• यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इंतेहा;<br/>
कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल से!Upload to Facebook
    यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इंतेहा;
    कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल से!
  • इक बेवफ़ा में रुह-ए-वफ़ा ढूंढ़ते रहे:

    इक बेवफ़ा में रुह-ए-वफ़ा ढूंढ़ते रहे,
    शोलों की बारिशों में सबा ढूंढ़ते रहे;

    वो ढूंढ़ते हैं दिल को दुखाने का सिलसिला,
    उनकी ख़ुशी में हम तो मज़ा ढूंढ़ते रहे;

    वो हैं कि मुस्कुरा रहे हैं चीर के जिगर,
    हम हैं कि यार खुद की ख़ता ढूंढ़ते रहे;

    घबरा के देखते कभी आकाश की तरफ,
    रुख़सत हुई ख़ुशी का पता ढूंढ़ते रहे;

    ठहरी हुई नदी में भरे जो रवानगी,
    शिद्दत से रात दिन वो अदा ढूंढ़ते रहे।
  • अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;<br/>
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!<br/><br/>

पासबान  =  चौकीदार, गार्डUpload to Facebook
    अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
    लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!

    पासबान = चौकीदार, गार्ड
    ~ Allama Iqbal
  • हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका;<br/>
मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया!
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    हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका;
    मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया!
    ~ Jigar Moradabadi
  • बहुत खास होते हैं वो लोग जो आपकी आवाज़ से;<BR/>
आपकी खुशी और दुख का अंदाज़ा लगा लेते हैं!Upload to Facebook
    बहुत खास होते हैं वो लोग जो आपकी आवाज़ से;
    आपकी खुशी और दुख का अंदाज़ा लगा लेते हैं!
  • कितना अजीब है ये फलसफा जिंदगी का;<BR/>
दूरियाँ सिखाती हैं कि, नज़दीकियाँ क्या होती हैं!Upload to Facebook
    कितना अजीब है ये फलसफा जिंदगी का;
    दूरियाँ सिखाती हैं कि, नज़दीकियाँ क्या होती हैं!
  • बदल गए सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता;<br/>
अब तो अपना भी हक़ बनता है!Upload to Facebook
    बदल गए सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता;
    अब तो अपना भी हक़ बनता है!
  • अगर इश्क करो तो आदाब-ए-वफ़ा भी सीखो;<br/>
ये चंद दिन की बेकरारी मोहब्बत नहीं होती!Upload to Facebook
    अगर इश्क करो तो आदाब-ए-वफ़ा भी सीखो;
    ये चंद दिन की बेकरारी मोहब्बत नहीं होती!
  • गम-ए-ज़ज़्बात से घायल:

    गम-ए-ज़ज़्बात से घायल, कोई दामन न रह जाये,
    बिना खुशियों की फुलवारी के कोई आंगन न रह जाये;

    बजाओ इस तरह की धुन, कि हर गैरत के सीने में,
    लरजते आंसुओं का शेष कोई सावन न रह जाये;

    खताओं के समंदर में न ढूंढो सत्य का मोती,
    कहीं जीवन चमन का घट अपावन न रह जाये;

    मुक्ति की राह में भक्ति के खंजर इस तरह मारो,
    किसी भी शख्स के दुर्व्यसन का साधन न रह जाये;

    जलाओ इस तरह से दीप हर जीवन के दरवाजे पे,
    उजाले से महरूम, कोई आंगन न रह जाये।
  • एक पल में ले गई सारे ग़म खरीदकर;<br/>
कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की।Upload to Facebook
    एक पल में ले गई सारे ग़म खरीदकर;
    कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की।