• कुछ नशा तो आपकी बात का है;
    कुछ नशा तो धीमी बरसात का है;
    हमें आप यूँ ही शराबी ना कहिये;
    इस दिल पर असर तो आप से मुलाकात का है।
  • नशा हम करते हैं, इल्ज़ाम शराब को दिया जाता है;<br/>
मगर इल्ज़ाम शराब का नहीं उनका है;<br/>
जिनका चेहरा हमें हर जाम में नज़र आता है।
    नशा हम करते हैं, इल्ज़ाम शराब को दिया जाता है;
    मगर इल्ज़ाम शराब का नहीं उनका है;
    जिनका चेहरा हमें हर जाम में नज़र आता है।
  • मयखाने सजे थे, जाम का था दौर;<br/>
जाम में क्या था, ये किसने किया गौर;<br/>
जाम में गम था मेरे अरमानों का;<br/>
और सब कह रहे थे एक और एक और।
    मयखाने सजे थे, जाम का था दौर;
    जाम में क्या था, ये किसने किया गौर;
    जाम में गम था मेरे अरमानों का;
    और सब कह रहे थे एक और एक और।
  • मैखाने मे आऊंगा मगर पिऊंगा नही साकी;
    ये शराब मेरा गम मिटाने की औकात नही रखती।
  • न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है;
    अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • तनहइयो के आलम की ना बात करो जनाब;<br/>
नहीं तो फिर बन उठेगा जाम और बदनाम होगी शराब।
    तनहइयो के आलम की ना बात करो जनाब;
    नहीं तो फिर बन उठेगा जाम और बदनाम होगी शराब।
  • नशा पिलाके गिराना तो सबको आता है;
    मज़ा तो जब है कि गिरतों को थाम ले साकी;
    जो बादाकश थे पुराने वो उठते जाते हैं;
    कहीं से आबे-बक़ा-ए-दवाम ले साकी;
    कटी है रात तो हंगामा-गुस्तरी में तेरी;
    सहर क़रीब है अल्लाह का नाम ले साकी।
    ~ Allama Iqbal
  • बड़ी भूल हुई अनजाने में, ग़म छोड़ आये महखाने में;<br/>
फिर खा कर ठोकर ज़माने की, फिर लौट आये मयखाने में;<br/>
मुझे देख कर मेरे ग़म बोले, बड़ी देर लगा दी आने में।
    बड़ी भूल हुई अनजाने में, ग़म छोड़ आये महखाने में;
    फिर खा कर ठोकर ज़माने की, फिर लौट आये मयखाने में;
    मुझे देख कर मेरे ग़म बोले, बड़ी देर लगा दी आने में।
  • मौसम भी है, उम्र भी, शराब भी है;
    पहलू में वो रश्के-माहताब भी है;
    दुनिया में अब और चाहिए क्या मुझको;
    साक़ी भी है, साज़ भी है, शराब भी है।
    ~ Akhtar Sheerani
  • कुछ सही तो कुछ खराब कहते हैं;<br/>
लोग हमें बिगड़ा हुआ नवाब कहते हैं;<br/>
हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर;<br/>
कि पानी भी पियें तो लोग शराब कहते हैं।
    कुछ सही तो कुछ खराब कहते हैं;
    लोग हमें बिगड़ा हुआ नवाब कहते हैं;
    हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर;
    कि पानी भी पियें तो लोग शराब कहते हैं।