• इन आँखों में सूरत तेरी सुहानी है;<br/>
मोम सी पिघल रही मेरी जवानी है;<br/>
जिस शिद्दत से सितम हुए थे हम पर;<br/>
मर जाना चाहिए था, जिंदा हैं, हैरानी है!
    इन आँखों में सूरत तेरी सुहानी है;
    मोम सी पिघल रही मेरी जवानी है;
    जिस शिद्दत से सितम हुए थे हम पर;
    मर जाना चाहिए था, जिंदा हैं, हैरानी है!
  • बरसात में जो ग़म भीग जाते हैं;<br/>
मैं धूप में उन्हें सुखाता रहता हूँ!
    बरसात में जो ग़म भीग जाते हैं;
    मैं धूप में उन्हें सुखाता रहता हूँ!
  • थक गया मेरा पुर्जा-पुर्जा तकलीफों से निकलने में;<br/>
हार मानने का दिल नहीं करता और जीत नजर नहीं आती!
    थक गया मेरा पुर्जा-पुर्जा तकलीफों से निकलने में;
    हार मानने का दिल नहीं करता और जीत नजर नहीं आती!
  • मोहब्बत के आँसू को यूँ बहाया नहीं जाता;<br/>
इस मोती को पागल यूँ गंवाया नहीं जाता;<br/>
लिए हैं बोसे मैंने लब-ए-जाना के जब से;<br/>
ऐसे - वैसों से मुंह अब लगाया नहीं जाता!
    मोहब्बत के आँसू को यूँ बहाया नहीं जाता;
    इस मोती को पागल यूँ गंवाया नहीं जाता;
    लिए हैं बोसे मैंने लब-ए-जाना के जब से;
    ऐसे - वैसों से मुंह अब लगाया नहीं जाता!
  • जो ख़ुलूस से मिलता है बरस जाता हूँ;<br/>
मैं बरसात का इक बादल आवारा सा हूँ!
    जो ख़ुलूस से मिलता है बरस जाता हूँ;
    मैं बरसात का इक बादल आवारा सा हूँ!
  • ये आइने अब घर के सँवरते क्यूँ नहीं;<br/>
वो ज़ुल्फ़ के सायें बिखरते क्यूँ नहीं;<br/>
लगता है ऐसे के बिछड़े हैं अभी-अभी;<br/>
भूले से भी उन्हें हम भूलते क्यूँ नहीं!
    ये आइने अब घर के सँवरते क्यूँ नहीं;
    वो ज़ुल्फ़ के सायें बिखरते क्यूँ नहीं;
    लगता है ऐसे के बिछड़े हैं अभी-अभी;
    भूले से भी उन्हें हम भूलते क्यूँ नहीं!
  • ख़ुशी और ग़म को समझता नहीं हूँ;<br/>
वही है हाल अब जो कहता नहीं हूँ;<br/>
ये वादों - कसमों को निभाना क्या है;<br/>
मैं तो इक पल भी तुम्हें भूलता नहीं हूँ!
    ख़ुशी और ग़म को समझता नहीं हूँ;
    वही है हाल अब जो कहता नहीं हूँ;
    ये वादों - कसमों को निभाना क्या है;
    मैं तो इक पल भी तुम्हें भूलता नहीं हूँ!
  • दिल से तो कई मौसम गुज़र जाते हैं;<br/>
आँखों से मगर  बरसात नहीं जाती!
    दिल से तो कई मौसम गुज़र जाते हैं;
    आँखों से मगर बरसात नहीं जाती!
  • न झगड़ें हम आपस में, झगड़कर टूट जायेंगे,<br/>
तुम्हारा आइना हम हैं, हमारा आइना तुम हो!
    न झगड़ें हम आपस में, झगड़कर टूट जायेंगे,
    तुम्हारा आइना हम हैं, हमारा आइना तुम हो!
  • दिल पे तन्हाई के सियाह अब्र छाने लगे हैं;<br/>
तेरे ग़म की लगता है बरसात होने वाली है!
    दिल पे तन्हाई के सियाह अब्र छाने लगे हैं;
    तेरे ग़म की लगता है बरसात होने वाली है!