• हमारे पास तो सिर्फ तेरी यादे हैं,
    ज़िन्दगी तो उसे मुबारक हो, जिसके पास तू है।
  • फूलों की तरह जब होंठों पे एक शोख़ तबस्सुम बिखरेगा,
    धीरे से तुम्हारे कानों में एक बात पुरानी कह देंगे।
  • अब ऐसा भी क्या लिखूं, मैं तेरी याद में;
    कि तेरी सूरत दिखे मुझे हर अलफ़ाज़ में।
  • कितने अनमोल होते हैं ये यादों के रिश्ते भी,
    कोई याद ना भी करे चाहत फिर भी रहती है।
  • अजीब जुल्म करती हैं तेरी यादें मुझ पर;
    सो जाऊं तो उठा देती हैं जाग जाऊँ तो रुला देती हैं।
  • तेरे गम में भी नायाब खजाना ढूँढ लेते हैं,
    हम तुम्हें याद करने का बहाना ढूँढ लेते हैं।
  • नजरों से दूर हो कर भी, यूं तेरा रूबरू रहना,
    किसी के पास रहने का, सलीका हो तो तुम सा हो।
  • यादें भी क्या क्या करा देती हैं,
    कोई शायर हो गया, कोई खामोश।
  • फिर पलट रही हैं सर्दियों की सुहानी रातें,
    फिर तेरी याद में जलने के जमाने आ गए।
  • तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं;
    किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं।
    ~ Faiz Ahmad Faiz