• टूटा हो दिल तो दुःख होता है;
    करके मोहब्बत किसी से ये दिल रोता है;
    दर्द का एहसास तो तब होता है;
    जब किसी से मोहब्बत हो और उसके दिल में कोई और होता है।
  • ज़ख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे;<br/>
आंसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे;<br/>
ये मत पूछना किसने दर्द दिया;<br/>
वरना कुछ अपनों के सर झुक जाएंगे।
    ज़ख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे;
    आंसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे;
    ये मत पूछना किसने दर्द दिया;
    वरना कुछ अपनों के सर झुक जाएंगे।
  • हो चुके अब तुम किसी के;<br/>
कभी मेरी ज़िंदगी थे तुम;<br/>
भूलता है कौन मोहब्बत पहली;<br/>
मेरी तो सारी ख़ुशी थे तुम।
    हो चुके अब तुम किसी के;
    कभी मेरी ज़िंदगी थे तुम;
    भूलता है कौन मोहब्बत पहली;
    मेरी तो सारी ख़ुशी थे तुम।
  • जिंदगी भर दर्द से जीते रहे;<br/>
दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे;<br/>
कई बार सोचा कह दू हाल-ए-दिल उससे;<br/>
पर न जाने क्यूँ हम होंठो को सीते रहे।
    जिंदगी भर दर्द से जीते रहे;
    दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे;
    कई बार सोचा कह दू हाल-ए-दिल उससे;
    पर न जाने क्यूँ हम होंठो को सीते रहे।
  • भूल जाना उसे मुश्किल तो नहीं है लेकिन;<br/>
काम आसान भी हमसे कहाँ होते हैं!
    भूल जाना उसे मुश्किल तो नहीं है लेकिन;
    काम आसान भी हमसे कहाँ होते हैं!
  • ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं;<br/>
हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं;<br/>
दिल के दर्द सुनाएं तो किसको;<br/>
जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है!
    ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं;
    हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं;
    दिल के दर्द सुनाएं तो किसको;
    जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है!
  • दर्द कितना है बता नहीं सकते;<br/>
ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते;<br/>
आँखों से समझ सको तो समझ लो;<br/>
आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते।
    दर्द कितना है बता नहीं सकते;
    ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते;
    आँखों से समझ सको तो समझ लो;
    आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते।
  • हर तमाशाई फक़त साहिल से मंज़र देखता;
    कौन दरिया को उलटता कौन गौहर देखता।

    Translation:
    फक़त : सिर्फ
    गौहर : मोती
    ~ Ahmad Faraz
  • क्या ज़रूरत थी दूर जाने की;<br/>
पास रहकर भी तो तड़पा सकते थे!
    क्या ज़रूरत थी दूर जाने की;
    पास रहकर भी तो तड़पा सकते थे!
  • वो देता है दर्द बस हमी को;<br/>
क्या समझेगा वो इन आँखों की नमी को;<br/>
​चाहने वालों की भीड़ से घिरा है जो हर वक़्त;<br/>
वो महसूस  ​क्या ​करेगा  ​बस ​एक हमारी कमी को। ​
    वो देता है दर्द बस हमी को;
    क्या समझेगा वो इन आँखों की नमी को;
    ​चाहने वालों की भीड़ से घिरा है जो हर वक़्त;
    वो महसूस ​क्या ​करेगा ​बस ​एक हमारी कमी को। ​