• अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे, हर ख्वाब मे बुलाया है तुझे;<br/>
क्यू न करे याद तुझ को, जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे!
    अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे, हर ख्वाब मे बुलाया है तुझे;
    क्यू न करे याद तुझ को, जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे!
  • जख्म ऐ दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराना भी इश्क है;<br/>
याद रखना याद करना और याद आना भी इश्क है!
    जख्म ऐ दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराना भी इश्क है;
    याद रखना याद करना और याद आना भी इश्क है!
  • फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल,<br/>
दिल-ऐ-ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया;<br/> 
कोई वीरानी सी वीरानी है,<br/>
दश्त को देख के घर याद आया!
    फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल,
    दिल-ऐ-ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया;
    कोई वीरानी सी वीरानी है,
    दश्त को देख के घर याद आया!
    ~ Mirza Ghalib
  • मुद्दत हो गयी इक वादा किया था उन्होने,<br/>
कश्मकश में हूँ, याद दिलाऊँ कि इंतज़ार करूँ!
    मुद्दत हो गयी इक वादा किया था उन्होने,
    कश्मकश में हूँ, याद दिलाऊँ कि इंतज़ार करूँ!
  • अगर हो वक़्त तो मुलाकात कीजिये,<br/> 
दिल कुछ कहना चाहे कुछ बात कीजिये,<br/>  
यूँ तो मुश्किल है हमसे दूर रहना,<br/>  
पर एक लम्हा मिले तो हमें याद कीजिये।
    अगर हो वक़्त तो मुलाकात कीजिये,
    दिल कुछ कहना चाहे कुछ बात कीजिये,
    यूँ तो मुश्किल है हमसे दूर रहना,
    पर एक लम्हा मिले तो हमें याद कीजिये।
  • खुद को समेट के खुद मे सीमट जाते है हम;<br/>
जब तेरी याद आती है फिर से बिखर जाते है हम!
    खुद को समेट के खुद मे सीमट जाते है हम;
    जब तेरी याद आती है फिर से बिखर जाते है हम!
  • कभी रिहा न किया मैने तुझे अपनी यादों की कैद से;<br/>
नाकाम ही सही तुझसे बेइंतिहा इश्क किया था मैंने!
    कभी रिहा न किया मैने तुझे अपनी यादों की कैद से;
    नाकाम ही सही तुझसे बेइंतिहा इश्क किया था मैंने!
  • शिद्दत से जिया है हर लम्हें को;<br/>
यूँ ही यादें खुबसूरत तो नहीं होती!
    शिद्दत से जिया है हर लम्हें को;
    यूँ ही यादें खुबसूरत तो नहीं होती!
  • ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा,<br/>
मैं खुद तन्हा रहा मगर दिल को तन्हा नहीं रखा,<br/>
तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज़ रखे हैं,<br/>
तुम्हारी नफरतों की पीर को ज़िंदा नहीं रखा।
    ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा,
    मैं खुद तन्हा रहा मगर दिल को तन्हा नहीं रखा,
    तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज़ रखे हैं,
    तुम्हारी नफरतों की पीर को ज़िंदा नहीं रखा।
  • मेरी यादों से अगर बच निकलो तो, वादा मेरा है तुमसे,<br/>
मै खुद दुनिया से कह दूगी की, कमी मेरी वफ़ा में थी!
    मेरी यादों से अगर बच निकलो तो, वादा मेरा है तुमसे,
    मै खुद दुनिया से कह दूगी की, कमी मेरी वफ़ा में थी!