• बुलंदीयो को पाने कि ख्वाईश तो बहुत हे मेरी;<br/>
मगर ओरो को रोंदने का हुनर कहा से लाऊ!
    बुलंदीयो को पाने कि ख्वाईश तो बहुत हे मेरी;
    मगर ओरो को रोंदने का हुनर कहा से लाऊ!
  • अच्छा है तुम्हारा दिल जो खवाबोे में मान जाता है;<br/>
एक कम्बक्त हमारा दिल है की रूबरू होने को तड़पता है।
    अच्छा है तुम्हारा दिल जो खवाबोे में मान जाता है;
    एक कम्बक्त हमारा दिल है की रूबरू होने को तड़पता है।
  • मयखाने से पूछा आज, इतना सन्नाटा क्यों है,<br/>
मयखाना भी मुस्कुरा के बोला, लहू का दौर है साहब, अब शराब कौन पीता है!
    मयखाने से पूछा आज, इतना सन्नाटा क्यों है,
    मयखाना भी मुस्कुरा के बोला, लहू का दौर है साहब, अब शराब कौन पीता है!
  • एक तेरा ही नशा था जो शिकस्त दे गया मुझे;<br/>
वरना मयखाने भी तौबा करते थे मेरी मयकशी से।
    एक तेरा ही नशा था जो शिकस्त दे गया मुझे;
    वरना मयखाने भी तौबा करते थे मेरी मयकशी से।
  • मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं;<br/>
मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है।
    मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं;
    मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है।
  • एक मुट्ठी इश्क़ बिखेर दो इस ज़मीन पे;<br/>
बारिश का मौसम है शायद मोहब्बत पनप जाए।
    एक मुट्ठी इश्क़ बिखेर दो इस ज़मीन पे;
    बारिश का मौसम है शायद मोहब्बत पनप जाए।
  • गुनगुनाना तो तकदीर में लिखा के लाए थे;<br/>
खिलखिलाना दोस्तों ने तोहफे में दे दिया!
    गुनगुनाना तो तकदीर में लिखा के लाए थे;
    खिलखिलाना दोस्तों ने तोहफे में दे दिया!
  • मेरे शहर में खुदाओं की कमी नहीं,<br/>

दिक्कत मुझे इंसान ढूँढने में होती है।
    मेरे शहर में खुदाओं की कमी नहीं,
    दिक्कत मुझे इंसान ढूँढने में होती है।
  • इतने कहाँ मसरूफ हो गए हो आजकल;<br/>
की अब दिल दुखाने भी नहीं आते!
    इतने कहाँ मसरूफ हो गए हो आजकल;
    की अब दिल दुखाने भी नहीं आते!
  • जहाँ कमरों में कैद हो जाती है `जिंदगी`,<br/>
लोग उसे `बड़ा शहर` कहते हैं!
    जहाँ कमरों में कैद हो जाती है "जिंदगी",
    लोग उसे "बड़ा शहर" कहते हैं!