• बात सजदों की नहीं नीयत की है;<br/>
मयखाने में हर कोई शराबी नहीं होता!
    बात सजदों की नहीं नीयत की है;
    मयखाने में हर कोई शराबी नहीं होता!
  • कुछ भी ना बचा कहने को हर बात हो गयी;<br/>
आओ चलो शराब पियें रात हो गयी!
    कुछ भी ना बचा कहने को हर बात हो गयी;
    आओ चलो शराब पियें रात हो गयी!
  • मयख़ाने से बढ़कर कोई ज़मीन नहीं;<br/>
जहाँ सिर्फ़ क़दम लड़खड़ाते हैं ज़मीर नहीं!
    मयख़ाने से बढ़कर कोई ज़मीन नहीं;
    जहाँ सिर्फ़ क़दम लड़खड़ाते हैं ज़मीर नहीं!
  • यूँ तो ऐसा कोई ख़ास याराना नहीं है मेरा शराब से;<br/>
इश्क की राहों में तन्हा मिली तो हमसफ़र बन गई!
    यूँ तो ऐसा कोई ख़ास याराना नहीं है मेरा शराब से;
    इश्क की राहों में तन्हा मिली तो हमसफ़र बन गई!
  • कर दो तब्दील अदालतों को मयखानों में साहब;
    सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता!
  • मेरे घर से मयखाना इतना करीब न था,<br/>
ऐ दोस्त कुछ लोग दूर हुए तो मयखाना करीब आ गया।
    मेरे घर से मयखाना इतना करीब न था,
    ऐ दोस्त कुछ लोग दूर हुए तो मयखाना करीब आ गया।
  • नशा पिला के गिराना तो सब को आता है;
    मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।
  • कहते हैं पीने वाले मर जाते हैं जवानी में;
    हमने तो बुजुर्गों को जवान होते देखा है मैखाने में।
  • तेरी निगाह से ऐसी शराब पी मैंने, फिर न होश का दावा किया कभी मैंने;<br/>
वो और होंगे जिन्हें मौत आ गई होगी, निगाह-ए-यार से पाई है जिन्दगी मैंने।
    तेरी निगाह से ऐसी शराब पी मैंने, फिर न होश का दावा किया कभी मैंने;
    वो और होंगे जिन्हें मौत आ गई होगी, निगाह-ए-यार से पाई है जिन्दगी मैंने।
  • नशा तब दोगुना होता है,
    जब जाम भी छलके और आँख भी छलके।