• मिलता ही नही तुम्हारे जैसा कोई और इस शहर मै,<br/>
हमे क्या मालूम था कि तुम एक हो और वो भी किसी और के!
    मिलता ही नही तुम्हारे जैसा कोई और इस शहर मै,
    हमे क्या मालूम था कि तुम एक हो और वो भी किसी और के!
  • आइने और दिल का बस एक ही फसाना है,<br/>
टूट कर एक दिन दोनों को बिखर जाना है।
    आइने और दिल का बस एक ही फसाना है,
    टूट कर एक दिन दोनों को बिखर जाना है।
  • ऐ दिल मत कर इतनी मोहब्बत तू किसी से,<BR/>
इश्क़ में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा,<BR/> 
टूट कर बिखर जायेगा एक दिन अपनों के हाथों,<BR/> 
किसने तोड़ा ये भी किसी से कह नहीं पायेगा।
    ऐ दिल मत कर इतनी मोहब्बत तू किसी से,
    इश्क़ में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा,
    टूट कर बिखर जायेगा एक दिन अपनों के हाथों,
    किसने तोड़ा ये भी किसी से कह नहीं पायेगा।
  • शब्द तो यदा-कदा, चुभते ही रहते हैं,<BR/>
मौन चुभ जाए किसी का तो सम्भल जाना चाहिए!
    शब्द तो यदा-कदा, चुभते ही रहते हैं,
    मौन चुभ जाए किसी का तो सम्भल जाना चाहिए!
  • किसको क्या मिले इसका कोई हिसाब नहीं;<br/>
तेरे पास रूह नहीं मेरे पास लिबास नहीं!
    किसको क्या मिले इसका कोई हिसाब नहीं;
    तेरे पास रूह नहीं मेरे पास लिबास नहीं!
  • हर रिश्ते में अमृत बरसेगा, शर्त इतनी है कि;<br/>
शरारतें करो पर, साजिशे नहीं!
    हर रिश्ते में अमृत बरसेगा, शर्त इतनी है कि;
    शरारतें करो पर, साजिशे नहीं!
  • दर्द ही दर्द है दिल में बयान कैसे करें,<br/> 
ज़िंदगी ग़मों की गुलाम रिहा कैसे करें,<br/> 
यूँ तो हमें हमारे दिल ने धोखे दिए बहुत,<br/>  
पर अपने दिल से हम दगा कैसे करें।
    दर्द ही दर्द है दिल में बयान कैसे करें,
    ज़िंदगी ग़मों की गुलाम रिहा कैसे करें,
    यूँ तो हमें हमारे दिल ने धोखे दिए बहुत,
    पर अपने दिल से हम दगा कैसे करें।
  • वो आ के पहलू में ऐसे बैठे,<br/>
के शाम रंगीन हो गयी है,<br/>
ज़रा-ज़रा-सी खिली तबीयत,<br/>
ज़रा-सी ग़मगीन हो गयी है!
    वो आ के पहलू में ऐसे बैठे,
    के शाम रंगीन हो गयी है,
    ज़रा-ज़रा-सी खिली तबीयत,
    ज़रा-सी ग़मगीन हो गयी है!
  • एक ताबीज़ तेरी मेरी दोस्ती को भी चाहिए;<br/>
थोड़ी सी दिखी नहीं कि नज़र लगने लगती है।
    एक ताबीज़ तेरी मेरी दोस्ती को भी चाहिए;
    थोड़ी सी दिखी नहीं कि नज़र लगने लगती है।
  • उम्र भर मिलने नहीं देती हैं अब तो रंजिशें;<br/>
वक़्त हम से रूठ जाने की अदा तक ले गया!
    उम्र भर मिलने नहीं देती हैं अब तो रंजिशें;
    वक़्त हम से रूठ जाने की अदा तक ले गया!