• मुद्दत गुज़र गयी कि यह आलम है मुस्तक़िल;<br/>
कोई सबब नहीं है मगर दिल उदास है।Upload to Facebook
    मुद्दत गुज़र गयी कि यह आलम है मुस्तक़िल;
    कोई सबब नहीं है मगर दिल उदास है।
    ~ Ehsaan Danish
  • वक्त नूर को बेनूर कर देता है;<br/>
छोटे से जख्म को नासूर कर देता है;<br/>
कौन चाहता है अपनों से दूर होना;<br/>
लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है।Upload to Facebook
    वक्त नूर को बेनूर कर देता है;
    छोटे से जख्म को नासूर कर देता है;
    कौन चाहता है अपनों से दूर होना;
    लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है।
  • अंगुलिया टूट गई, पत्थर तराशते तराशते;<br />
जब बनी सूरत यार की तो खरीददार आ गये!Upload to Facebook
    अंगुलिया टूट गई, पत्थर तराशते तराशते;
    जब बनी सूरत यार की तो खरीददार आ गये!
  • इसी से जान गया मैं कि वक़्त ढलने लगे;
    मैं थक के छाँव में बैठा और पाँव चलने लगे;
    मैं दे रहा था सहारे तो एक हजूम में था;
    जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे।
    ~ Farhat Abbas Shah
  • आज तेरी याद हम सीने से लगा कर रोये;<br/>
तन्हाई मैं तुझे हम पास बुला कर रोये;<br/>
कई बार पुकारा इस दिल ने तुम्हें;<br/>
और हर बार तुम्हें ना पाकर हम रोये।Upload to Facebook
    आज तेरी याद हम सीने से लगा कर रोये;
    तन्हाई मैं तुझे हम पास बुला कर रोये;
    कई बार पुकारा इस दिल ने तुम्हें;
    और हर बार तुम्हें ना पाकर हम रोये।
  • देर तो लगती है भरने में उस को;<br/>
जिस ज़ख्म में हो अपनों की इनायत।Upload to Facebook
    देर तो लगती है भरने में उस को;
    जिस ज़ख्म में हो अपनों की इनायत।
  • दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;<br/>
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता;<br/>
बरबाद हो गए हम उनकी मोहब्बत में;<br/>
और वो कहते हैं कि इस तरह प्यार नहीं होता।Upload to Facebook
    दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;
    रोता है दिल जब वो पास नहीं होता;
    बरबाद हो गए हम उनकी मोहब्बत में;
    और वो कहते हैं कि इस तरह प्यार नहीं होता।
  • फिर आज अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए;
    गुज़र गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए।
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • एक अजीब सा मंजर नज़र आता है;<br/>
हर एक आँसूं समंदर नज़र आता है;<br/>
कहाँ रखूं मैं शीशे सा दिल अपना;<br/>
हर किसी के हाथ मैं पत्थर नज़र आता है।Upload to Facebook
    एक अजीब सा मंजर नज़र आता है;
    हर एक आँसूं समंदर नज़र आता है;
    कहाँ रखूं मैं शीशे सा दिल अपना;
    हर किसी के हाथ मैं पत्थर नज़र आता है।
  • ज़िन्दगी लोग जिसे मरहम-ए-ग़म जानते हैं;
    जिस तरह हम ने गुज़ारी है वो हम जानते हैं।
    ~ Mohsin Naqvi