• धरती के गम छुपाने के लिए गगन होता है;<br />
दिल के गम छुपाने के लिए बदन होता है;<br />
मर के भी छुपाने होंगे गम शायद;<br />
इसलिए हर लाश पर कफ़न होता है।Upload to Facebook
    धरती के गम छुपाने के लिए गगन होता है;
    दिल के गम छुपाने के लिए बदन होता है;
    मर के भी छुपाने होंगे गम शायद;
    इसलिए हर लाश पर कफ़न होता है।
  • जब्र है, कह्र है, क़यामत है;
    दिल जो बेइखित्यार होता है।
    ~ Mir Taqi Mir
  • कुछ इन रोज़ो दिल अपना सख्त बे आराम रहता है;<br />
इसी हालत में लेकर सुबह से तो शाम रहता है।Upload to Facebook
    कुछ इन रोज़ो दिल अपना सख्त बे आराम रहता है;
    इसी हालत में लेकर सुबह से तो शाम रहता है।
    ~ Mir Asar
  • हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे;<br />
लफ्ज कागज पर उतर जादूगरी करने लगे;<br />
कामयाबी जिसने पाई उनके घर बस गए;<br />
जिनके दिल टूटे वो आशिक शायरी करने लगे।
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    हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे;
    लफ्ज कागज पर उतर जादूगरी करने लगे;
    कामयाबी जिसने पाई उनके घर बस गए;
    जिनके दिल टूटे वो आशिक शायरी करने लगे।
  • बिन बात के ही रूठने की आदत है;<br/>
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;<br/>
आप खुश रहें, मेरा क्या है;<br/>
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है!Upload to Facebook
    बिन बात के ही रूठने की आदत है;
    किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;
    आप खुश रहें, मेरा क्या है;
    मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है!
  • भटकते रहे हैं बादल की तरह;<br />
सीने से लगालो आँचल की तरह;<br />
गम के रास्ते पर ना छोड़ना अकेले;<br />
वरना टूट जाएँगे पायल की तरह।Upload to Facebook
    भटकते रहे हैं बादल की तरह;
    सीने से लगालो आँचल की तरह;
    गम के रास्ते पर ना छोड़ना अकेले;
    वरना टूट जाएँगे पायल की तरह।
  • मिलना इत्तिफाक था, बिछड़ना नसीब था;
    वो उतना ही दूर चला गया जितना वो करीब था;
    हम उसको देखने क लिए तरसते रहे;
    जिस शख्स की हथेली पे हमारा नसीब था।
  • समझा ना कोई दिल की बात को;<br />
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया;<br />
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से;<br />
तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया।Upload to Facebook
    समझा ना कोई दिल की बात को;
    दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया;
    जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से;
    तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया।
  • बिन बात के ही रूठने की आदत है;
    किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;
    आप खुश रहें, मेरा क्या है;
    मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।
  • लिखूं कुछ आज यह वक़्त का तकाजा है;
    मेरे दिल का दर्द अभी ताजा-ताजा है;
    गिर पड़ते हैं मेरे आंसू मेरे ही कागज पर;
    लगता है कि कलम में स्याही का दर्द ज्यादा है!