• दर्द आँखों से निकला तो सबने बोला कायर है ये,<br/>
जब दर्द लफ़्ज़ों से निकला तो सब बोले शायर है ये!
    दर्द आँखों से निकला तो सबने बोला कायर है ये,
    जब दर्द लफ़्ज़ों से निकला तो सब बोले शायर है ये!
  • ग़म है न अब ख़ुशी है न उम्मीद है न आस;<br/>
सब से नजात पाए ज़माने गुज़र गए!
    ग़म है न अब ख़ुशी है न उम्मीद है न आस;
    सब से नजात पाए ज़माने गुज़र गए!
    ~ Khumar Barabankvi
  • सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की;<br/>
झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है।
    सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की;
    झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है।
  • इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा;<br/>
अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है!
    इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा;
    अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है!
    ~ Akhtar Sheerani
  • मेरी मोहब्बत की ना सही, मेरे सलीक़े की तो दाद दे;<br/>
तेरा ज़िक्र रोज़ करते हैं, तेरा नाम लिये बग़ैर!
    मेरी मोहब्बत की ना सही, मेरे सलीक़े की तो दाद दे;
    तेरा ज़िक्र रोज़ करते हैं, तेरा नाम लिये बग़ैर!
  • ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे;<br/>
ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का!
    ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे;
    ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का!
    ~ Javed Akhtar
  • आत्मा तो हमेशा से जानती है कि सही क्या है;<br/>
चुनौती तो मन को समझाने की होती है!
    आत्मा तो हमेशा से जानती है कि सही क्या है;
    चुनौती तो मन को समझाने की होती है!
  • तू भी ख्वा-म-खाह बढ़ रही हैं ऐ धूप;<br/>
इस शहर में पिघलने वाले दिल ही नहीं रहे!
    तू भी ख्वा-म-खाह बढ़ रही हैं ऐ धूप;
    इस शहर में पिघलने वाले दिल ही नहीं रहे!
  • मुरझा चुका है फिर भी ये दिल फूल ही तो है;<br/>
अब आप की ख़ुशी इसे काँटों में तौलिए!
    मुरझा चुका है फिर भी ये दिल फूल ही तो है;
    अब आप की ख़ुशी इसे काँटों में तौलिए!
    ~ Rajendra Krishan
  • एक वो हैं कि जिन्हें अपनी ख़ुशी ले डूबी;<br/>
एक हम हैं कि जिन्हें ग़म ने उभरने न दिया!
    एक वो हैं कि जिन्हें अपनी ख़ुशी ले डूबी;
    एक हम हैं कि जिन्हें ग़म ने उभरने न दिया!
    ~ Azad Gulati