-हा गुज़रा;<br/>
कि उस ने हाल भी पूछा तो आँख भर आई।<br/><br/>

शब्दार्थ:<br/>
सानेहा = घटना
    ये सानेहा भी मोहब्बत में बार-हा गुज़रा;
    कि उस ने हाल भी पूछा तो आँख भर आई।

    शब्दार्थ:
    सानेहा = घटना
    ~ Nasir Kazmi
  • हमें कोई ग़म नहीं था ग़म-ए-आशिक़ी से पहले;
    न थी दुश्मनी किसी से तेरी दोस्ती से पहले;
    है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कुसूर इसमें;
    तेरे ग़म ने मार डाला मुझे ज़िन्दग़ी से पहले।
  • तुझ को पा कर भी न कम हो सकी बे-ताबी-ए-दिल;
    इतना आसान तेरे इश्क़ का ग़म था ही नहीं।
    ~ Firaq Gorakhpuri