• मेरी यादों से अगर बच निकलो तो, वादा मेरा है तुमसे,<br/>
मै खुद दुनिया से कह दूगी की, कमी मेरी वफ़ा में थी!
    मेरी यादों से अगर बच निकलो तो, वादा मेरा है तुमसे,
    मै खुद दुनिया से कह दूगी की, कमी मेरी वफ़ा में थी!
  • कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी;<br/>

कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा!
    कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी;
    कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा!
  • आज रात भी मुमकिन है सो न पाऊं मैं;<br/>
याद फ़िर आये हैं नींदों को उड़ाने वाले!
    आज रात भी मुमकिन है सो न पाऊं मैं;
    याद फ़िर आये हैं नींदों को उड़ाने वाले!
  • मोहब्बत की बातें न भूली भुलाये;<br/>
बहुत देर रोये जो तुम याद आये!
    मोहब्बत की बातें न भूली भुलाये;
    बहुत देर रोये जो तुम याद आये!
    ~ Safdar Aah
  • याददाश्त का कमज़ोर होना बुरी बात नहीं है जनाब;<br/>
बड़े बेचैन रहते है वो लोग जिन्हे हर बात याद रहती है!
    याददाश्त का कमज़ोर होना बुरी बात नहीं है जनाब;
    बड़े बेचैन रहते है वो लोग जिन्हे हर बात याद रहती है!
  • दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद;<br/>
अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद!
    दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद;
    अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद!
  • मैं लोगों से मुलाकात के लम्हें याद रखता हूँ;<br/>
मैं बातें भूल भी जाऊं पर लहज़े याद रखता हूँ।
    मैं लोगों से मुलाकात के लम्हें याद रखता हूँ;
    मैं बातें भूल भी जाऊं पर लहज़े याद रखता हूँ।
  • गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;<br/>
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।
    गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;
    यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।
  • मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया,<br/>
तुम क्यों उदास हो गए तुम्हें क्या याद आ गया;<br/>
कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख़्तसर मगर,<br/>
कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया।
    मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया,
    तुम क्यों उदास हो गए तुम्हें क्या याद आ गया;
    कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख़्तसर मगर,
    कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया।
  • दी क़सम वस्ल में उस बुत को ख़ुदा की तो कहा;<br/>
तुझ को आता है ख़ुदा याद हमारे होते।<br/><br/>

वस्ल  =  मिलन
    दी क़सम वस्ल में उस बुत को ख़ुदा की तो कहा;
    तुझ को आता है ख़ुदा याद हमारे होते।

    वस्ल = मिलन
    ~ Bekhud Dehlvi