• मैं समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले,<br/>
तू ने जाकर तो जुदाई मेरी क़िस्मत कर दी।
    मैं समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले,
    तू ने जाकर तो जुदाई मेरी क़िस्मत कर दी।
  • ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें,<br/>
ख़्वाहिशें दफ़न करें, या चादर बड़ी करें!
    ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें,
    ख़्वाहिशें दफ़न करें, या चादर बड़ी करें!
  • जिंदगी बस यूँ ही खत्म होती रही,<br/>
जरुरतें सुलगी, ख्वाहिशें धुँआ होती रहीं!
    जिंदगी बस यूँ ही खत्म होती रही,
    जरुरतें सुलगी, ख्वाहिशें धुँआ होती रहीं!
  • खामोशियाँ ही बेहतर हैं जिंदगी के सफर में;<br/>
लफ्जों की मार ने कई घर तबाह किये!
    खामोशियाँ ही बेहतर हैं जिंदगी के सफर में;
    लफ्जों की मार ने कई घर तबाह किये!
  • दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है,<br/>
आखिर इस दर्द की दवा क्या है,<br/> 
हमको उनसे है उम्मीद वफ़ा की,<br/> 
जो जानते ही नहीं वफ़ा क्या है।
    दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है,
    आखिर इस दर्द की दवा क्या है,
    हमको उनसे है उम्मीद वफ़ा की,
    जो जानते ही नहीं वफ़ा क्या है।
  • शिकायत क्या करूँ दोनों तरफ ग़म का फसाना है,<br/>
मेरे आगे मोहब्बत है तेरे आगे ज़माना है,<br/> 
पुकारा है तुझे मंजिल ने लेकिन मैं कहाँ जाऊं,<br/> 
बिछड़ कर तेरी दुनिया से कहाँ मेरा ठिकाना है।
    शिकायत क्या करूँ दोनों तरफ ग़म का फसाना है,
    मेरे आगे मोहब्बत है तेरे आगे ज़माना है,
    पुकारा है तुझे मंजिल ने लेकिन मैं कहाँ जाऊं,
    बिछड़ कर तेरी दुनिया से कहाँ मेरा ठिकाना है।
  • फुर्सत मिली तो तुझ पर भी एक कलाम लिखेंगे,<br/>          
कभी आना मेरे शहर एक शाम तुम्हारे नाम लिखेंगे!
    फुर्सत मिली तो तुझ पर भी एक कलाम लिखेंगे,
    कभी आना मेरे शहर एक शाम तुम्हारे नाम लिखेंगे!
  • अगर मुस्कुराहट के लिए ईश्वर का शुक्रिया नहीं किया,<br/>
तो आँखों मे आये आँसुओं के लिये शिकायत का हक़ कैसा!
    अगर मुस्कुराहट के लिए ईश्वर का शुक्रिया नहीं किया,
    तो आँखों मे आये आँसुओं के लिये शिकायत का हक़ कैसा!
  • सुना है इस महफिल में शायर बहुत हैं,<br/>
कुछ हमें भी सुनाओ, आज हम घायल बहुत हैं!
    सुना है इस महफिल में शायर बहुत हैं,
    कुछ हमें भी सुनाओ, आज हम घायल बहुत हैं!
  • तुम समझते हो कि जीने की तलब है मुझको,<br/>
मैं तो इस आस में ज़िंदा हूँ कि मरना कब है।
    तुम समझते हो कि जीने की तलब है मुझको,
    मैं तो इस आस में ज़िंदा हूँ कि मरना कब है।