• दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद;<br/>
अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद!
    दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद;
    अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद!
  • मैं लोगों से मुलाकात के लम्हें याद रखता हूँ;<br/>
मैं बातें भूल भी जाऊं पर लहज़े याद रखता हूँ।
    मैं लोगों से मुलाकात के लम्हें याद रखता हूँ;
    मैं बातें भूल भी जाऊं पर लहज़े याद रखता हूँ।
  • गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;<br/>
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।
    गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;
    यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।
  • मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया,<br/>
तुम क्यों उदास हो गए तुम्हें क्या याद आ गया;<br/>
कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख़्तसर मगर,<br/>
कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया।
    मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया,
    तुम क्यों उदास हो गए तुम्हें क्या याद आ गया;
    कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख़्तसर मगर,
    कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया।
  • दी क़सम वस्ल में उस बुत को ख़ुदा की तो कहा;<br/>
तुझ को आता है ख़ुदा याद हमारे होते।<br/><br/>

वस्ल  =  मिलन
    दी क़सम वस्ल में उस बुत को ख़ुदा की तो कहा;
    तुझ को आता है ख़ुदा याद हमारे होते।

    वस्ल = मिलन
    ~ Bekhud Dehlvi
  • याद उसकी अभी भी आती है;<br/>
बुरी आदत है कहाँ जाती है।
    याद उसकी अभी भी आती है;
    बुरी आदत है कहाँ जाती है।
  • बता किस कोने में सुखाऊं तेरी यादें;<br/>
बरसात बाहर भी है और अन्दर भी।
    बता किस कोने में सुखाऊं तेरी यादें;
    बरसात बाहर भी है और अन्दर भी।
  • दोस्ती अपनी भी असर रखती है फ़राज़;<br/>
बहुत याद आएँगे ज़रा भूल कर तो देखो।
    दोस्ती अपनी भी असर रखती है फ़राज़;
    बहुत याद आएँगे ज़रा भूल कर तो देखो।
    ~ Ahmad Faraz
  • रहता है इबादत में हमें मौत का खटका;<br/>
हम याद-ए-ख़ुदा करते हैं कर ले न ख़ुदा याद।
    रहता है इबादत में हमें मौत का खटका;
    हम याद-ए-ख़ुदा करते हैं कर ले न ख़ुदा याद।
    ~ Akbar Allahabadi
  • अब आ गए हैं आप तो आता नहीं है याद;<br/>
वर्ना कुछ हम को आप से कहना ज़रूर था!
    अब आ गए हैं आप तो आता नहीं है याद;
    वर्ना कुछ हम को आप से कहना ज़रूर था!
    ~ Firaq Gorakhpuri