• कर दो तब्दील अदालतों को मयखानों में साहब;
    सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता!
  • मेरे घर से मयखाना इतना करीब न था,<br/>
ऐ दोस्त कुछ लोग दूर हुए तो मयखाना करीब आ गया।
    मेरे घर से मयखाना इतना करीब न था,
    ऐ दोस्त कुछ लोग दूर हुए तो मयखाना करीब आ गया।
  • नशा पिला के गिराना तो सब को आता है;
    मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।
  • कहते हैं पीने वाले मर जाते हैं जवानी में;
    हमने तो बुजुर्गों को जवान होते देखा है मैखाने में।
  • तेरी निगाह से ऐसी शराब पी मैंने, फिर न होश का दावा किया कभी मैंने;<br/>
वो और होंगे जिन्हें मौत आ गई होगी, निगाह-ए-यार से पाई है जिन्दगी मैंने।
    तेरी निगाह से ऐसी शराब पी मैंने, फिर न होश का दावा किया कभी मैंने;
    वो और होंगे जिन्हें मौत आ गई होगी, निगाह-ए-यार से पाई है जिन्दगी मैंने।
  • नशा तब दोगुना होता है,
    जब जाम भी छलके और आँख भी छलके।
  • आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार,<br/>
लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर।
    आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार,
    लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर।
    ~ Jaleel Manikpuri
  • ऐ ज़ौक़ देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा,<br/>
छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई।
    ऐ ज़ौक़ देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा,
    छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई।
    ~ Sheikh Ibrahim Zauq
  • बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;<br/>
कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;<br/>
मजा तो तब है पीने का यारो;<br/>
इधर हम पियें और नशा उनको आये।
    बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;
    कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;
    मजा तो तब है पीने का यारो;
    इधर हम पियें और नशा उनको आये।
  • पहले शराब ज़ीस्त थी अब ज़ीस्त है शराब,<br/>
कोई पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं।
    पहले शराब ज़ीस्त थी अब ज़ीस्त है शराब,
    कोई पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं।
    ~ Jigar Moradabadi