• ऐ ज़ौक़ देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा,<br/>
छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई।
    ऐ ज़ौक़ देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा,
    छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई।
    ~ Sheikh Ibrahim Zauq
  • बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;<br/>
कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;<br/>
मजा तो तब है पीने का यारो;<br/>
इधर हम पियें और नशा उनको आये।
    बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;
    कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;
    मजा तो तब है पीने का यारो;
    इधर हम पियें और नशा उनको आये।
  • पहले शराब ज़ीस्त थी अब ज़ीस्त है शराब,<br/>
कोई पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं।
    पहले शराब ज़ीस्त थी अब ज़ीस्त है शराब,
    कोई पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं।
    ~ Jigar Moradabadi
  • पीने से कर चुका था मैं तौबा मगर 'जलील';<br/>
बादल का रंग देख के नीयत बदल गई।
    पीने से कर चुका था मैं तौबा मगर 'जलील';
    बादल का रंग देख के नीयत बदल गई।
    ~ Jaleel Manikpuri
  • नशा पिला के गिराना तो सब को आता है;<br />
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।
    नशा पिला के गिराना तो सब को आता है;
    मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।
    ~ Allama Iqbal
  • जिगर की आग बुझे जिससे जल्द वो शय ला,
    लगा के बर्फ़ में साक़ी, सुराही-ए-मय ला।
    ~ Insha Allah Khan Insha
  • हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर;<br />
वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर;<br />
कल वो कह गए भुला दो हमको;<br />
हमने पूछा कैसे, वो चले गए हाथों मे जाम देकर।
    हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर;
    वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर;
    कल वो कह गए भुला दो हमको;
    हमने पूछा कैसे, वो चले गए हाथों मे जाम देकर।
  • पूछिये मयकशों से लुत्फ़-ए-शराब;
    ये मज़ा पाक-बाज़ क्या जाने।
    ~ Daagh Dehlvi
  • तेरे होठों में भी क्या खूब नशा मिला;<br />
यूँ लगता है तेरे जूठे पानी से ही शराब बनती है।
    तेरे होठों में भी क्या खूब नशा मिला;
    यूँ लगता है तेरे जूठे पानी से ही शराब बनती है।
  • बोतलें खोल कर तो पी बरसों;
    आज दिल खोल कर भी पी जाए।
    ~ Rahat Indori