• नसीम-ए-सुबह बू-ए-गुल से क्या इतराती फिरती है,<br/>
जरा सूंघ-ए-शमीम-ए-जुल्फ खुश्बू इसको कहते हैं।<br/><br/>

1. नसीम-ए-सुबह - सुबह चलने वाली ठंडी और धीमी हवा<br/>
2. शमीम - सुगन्ध, खुश्बू, महक
    नसीम-ए-सुबह बू-ए-गुल से क्या इतराती फिरती है,
    जरा सूंघ-ए-शमीम-ए-जुल्फ खुश्बू इसको कहते हैं।

    1. नसीम-ए-सुबह - सुबह चलने वाली ठंडी और धीमी हवा
    2. शमीम - सुगन्ध, खुश्बू, महक
    ~ Anwar Allahabadi
  • इक बार दिखाकर चले जाओ झलक अपनी,<br/>
हम जल्वा-ए-पैहम के तलबगार कहाँ हैं।<br/><br/>

1. जल्वा-ए-पैहम - लगातार दर्शन<br/>
2. तलबगार - ख्वाहिशमंद, मुश्ताक, अभिलाषी
    इक बार दिखाकर चले जाओ झलक अपनी,
    हम जल्वा-ए-पैहम के तलबगार कहाँ हैं।

    1. जल्वा-ए-पैहम - लगातार दर्शन
    2. तलबगार - ख्वाहिशमंद, मुश्ताक, अभिलाषी
    ~ Hasrat Mohani
  • तेरा चेहरा, तेरी बातें, तेरा गम, तेरी यादें;<br/>
इतनी दौलत पहले कहाँ थी पास मेरे!
    तेरा चेहरा, तेरी बातें, तेरा गम, तेरी यादें;
    इतनी दौलत पहले कहाँ थी पास मेरे!
  • मेरे क़त्ल की कोशिश तो उनकी निगाहों ने की थी;<br/>
पर अदालत ने उन्हें हथियार मानने से इनकार कर दिया!
    मेरे क़त्ल की कोशिश तो उनकी निगाहों ने की थी;
    पर अदालत ने उन्हें हथियार मानने से इनकार कर दिया!
  • खुशबू तेरी प्यार की मुझे महका जाती है;
    तेरी हर बात मुझे बहका जाती है;
    साँसे तो बहुत वक्त लेती है आने ओर जाने मै;
    हर साँस से पहले तेरी याद इस दिल को धडका जाती है!
  • आसमान के एक आशियाना में, एक आशियाना हमारा होता;
    लोग तुम्हे दूर से देखते, नज़दीक से देखने का हक़ बस हमारा होता!
  • ख़ुद न छुपा सके वो अपना चेहरा नक़ाब में;
    बेवज़ह हमारी आँखों पे इल्ज़ाम लग गया।
  • मैं भी हुआ करता था वकील इश्क वालों का कभी;<br/>
नज़रें उस से क्या मिलीं आज खुद कटघरे में हूँ।
    मैं भी हुआ करता था वकील इश्क वालों का कभी;
    नज़रें उस से क्या मिलीं आज खुद कटघरे में हूँ।
  • जो उनकी आँखों से बयां होते हैं,<br/>
वो लफ्ज़ शायरी में कहाँ होते हैं।
    जो उनकी आँखों से बयां होते हैं,
    वो लफ्ज़ शायरी में कहाँ होते हैं।
  • फूल जब उसने छू लिया होगा,<br/>
होश तो ख़ुशबू के भी उड़ गए होंगे।
    फूल जब उसने छू लिया होगा,
    होश तो ख़ुशबू के भी उड़ गए होंगे।