• आज फिर तेरी याद आयी बारिश को देख कर;<br/>
दिल पे ज़ोर न रहा अपनी बेबसी को देख कर;<br/>
रोये इस कदर तेरी याद में;<br/>
कि बारिश भी थम गयी मेरी बारिश को देख कर।Upload to Facebook
    आज फिर तेरी याद आयी बारिश को देख कर;
    दिल पे ज़ोर न रहा अपनी बेबसी को देख कर;
    रोये इस कदर तेरी याद में;
    कि बारिश भी थम गयी मेरी बारिश को देख कर।
  • हर सितम सह कर कितने ग़म छिपाये हमने;<br/>
तेरी खातिर हर दिन आँसू बहाये हमने;<br/>
तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला;<br/>
बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।Upload to Facebook
    हर सितम सह कर कितने ग़म छिपाये हमने;
    तेरी खातिर हर दिन आँसू बहाये हमने;
    तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला;
    बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।
  • अभी जिन्दा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ खल्वत में;<br/>
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने।Upload to Facebook
    अभी जिन्दा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ खल्वत में;
    कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते;<br/>
हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते;<br/>
अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा;<br/>
बयां करते तो महफ़िल को रुला देते।Upload to Facebook
    कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते;
    हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते;
    अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा;
    बयां करते तो महफ़िल को रुला देते।
  • कभी कभी मोहब्बत में वादे टूट जाते हैं;<br/>
इश्क़ के कच्चे धागे टूट जाते हैं;<br/>
झूठ बोलता होगा कभी चाँद भी;<br/>
इसलिए तो रुठकर तारे टूट जाते हैं।Upload to Facebook
    कभी कभी मोहब्बत में वादे टूट जाते हैं;
    इश्क़ के कच्चे धागे टूट जाते हैं;
    झूठ बोलता होगा कभी चाँद भी;
    इसलिए तो रुठकर तारे टूट जाते हैं।
  • बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है;<br/>
यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है;<br/>
तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है;<br/>
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ;<br/>
मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।Upload to Facebook
    बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है;
    यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है;
    तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है;
    अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ;
    मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।
  • हर सितम सह कर कितने गम छिपाए हमने;
    तेरी ख़ातिर हर दिन आँसू बहाए हमने;
    तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला;
    बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।
  • रोने की सज़ा न रुलाने की सज़ा है;<br/>

ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है;<br/>

हँसते हैं तो आँखों से निकल आते हैं आँसू;<br/>

ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है।Upload to Facebook
    रोने की सज़ा न रुलाने की सज़ा है;
    ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है;
    हँसते हैं तो आँखों से निकल आते हैं आँसू;
    ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है।
  • अपनी आँखों के समंदर में उत्तर जाने दे;<br/>
तेरा मुज़रिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे;<br/>
ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको;<br/>
सोचता हूँ कहूँ तुझसे, मगर जाने दे।Upload to Facebook
    अपनी आँखों के समंदर में उत्तर जाने दे;
    तेरा मुज़रिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे;
    ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको;
    सोचता हूँ कहूँ तुझसे, मगर जाने दे।
  • उल्फत का यह दस्तूर होता है;<br/>

जिसे चाहो वही हमसे दूर होता है;<br/>

दिल टूट कर बिखरता है इस क़द्र जैसे;<br/>

कांच का खिलौना गिरके चूर-चूर होता है!Upload to Facebook
    उल्फत का यह दस्तूर होता है;
    जिसे चाहो वही हमसे दूर होता है;
    दिल टूट कर बिखरता है इस क़द्र जैसे;
    कांच का खिलौना गिरके चूर-चूर होता है!