• या हाथों हाथ लो मुझे मानिंद-ए-जाम-ए-मय;<br/>
या थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ!<br/><br/>

मानिंद-ए-जाम-ए-मय: शराब के पात्र की तरह
    या हाथों हाथ लो मुझे मानिंद-ए-जाम-ए-मय;
    या थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ!

    मानिंद-ए-जाम-ए-मय: शराब के पात्र की तरह
    ~ Meer Taqi Meer
  • या हाथों हाथ लो मुझे मानिंद-ए-जाम-ए-मय;<br/>
या थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ!
    या हाथों हाथ लो मुझे मानिंद-ए-जाम-ए-मय;
    या थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ!
    ~ Meer Taqi Meer
  • एक पल में ले गई सारे ग़म खरीदकर;<br/>
कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की।
    एक पल में ले गई सारे ग़म खरीदकर;
    कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की।
  • क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ;<br/>
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।
    क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ;
    रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।
    ~ Mirza Ghalib
  • मयखाने की इज्जत का सवाल था जनाब;<br/>
पास से गुजरे तो थोडा लडख़ड़ा दिए!
    मयखाने की इज्जत का सवाल था जनाब;
    पास से गुजरे तो थोडा लडख़ड़ा दिए!
  • अलग बैठे थे फिर भी आँख साकी की पड़ी मुझ पर;<br/>
अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आयेंगे। <br/><br/>

अर्थ:<br/>
तिश्नगी -  प्यास, पिपासा, तृष्णा, लालसा, अभिलाषा, इश्तियाक <br/>
कामिल - पूरा, सम्पूर्ण, मुकम्मल <br/>
पैमाने - शराब का गिलास, पानपात्र
    अलग बैठे थे फिर भी आँख साकी की पड़ी मुझ पर;
    अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आयेंगे।

    अर्थ:
    तिश्नगी - प्यास, पिपासा, तृष्णा, लालसा, अभिलाषा, इश्तियाक
    कामिल - पूरा, सम्पूर्ण, मुकम्मल
    पैमाने - शराब का गिलास, पानपात्र
    ~ Majrooh Sultanpuri
  • होते ही शाम मैं किधर जाता हूँ;<br/>
जुदा ख्यालों से मैं बिखर जाता हूँ;<br/>
खौफ इस कदर होता है यादों का;<br/>
जाम की महफिल में नजर आता हूँ!
    होते ही शाम मैं किधर जाता हूँ;
    जुदा ख्यालों से मैं बिखर जाता हूँ;
    खौफ इस कदर होता है यादों का;
    जाम की महफिल में नजर आता हूँ!
  • मयख़ाने से बढ़कर कोई ज़मीन नहीं;<br/>
जहाँ सिर्फ़ क़दम लड़खड़ाते हैं, ज़मीर नहीं!
    मयख़ाने से बढ़कर कोई ज़मीन नहीं;
    जहाँ सिर्फ़ क़दम लड़खड़ाते हैं, ज़मीर नहीं!
  • बात सजदों की नहीं नीयत की है;<br/>
मयखाने में हर कोई शराबी नहीं होता!
    बात सजदों की नहीं नीयत की है;
    मयखाने में हर कोई शराबी नहीं होता!
  • कुछ भी ना बचा कहने को हर बात हो गयी;<br/>
आओ चलो शराब पियें रात हो गयी!
    कुछ भी ना बचा कहने को हर बात हो गयी;
    आओ चलो शराब पियें रात हो गयी!