• मेरे दिल का दर्द किसने देखा है;
    मुझे बस खुदा ने तड़पते देखा है;
    हम तन्हाई में बैठे रोते हैं;
    लोगों ने हमें महफ़िल में हँसते देखा है।
  • उसे कह दो वो मेरा है किसी और का हो नहीं सकता;<br/>
बहुत नायाब है मेरे लिए वो कोई और उस जैसा हो नहीं सकता;<br/>
तुम्हारे साथ जो गुज़ारे वो  मौसम याद आते हैं;<br/>
तुम्हारे बाद कोई मौसम सुहाना हो नहीं सकता।
    उसे कह दो वो मेरा है किसी और का हो नहीं सकता;
    बहुत नायाब है मेरे लिए वो कोई और उस जैसा हो नहीं सकता;
    तुम्हारे साथ जो गुज़ारे वो मौसम याद आते हैं;
    तुम्हारे बाद कोई मौसम सुहाना हो नहीं सकता।
  • महफ़िल भी रोयेगी, महफ़िल में हर शख्स भी रोयेगा;<br/>
डूबी जो मेरी कश्ती तो चुपके से साहिल भी रोयेगा;<br/>
इतना प्यार बिखेर देंगे हम इस दुनिया में कि;<br/>
मेरी मौत पे मेरा क़ातिल भी रोयेगा।
    महफ़िल भी रोयेगी, महफ़िल में हर शख्स भी रोयेगा;
    डूबी जो मेरी कश्ती तो चुपके से साहिल भी रोयेगा;
    इतना प्यार बिखेर देंगे हम इस दुनिया में कि;
    मेरी मौत पे मेरा क़ातिल भी रोयेगा।
  • मरहम न सही कोई ज़ख्म ही दे दो ऐ ज़ालिम;
    महसूस तो हो कि तुम हमें अभी भूले नहीं हो।
  • अब किस से कहें और कौन सुने जो हाल तुम्हारे बाद हुआ;
    इस दिल की झील सी आँखों में एक ख़्वाब बहुत बर्बाद हुआ;
    यह हिज्र-हवा भी दुश्मन है उस नाम के सारे रंगों की;
    वो नाम जो मेरे होंठों पर खुशबू की तरह आबाद हुआ।
    ~ Noshi Gilani
  • लोगों से कह दो हमारी तक़दीर से जलना छोड़ दें;<br/>
हम घर से खुदा की दुआ लेकर निकलते हैं;<br/>
कोई न दे हमें खुश रहने की दुआ तो भी कोई बात नहीं;<br/>
वैसे भी हमें खुशियां रास नहीं अक्सर इस वजह से लोग छूट जाते हैं।
    लोगों से कह दो हमारी तक़दीर से जलना छोड़ दें;
    हम घर से खुदा की दुआ लेकर निकलते हैं;
    कोई न दे हमें खुश रहने की दुआ तो भी कोई बात नहीं;
    वैसे भी हमें खुशियां रास नहीं अक्सर इस वजह से लोग छूट जाते हैं।
  • कैसे बयान करें आलम दिल की बेबसी का;
    वो क्या समझे दर्द आंखों की इस नमी का;
    उनके चाहने वाले इतने हो गए हैं अब कि;
    उन्हे अब एहसास ही नहीं हमारी कमी का।
  • वो बेगानो में अपने, हम अपनों में अंजान लगते हैं;<br/>
हमारे खून की कीमत नहीं, उनके अश्कों के भी दाम लगते हैं।
    वो बेगानो में अपने, हम अपनों में अंजान लगते हैं;
    हमारे खून की कीमत नहीं, उनके अश्कों के भी दाम लगते हैं।
  • एक दिन की बात हो तो उसे भूल जाएँ हम;
    नाज़िल हों दिल पे रोज़ बलाएँ तो क्या करें।
    ~ Akhtar Sheerani
  • हमारा ज़िक्र छोड़ो, हम ऐसे लोग हैं कि जिन्हे;
    नफ़रत कुछ नहीं करती, मोहब्बत मार देती है।