• हुजूर लाजमी है महफिलों मे बवाल होना;<br/>
एक तो हुस्न कयामत उस पे होठो का लाल होना!
    हुजूर लाजमी है महफिलों मे बवाल होना;
    एक तो हुस्न कयामत उस पे होठो का लाल होना!
  • नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,<br/>
कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता।
    नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,
    कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता।
  • मैं हूँ अगर आवारा तो वजह है हुस्न तुम्हारा,<br/>
 
ऐसा मैं हरगिज़ नहीं था तेरे दीदार से पहले!
    मैं हूँ अगर आवारा तो वजह है हुस्न तुम्हारा,
    ऐसा मैं हरगिज़ नहीं था तेरे दीदार से पहले!
  • बड़ी फुर्सत से बनाया है तेरे खुदा ने तुझे;<br/>
वरना सुरत तेरी इस कदर ना चाँद से मिलती!
    बड़ी फुर्सत से बनाया है तेरे खुदा ने तुझे;
    वरना सुरत तेरी इस कदर ना चाँद से मिलती!
  • नसीम-ए-सुबह बू-ए-गुल से क्या इतराती फिरती है,<br/>
जरा सूंघ-ए-शमीम-ए-जुल्फ खुश्बू इसको कहते हैं।<br/><br/>

1. नसीम-ए-सुबह - सुबह चलने वाली ठंडी और धीमी हवा<br/>
2. शमीम - सुगन्ध, खुश्बू, महक
    नसीम-ए-सुबह बू-ए-गुल से क्या इतराती फिरती है,
    जरा सूंघ-ए-शमीम-ए-जुल्फ खुश्बू इसको कहते हैं।

    1. नसीम-ए-सुबह - सुबह चलने वाली ठंडी और धीमी हवा
    2. शमीम - सुगन्ध, खुश्बू, महक
    ~ Anwar Allahabadi
  • इक बार दिखाकर चले जाओ झलक अपनी,<br/>
हम जल्वा-ए-पैहम के तलबगार कहाँ हैं।<br/><br/>

1. जल्वा-ए-पैहम - लगातार दर्शन<br/>
2. तलबगार - ख्वाहिशमंद, मुश्ताक, अभिलाषी
    इक बार दिखाकर चले जाओ झलक अपनी,
    हम जल्वा-ए-पैहम के तलबगार कहाँ हैं।

    1. जल्वा-ए-पैहम - लगातार दर्शन
    2. तलबगार - ख्वाहिशमंद, मुश्ताक, अभिलाषी
    ~ Hasrat Mohani
  • तेरा चेहरा, तेरी बातें, तेरा गम, तेरी यादें;<br/>
इतनी दौलत पहले कहाँ थी पास मेरे!
    तेरा चेहरा, तेरी बातें, तेरा गम, तेरी यादें;
    इतनी दौलत पहले कहाँ थी पास मेरे!
  • मेरे क़त्ल की कोशिश तो उनकी निगाहों ने की थी;<br/>
पर अदालत ने उन्हें हथियार मानने से इनकार कर दिया!
    मेरे क़त्ल की कोशिश तो उनकी निगाहों ने की थी;
    पर अदालत ने उन्हें हथियार मानने से इनकार कर दिया!
  • खुशबू तेरी प्यार की मुझे महका जाती है;
    तेरी हर बात मुझे बहका जाती है;
    साँसे तो बहुत वक्त लेती है आने ओर जाने मै;
    हर साँस से पहले तेरी याद इस दिल को धडका जाती है!
  • आसमान के एक आशियाना में, एक आशियाना हमारा होता;
    लोग तुम्हे दूर से देखते, नज़दीक से देखने का हक़ बस हमारा होता!