• जाते जाते उसने पलटकर सिर्फ इतना कहा मुझसे,<br/>

मेरी बेवफाई से ही मर जाओगे या मार के जाऊं।
    जाते जाते उसने पलटकर सिर्फ इतना कहा मुझसे,
    मेरी बेवफाई से ही मर जाओगे या मार के जाऊं।
  • नाराज़गी बहुत है हम दोनों के दरमियान;<br/>
वो गलत कहता है कि कोई रिश्ता नहीं रहा!
    नाराज़गी बहुत है हम दोनों के दरमियान;
    वो गलत कहता है कि कोई रिश्ता नहीं रहा!
  • इक उम्र से हूँ लज़्जत-ए-गिरिया से महरूम;<br/>
ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को मनाने के लिये आ!<br/><br/>
लज़्ज़त-ए-गिरिया: रोने के सुख<br/>
महरूम: वंचित<br/>
राहत-ए-जाँ: जो जान को सुख दे, प्रियेसी
    इक उम्र से हूँ लज़्जत-ए-गिरिया से महरूम;
    ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को मनाने के लिये आ!

    लज़्ज़त-ए-गिरिया: रोने के सुख
    महरूम: वंचित
    राहत-ए-जाँ: जो जान को सुख दे, प्रियेसी
    ~ Ahmad Faraz
  • फिर निगाहों में धूल उड़ती है;<BR/>
अक्स फिर आइने बदलने लगे!
    फिर निगाहों में धूल उड़ती है;
    अक्स फिर आइने बदलने लगे!
    ~ Amjad Islam Amjad
  • रोकना मेरी हसरत थी, चले जाना उनका शौक;<br/>
वो शौक पूरा कर गए,मेरी हसरतें तोड़ कर!
    रोकना मेरी हसरत थी, चले जाना उनका शौक;
    वो शौक पूरा कर गए,मेरी हसरतें तोड़ कर!
  • तेरी राह-ए-तलब में ज़ख़्म सब सीने पे खाये हैं;<br/>
बहार-ए-ग़ुलिस्तां मेरी हयात-ए-जावेदाँ मेरी!
    तेरी राह-ए-तलब में ज़ख़्म सब सीने पे खाये हैं;
    बहार-ए-ग़ुलिस्तां मेरी हयात-ए-जावेदाँ मेरी!
    ~ Shamsi Meenai
  • अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;<br/>
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
    अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;
    तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
    ~ Allama Iqbal
  • बदल गए सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता;<br/>
अब तो अपना भी हक़ बनता है!
    बदल गए सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता;
    अब तो अपना भी हक़ बनता है!
  • दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;<br/>
ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!
    दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;
    ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!
  • तुझ को खबर नहीं मगर इक सादा-लौह को;<br/>
बर्बाद कर दिया तेरे दो दिन के प्यार ने।
    तुझ को खबर नहीं मगर इक सादा-लौह को;
    बर्बाद कर दिया तेरे दो दिन के प्यार ने।
    ~ Sahir Ludhianvi