• खूबसूरत क्या कह दिया उनको, वो हमको छोड़कर शीशे के हो गए;
    तराशा नहीं था तो पत्थर थे, जब तराश दिया तो खुदा हो गए।
  • गिला शिकवा ही कर डालो कि कुछ वक्त कट जाए,
    लबों पे आपके ये खामोशी अच्छी नहीं लगती।
  • होंठो पे अपने, यूँ ना रखा करो तुम नादान, कलम को;<br/>
वरना नज़्म फिर नशीली होकर, लड़खड़ाती रहेगी।
    होंठो पे अपने, यूँ ना रखा करो तुम नादान, कलम को;
    वरना नज़्म फिर नशीली होकर, लड़खड़ाती रहेगी।
  • मेरी आवारगी में कुछ क़सूर अब तुम्हारा भी है,<br/>
जब तुम्हारी याद आती है तो घर अच्छा नहीं लगता।
    मेरी आवारगी में कुछ क़सूर अब तुम्हारा भी है,
    जब तुम्हारी याद आती है तो घर अच्छा नहीं लगता।
  • वो तो बारिश कि बूँदें देखकर खुश होते हैं,<br/>
उन्हें क्या मालूम कि हर गिरने वाला कतरा पानी नही होता।
    वो तो बारिश कि बूँदें देखकर खुश होते हैं,
    उन्हें क्या मालूम कि हर गिरने वाला कतरा पानी नही होता।
  • आज धुन्ध बहुत है मेरे शहर में,
    अपने दिखते नहीं, और जो दिखते है वो अपने नहीं।
  • अब ना कोई शिकवा, ना गिला, ना कोई मलाल रहा,<br/>
सितम तेरे भी बे-हिसाब रहे, सब्र मेरा भी कमाल रहा।
    अब ना कोई शिकवा, ना गिला, ना कोई मलाल रहा,
    सितम तेरे भी बे-हिसाब रहे, सब्र मेरा भी कमाल रहा।
  • मुझे यकीन है मोहब्बत उसी को कहते हैं,<br/>
कि जख्म ताज़ा रहे और निशान चला जाये।
    मुझे यकीन है मोहब्बत उसी को कहते हैं,
    कि जख्म ताज़ा रहे और निशान चला जाये।
  • अधूरी हसरतों का आज भी इल्ज़ाम है तुम पर,<br/>
अगर तुम चाहते तो ये मोहब्बत ख़त्म ना होती।
    अधूरी हसरतों का आज भी इल्ज़ाम है तुम पर,
    अगर तुम चाहते तो ये मोहब्बत ख़त्म ना होती।
  • जो दिल को अच्छा लगता है उसी को दोस्त कहता हूँ,
    मुनाफ़ा देखकर मैं रिश्तों की सियासत नहीं करता।