• शेर के पर्दे में मैं ने ग़म सुनाया है बहुत, मर्सिये ने दिल को मेरे भी रुलाया है बहुत;<br/>
दी-ओ-कोहसर में रोता हूँ दहाड़े मार-मार, दिलबरान-ए-शहर ने मुझ को सताया है बहुत;<br/>
नहीं होता किसी से दिल गिरिफ़्ता इश्क़ का,ज़ाहिरा ग़मगीं उसे रहना ख़ुश आया है बहुत!Upload to Facebook
    शेर के पर्दे में मैं ने ग़म सुनाया है बहुत, मर्सिये ने दिल को मेरे भी रुलाया है बहुत;
    दी-ओ-कोहसर में रोता हूँ दहाड़े मार-मार, दिलबरान-ए-शहर ने मुझ को सताया है बहुत;
    नहीं होता किसी से दिल गिरिफ़्ता इश्क़ का,ज़ाहिरा ग़मगीं उसे रहना ख़ुश आया है बहुत!
  • वो तो अपने दर्द रो-रो के सुनते रहे;<br/>
हमारी तन्हाइयों से आँख चुराते रहे;<br/>
और हमें बेवफा का नाम मिला क्योंकि;<br/>
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे!    Upload to Facebook
    वो तो अपने दर्द रो-रो के सुनते रहे;
    हमारी तन्हाइयों से आँख चुराते रहे;
    और हमें बेवफा का नाम मिला क्योंकि;
    हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे!
  • ज़ख़्म जब मेरे सीने के भर जाएँगे;<br />
आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे;<br />
ये मत पूछना किस किस ने धोखा दिया;<br />
वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएँगे।Upload to Facebook
    ज़ख़्म जब मेरे सीने के भर जाएँगे;
    आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे;
    ये मत पूछना किस किस ने धोखा दिया;
    वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएँगे।
  • बीते हुए कुछ दिन ऐसे हैं;<br/>
तन्हाई जिन्हें दोहराती है;<br/>
रो-रो के गुजरती हैं रातें;<br/>
आंखों में सहर हो जाती है!Upload to Facebook
    बीते हुए कुछ दिन ऐसे हैं;
    तन्हाई जिन्हें दोहराती है;
    रो-रो के गुजरती हैं रातें;
    आंखों में सहर हो जाती है!
    ~ Ahsaan Danish
  • गुलाब तो टूट कर बिखर जाता है;
    पर खुशबु हवा में बरकरार रहती है;
    जाने वाले तो छोड़ के चले जाते हैं;
    पर एहसास तो दिलों में बरकरार रहते हैं।
  • दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया;
    खाली ही सही हाथों में जाम तो आया;
    मैं हूँ बेवफ़ा सबको बताया उसने;
    यूँ ही सही, उसके लबों पे मेरा नाम तो आया।
  • दर्द अगर काजल होता तो आँखों में लगा लेते;
    दर्द अगर आँचल होता तो अपने सर पर सजा लेते;
    दर्द अगर समुंदर होता तो दिल को हम साहिल बना लेते;
    और दर्द अगर तेरी मोहब्बत होती तो उसको चाहत-ऐ ला हासिल बना लेते।
  • हमनें जब किया दर्द-ए-दिल बयां, तो शेर बन गया;
    लोगों ने सुना तो वाह वाह किया, दर्द और बढ़ गया;
    मोहब्बत की पाक रूह मेरे साँसों में है;
    ख़त लिखा जब गम कम करने के लिए तो गम और बढ़ गया।
  • शायद कि इधर आके कोई लौट गया है;
    बेताबी से यूं मुंह को कलेजा नहीं आता।
    ~ Nizam Rampuri
  • जुबां पर जब किसी के दर्द का अफ़साना आता है;
    हमें रह-रह कर अपना दिल-ए-दीवाना आता है।
    ~ Sadiq Jaisi