• ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं;<br/>
हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं;<br/>
दिल के दर्द सुनाएं तो किसको;<br/>
जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है!
    ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं;
    हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं;
    दिल के दर्द सुनाएं तो किसको;
    जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है!
  • दर्द कितना है बता नहीं सकते;<br/>
ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते;<br/>
आँखों से समझ सको तो समझ लो;<br/>
आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते।
    दर्द कितना है बता नहीं सकते;
    ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते;
    आँखों से समझ सको तो समझ लो;
    आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते।
  • हर तमाशाई फक़त साहिल से मंज़र देखता;
    कौन दरिया को उलटता कौन गौहर देखता।

    Translation:
    फक़त : सिर्फ
    गौहर : मोती
    ~ Ahmad Faraz
  • क्या ज़रूरत थी दूर जाने की;<br/>
पास रहकर भी तो तड़पा सकते थे!
    क्या ज़रूरत थी दूर जाने की;
    पास रहकर भी तो तड़पा सकते थे!
  • वो देता है दर्द बस हमी को;<br/>
क्या समझेगा वो इन आँखों की नमी को;<br/>
​चाहने वालों की भीड़ से घिरा है जो हर वक़्त;<br/>
वो महसूस  ​क्या ​करेगा  ​बस ​एक हमारी कमी को। ​
    वो देता है दर्द बस हमी को;
    क्या समझेगा वो इन आँखों की नमी को;
    ​चाहने वालों की भीड़ से घिरा है जो हर वक़्त;
    वो महसूस ​क्या ​करेगा ​बस ​एक हमारी कमी को। ​
  • चाहत की राह में बिखरे अरमान बहुत है;
    हम उसकी याद में परेशान बहुत हैं;
    वो हर बार दिल तोड़ता है यह कह कर;
    मेरी उम्मीदों के दुनियाँ में अभी मुकाम बहुत हैं।
  • रफ़्तार कुछ इस कदर तेज़ है जिन्दगी की;
    कि सुबह का दर्द शाम को, पुराना हो जाता है।
  • दिल के छालों को कोई शायरी कहे तो दर्द नहीं होता;<br/>
तक़लीफ़ तो तब होती है जब लोग वाह-वाह करते है।
    दिल के छालों को कोई शायरी कहे तो दर्द नहीं होता;
    तक़लीफ़ तो तब होती है जब लोग वाह-वाह करते है।
  • ​ज़िस्म से मेरे तडपता दिल कोई तो खींच लो​;​
    मैं बगैर इसके भी जी लूँगा मुझे अब ​ये यकीन ​है।
  • तुम फिर ना आ सकोगे, बताना तो था ना मुझे;<br/>
तुम दूर जा कर बस  गए, और मैं ढूँढता रह गया।
    तुम फिर ना आ सकोगे, बताना तो था ना मुझे;
    तुम दूर जा कर बस गए, और मैं ढूँढता रह गया।