• वो हमारी एक खता पर हमसे कुछ इस कदर रूठ कर चल दिए,
    जैसे सदियों से उन्हें किसी बहाने की तलाश थी।
  • लहजे में बदजुबानी, चेहरे पे नक़ाब लिए फिरते हैं;
    जिनके ख़ुद के बही-खाते बिगड़े हैं, वो मेरा हिसाब लिए फिरते है।
    ~ Anu Sood
  • बड़े गुस्ताख़ हैं झुक कर तेरा मुँह चूम लेते हैं,
    बहुत सा तू ने ज़ालिम गेसुओं को सर चढ़ाया है।
  • रोज़ सोचा है भूल जाऊँ तुझे,
    फिर रोज़ ये बात भूल जाता हूँ।
  • हुस्न का क्या काम है सच्ची मोहब्बत में यारो,
    जब आँख मजनू हो तो लैला हसीन ही लगती है।
  • तेरा अक्स गढ़ गया है आँखों में कुछ ऐसा,
    सामने खुदा भी हो तो दिखता है हू-ब-हू तुझ जैसा।
  • यादें भी क्या क्या करा देती हैं,
    कोई शायर हो गया, कोई खामोश।
  • अधूरी हसरतों का आज भी इलज़ाम है तुम पर,
    अगर तुम चाहते तो ये मोहब्बत ख़त्म ना होती।
  • दो लफ्ज़ लबों पर गुमसुम से बैठे थे,
    न वो कुछ कह सके न हम कुछ कह सके;
    ज़ुबाँ भी आज ख़ामोश से बैठे थे,
    न वो कुछ सुन सके न हम कुछ सुन सके।
  • अग़र मोहब्बत नही थी तो फक़त एक बार बताया तो होता,
    ये कम्बख़त दिल तुम्हारी ख़ामोशी को इश्क़ समझ बैठा।