• दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया;
    जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया।
    ~ Josh Malihabadi
  • तेरी बेरुखी को भी रुतबा दिया हमने;
    प्यार का हर फ़र्ज़ अदा किया हमने;
    मत सोच कि हम भूल गए हैं तुझे;
    आज भी खुदा से पहले तुझे याद किया हमने।
  • साँस लेने से भी तेरी याद आती है;
    हर साँस में तेरी खुशबू बस जाती है;
    कैसे कहूँ कि साँस से मैं ज़िंदा हूँ;
    जब कि साँस से पहले तेरी याद आती है।
  • ये जो चंद फुर्सत के लम्हे मिलते हैं जीने के लिए;<br/>
मैं उन्हें भी तुम्हे सोचते हुए ही खर्च कर देता हूँ।
    ये जो चंद फुर्सत के लम्हे मिलते हैं जीने के लिए;
    मैं उन्हें भी तुम्हे सोचते हुए ही खर्च कर देता हूँ।
  • तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी;<br/>
किस्मत भी अपना खेल दिखाती चली गयी;<br/>
महकती फ़िज़ा की खुशबू में जो देखा प्यार को;<br/>
बस याद उनकी आई और रुलाती चली गयी।
    तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी;
    किस्मत भी अपना खेल दिखाती चली गयी;
    महकती फ़िज़ा की खुशबू में जो देखा प्यार को;
    बस याद उनकी आई और रुलाती चली गयी।
  • तुम्हारी यादों में मेरा अक्स झिलमिलाता होगा;<br/>
तुम्हारी बातों में मेरा ज़िक्र भी आता होगा;<br/>
लाख मशरूफ रहो तुम कहीं भी लेकिन;<br/>
अक्सर मेरा ख्याल तुम्हें भी सताता होगा।
    तुम्हारी यादों में मेरा अक्स झिलमिलाता होगा;
    तुम्हारी बातों में मेरा ज़िक्र भी आता होगा;
    लाख मशरूफ रहो तुम कहीं भी लेकिन;
    अक्सर मेरा ख्याल तुम्हें भी सताता होगा।
  • उसे जब याद आएगा वो पहली बार का मिलना;<br/>
तो पल पल याद रखेगा या सब कुछ भूल जायेगा;<br/>
उसे जब याद आएगा गुज़रे मौसम का हर लम्हा;<br/>
तो खुद ही रो पड़ेगा या खुद ही मुस्कुराएगा।
    उसे जब याद आएगा वो पहली बार का मिलना;
    तो पल पल याद रखेगा या सब कुछ भूल जायेगा;
    उसे जब याद आएगा गुज़रे मौसम का हर लम्हा;
    तो खुद ही रो पड़ेगा या खुद ही मुस्कुराएगा।
  • ख्याल में आता है जब भी उसका चेहरा;<br/>
तो लबों पे अक्सर फरियाद आती है;<br/>
भूल जाता हूँ सारे गम और सितम उसके;<br/>
जब भी उसकी थोड़ी सी मोहब्बत याद आती है।
    ख्याल में आता है जब भी उसका चेहरा;
    तो लबों पे अक्सर फरियाद आती है;
    भूल जाता हूँ सारे गम और सितम उसके;
    जब भी उसकी थोड़ी सी मोहब्बत याद आती है।
  • हिचकियों को न भेजो अपना मुखबिर बना के;
    हमें और भी काम हैं तुम्हें याद करने के सिवा।
  • इश्क़ पाने की तमन्ना में कभी कभी ज़िंदगी खिलौना बन कर रह जाती है;<br/>
जिसके दिल में रहना चाहते हैं, वो सूरत सिर्फ याद बन कर रह जाती है।
    इश्क़ पाने की तमन्ना में कभी कभी ज़िंदगी खिलौना बन कर रह जाती है;
    जिसके दिल में रहना चाहते हैं, वो सूरत सिर्फ याद बन कर रह जाती है।