• पीने से कर चुका था मैं तौबा मगर 'जलील';<br/>
बादल का रंग देख के नीयत बदल गई।
    पीने से कर चुका था मैं तौबा मगर 'जलील';
    बादल का रंग देख के नीयत बदल गई।
    ~ Jaleel Manikpuri
  • नशा पिला के गिराना तो सब को आता है;<br />
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।
    नशा पिला के गिराना तो सब को आता है;
    मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।
    ~ Allama Iqbal
  • जिगर की आग बुझे जिससे जल्द वो शय ला,
    लगा के बर्फ़ में साक़ी, सुराही-ए-मय ला।
    ~ Insha Allah Khan Insha
  • हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर;<br />
वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर;<br />
कल वो कह गए भुला दो हमको;<br />
हमने पूछा कैसे, वो चले गए हाथों मे जाम देकर।
    हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर;
    वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर;
    कल वो कह गए भुला दो हमको;
    हमने पूछा कैसे, वो चले गए हाथों मे जाम देकर।
  • पूछिये मयकशों से लुत्फ़-ए-शराब;
    ये मज़ा पाक-बाज़ क्या जाने।
    ~ Daagh Dehlvi
  • तेरे होठों में भी क्या खूब नशा मिला;<br />
यूँ लगता है तेरे जूठे पानी से ही शराब बनती है।
    तेरे होठों में भी क्या खूब नशा मिला;
    यूँ लगता है तेरे जूठे पानी से ही शराब बनती है।
  • बोतलें खोल कर तो पी बरसों;
    आज दिल खोल कर भी पी जाए।
    ~ Rahat Indori
  • आए थे हँसते खेलते मय-ख़ाने में 'फ़िराक़';
    जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए।
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • मैं थोड़ी देर तक बैठा रहा उसकी आँखों के मैखाने में;<br />
दुनिया मुझे आज तक नशे का आदि समझती है।
    मैं थोड़ी देर तक बैठा रहा उसकी आँखों के मैखाने में;
    दुनिया मुझे आज तक नशे का आदि समझती है।
  • न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है;
    अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है।
    ~ Faiz Ahmad Faiz