• तेरी राह-ए-तलब में ज़ख़्म सब सीने पे खाये हैं;<br/>
बहार-ए-ग़ुलिस्तां मेरी हयात-ए-जावेदाँ मेरी!Upload to Facebook
    तेरी राह-ए-तलब में ज़ख़्म सब सीने पे खाये हैं;
    बहार-ए-ग़ुलिस्तां मेरी हयात-ए-जावेदाँ मेरी!
    ~ Shamsi Meenai
  • अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;<br/>
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
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    अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;
    तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
    ~ Allama Iqbal
  • बदल गए सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता;<br/>
अब तो अपना भी हक़ बनता है!Upload to Facebook
    बदल गए सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता;
    अब तो अपना भी हक़ बनता है!
  • दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;<br/>
ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!Upload to Facebook
    दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;
    ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!
  • तुझ को खबर नहीं मगर इक सादा-लौह को;<br/>
बर्बाद कर दिया तेरे दो दिन के प्यार ने।Upload to Facebook
    तुझ को खबर नहीं मगर इक सादा-लौह को;
    बर्बाद कर दिया तेरे दो दिन के प्यार ने।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • कैसे कह दूं कि बदले में कुछ नहीं मिला;<br/>
सबक भी कोई छोटी चीज तो नहीं।
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    कैसे कह दूं कि बदले में कुछ नहीं मिला;
    सबक भी कोई छोटी चीज तो नहीं।
  • आँख में आँख डालकर बात तो करके देखता;<br/>
इतना भी एतमाद उसे अपनी निगाह पर नहीं।Upload to Facebook
    आँख में आँख डालकर बात तो करके देखता;
    इतना भी एतमाद उसे अपनी निगाह पर नहीं।
  • ना करना हमसे प्यार का फिर झुठा वादा;<br/>
माँगी है आज दुआ के तुझे भूल जायें हम!Upload to Facebook
    ना करना हमसे प्यार का फिर झुठा वादा;
    माँगी है आज दुआ के तुझे भूल जायें हम!
  • वो खेलती है मुझसे मुझे भी ये पता है;<br/>
पर उसके हाथ का खिलौना होने में भी एक मज़ा है!Upload to Facebook
    वो खेलती है मुझसे मुझे भी ये पता है;
    पर उसके हाथ का खिलौना होने में भी एक मज़ा है!
  • बेवफा लोग बढ़ रहे हैं धीरे धीरे;<br/>
इक शहर अब इनका भी होना चाहिए!Upload to Facebook
    बेवफा लोग बढ़ रहे हैं धीरे धीरे;
    इक शहर अब इनका भी होना चाहिए!