• भरे बाज़ार से अक्सर मैं ख़ाली हाथ आता हूँ,<br/>
कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी पैसे नहीं होते।
    भरे बाज़ार से अक्सर मैं ख़ाली हाथ आता हूँ,
    कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी पैसे नहीं होते।
  • यह यादों का ही रिशता है, जो छूटता नहीं;
    वरना मुद्दत हुई कि वो दामन, छुडा चले गए।
  • कहाँ माँग ली थी कायनात मैंने, जो इतना दर्द मिला;
    ज़िन्दगी में पहली बार खुदा तुझसे ज़िन्दगी ही तो मांगी थी।
  • डूबी हैं मेरी उँगलियाँ मेरे ही खून में,<br/>
ये काँच के टुकड़ों पर भरोसे की सजा है।
    डूबी हैं मेरी उँगलियाँ मेरे ही खून में,
    ये काँच के टुकड़ों पर भरोसे की सजा है।
  • दर्द सहने की इतनी आदत सी हो गई है,<br/>
कि अब दर्द ना मिले तो बहुत दर्द होता है।
    दर्द सहने की इतनी आदत सी हो गई है,
    कि अब दर्द ना मिले तो बहुत दर्द होता है।
  • मेरी बस इतनी सी ख्वाहिश है,
    तेरी कोई ख्वाहिश अधूरी ना रहे।
  • तन्हा हुए तो एहसास हुआ,
    कि कई घंटे होते है एक दिन में।
  • बैठे थे अपनी याद लेकर कि अचानक चौंक उठे;<br/>
किसी ने शरारत से कह दिया सुनो वो मिलने आये हैं।
    बैठे थे अपनी याद लेकर कि अचानक चौंक उठे;
    किसी ने शरारत से कह दिया सुनो वो मिलने आये हैं।
  • तेरी ज़ुबान ने कुछ कहा तो नहीं था,<br/>
फिर ना जाने क्यों मेरी आँख नम हो गयी।
    तेरी ज़ुबान ने कुछ कहा तो नहीं था,
    फिर ना जाने क्यों मेरी आँख नम हो गयी।
  • हाल पूछ लेने से कौन सा हाल ठीक हो जाता है;
    बस एक तसल्ली सी हो जाती है कि इस भीड़ भरी दुनिया में कोई अपना भी है।