• फुर्सत में भी फुर्सत नहीं मिली उन्हें हमें याद करने की,<br/>
आजकल हम किसी के लिये इतने फ़िज़ूल हो गये।
    फुर्सत में भी फुर्सत नहीं मिली उन्हें हमें याद करने की,
    आजकल हम किसी के लिये इतने फ़िज़ूल हो गये।
  • बहुत मुश्किल से करता हूँ तेरी यादों का कारोबार;<br/>
मुनाफा कम है, पर गुज़ारा हो ही जाता है!
    बहुत मुश्किल से करता हूँ तेरी यादों का कारोबार;
    मुनाफा कम है, पर गुज़ारा हो ही जाता है!
  • यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं;<br/>
सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की रुस्वाई भी!
    यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं;
    सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की रुस्वाई भी!
    ~ Gulzar
  • उसको बस इतना बता देना इतना आसान नहीं है तुमको भुला देना;<br/>
तेरी यादें भी तेरे जैसी ही हैं उन्हें आता है बस रुला देना!
    उसको बस इतना बता देना इतना आसान नहीं है तुमको भुला देना;
    तेरी यादें भी तेरे जैसी ही हैं उन्हें आता है बस रुला देना!
  • याद आएगी तुझे उस वक़्त हमारी;<br/>
जब दिल वालों की महफ़िल में तुझे कोई दिल से नहीं मिलेगा!
    याद आएगी तुझे उस वक़्त हमारी;
    जब दिल वालों की महफ़िल में तुझे कोई दिल से नहीं मिलेगा!
  • वक़्त अक्सर मांगता है उन्हीं लम्हों का सबूत हमसे,<br/>
जिनकी यादें तो होती है मगर कोई निशानी नहीं होती!
    वक़्त अक्सर मांगता है उन्हीं लम्हों का सबूत हमसे,
    जिनकी यादें तो होती है मगर कोई निशानी नहीं होती!
  • मैंने दिल से कहा, उसे थोड़ा कम याद किया कर;<br/>
दिल ने कहा वो सांस है तेरी, तू साँस ही मत लिया कर!
    मैंने दिल से कहा, उसे थोड़ा कम याद किया कर;
    दिल ने कहा वो सांस है तेरी, तू साँस ही मत लिया कर!
  • एक कत़रा ही सही आँख में पानी तो रहे,<br/>
ए मोहब्बत तेरे होने की निशानी तो रहे;<br/>
बस यही सोच के यादों को तेरी दे दी पनाह,<br/>
इस नये घर में कोई चीज पुरानी तो रहे!
    एक कत़रा ही सही आँख में पानी तो रहे,
    ए मोहब्बत तेरे होने की निशानी तो रहे;
    बस यही सोच के यादों को तेरी दे दी पनाह,
    इस नये घर में कोई चीज पुरानी तो रहे!
  • फुर्सत में याद करना हो तो मत करना, <br/>
हम तन्हा ज़रूर हैं, मगर फज़ूल नहीं।
    फुर्सत में याद करना हो तो मत करना,
    हम तन्हा ज़रूर हैं, मगर फज़ूल नहीं।
  • कल रात को खोल कर देखी यादों की किताब;<br/>
रो पड़े कि क्या क्या खोया है हमने ऐ ज़िंदगी!
    कल रात को खोल कर देखी यादों की किताब;
    रो पड़े कि क्या क्या खोया है हमने ऐ ज़िंदगी!