• कितने अनमोल होते हैं ये यादों के रिश्ते भी,
    कोई याद ना भी करे चाहत फिर भी रहती है।
  • अजीब जुल्म करती हैं तेरी यादें मुझ पर;
    सो जाऊं तो उठा देती हैं जाग जाऊँ तो रुला देती हैं।
  • तेरे गम में भी नायाब खजाना ढूँढ लेते हैं,
    हम तुम्हें याद करने का बहाना ढूँढ लेते हैं।
  • नजरों से दूर हो कर भी, यूं तेरा रूबरू रहना,
    किसी के पास रहने का, सलीका हो तो तुम सा हो।
  • यादें भी क्या क्या करा देती हैं,
    कोई शायर हो गया, कोई खामोश।
  • फिर पलट रही हैं सर्दियों की सुहानी रातें,
    फिर तेरी याद में जलने के जमाने आ गए।
  • तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं;
    किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • बंद कर दिए है हमने दरवाज़ें इश्क के,
    पर तेरी याद हैं कि दरारों में से भी आ जाती हैं।
  • काश! तेरी यादो की कोई सरहद होती,
    पता तो चलता अभी कितना सफर और तय करना है।
  • तेरी याद से शुरू होती है मेरी हर सुबह,
    फिर ये कैसे कह दूँ कि मेरा दिन खराब है।