• पतझड़ की कहानियाँ सुना सुना के उदास ना कर,<br/>
नए मौसमों का पता बता, जो गुज़र गया सो गुज़र गया!
    पतझड़ की कहानियाँ सुना सुना के उदास ना कर,
    नए मौसमों का पता बता, जो गुज़र गया सो गुज़र गया!
    ~ Bashir Badr
  • शिकायतें शोर मचाती हैं बहुत,<br/>
प्यार की आवाज अब ठीक से सुनाई नहीं देती!
    शिकायतें शोर मचाती हैं बहुत,
    प्यार की आवाज अब ठीक से सुनाई नहीं देती!
  • उसके क़दमों में:

    उसके क़दमों में अब हयात रख के,
    लौट आया मैं दिल की बात रख के;

    ये क्या कम है इतना जी गया हूँ मैं,
    उसके ग़म को अपने साथ रख के;

    वफ़ा ना कर पाया तेरी यादों से भी,
    रुखसत करता हूँ इन्हें रात रख के;

    लिख के इक ग़ज़ल फिर तुम्हारे लिए,
    सो गया हूँ सिरहाने जज़्बात रख के;

    रूह फिर से छटपटाने सी लगी है,
    वो आ बैठा है क़ब्र पे हाथ रख के|
  • जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा,<br/>
हया यकलखत आई, और शबाब आहिस्ता-आहिस्ता!
    जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा,
    हया यकलखत आई, और शबाब आहिस्ता-आहिस्ता!
    ~ Ameer Minai
  • कुछ इस तरह अपने दिल को बेवकूफ बनाता हूँ मैं;<br/>
कि तुमसे बिछड़ते वक़्त भी खुल के मुस्कुराता हूँ मैं।
    कुछ इस तरह अपने दिल को बेवकूफ बनाता हूँ मैं;
    कि तुमसे बिछड़ते वक़्त भी खुल के मुस्कुराता हूँ मैं।
  • पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात;<br/>
तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा!
    पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात;
    तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा!
    ~ Allama Iqbal
  • हम तेरी धुन मैं परेशान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी;<br/>
और तू हम से गुरेजा ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी;<br/>
तू कहीं साकी गली में खो गयी है और यहाँ;<br/>
डंस गया इंसान को इंसान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी!
    हम तेरी धुन मैं परेशान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी;
    और तू हम से गुरेजा ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी;
    तू कहीं साकी गली में खो गयी है और यहाँ;
    डंस गया इंसान को इंसान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी!
  • गज़ब किया जो तेरे वादे पे एतबार किया;<br/>
तमाम रात हमने क़यामत का इंतज़ार किया;<br/>
न पूछ दिल की हक़ीक़त मगर यह कहतें है;<br/>
वो बेक़रार रहे जिसने बेक़रार किया!
    गज़ब किया जो तेरे वादे पे एतबार किया;
    तमाम रात हमने क़यामत का इंतज़ार किया;
    न पूछ दिल की हक़ीक़त मगर यह कहतें है;
    वो बेक़रार रहे जिसने बेक़रार किया!
    ~ Daagh Dehlvi
  • ऐसा नहीं देखा कहीं हाल किसी और का;<br/>
पहलू में कोई और ख्याल और किसी का!
    ऐसा नहीं देखा कहीं हाल किसी और का;
    पहलू में कोई और ख्याल और किसी का!
  • फूल की पती से कट सकता है हीरे का जिगर;<br/>
मर्दे नादाँ पर कलाम-ऐ-नरम-ऐ-नाज़ुक बेअसर!
    फूल की पती से कट सकता है हीरे का जिगर;
    मर्दे नादाँ पर कलाम-ऐ-नरम-ऐ-नाज़ुक बेअसर!