• क़र्ज़ होता तो उतार भी देते,<br/>
कम्बख्त इश्क़ था चढ़ा रहा!
    क़र्ज़ होता तो उतार भी देते,
    कम्बख्त इश्क़ था चढ़ा रहा!
  • दुनिया की क्या मजाल देता हमें कोई फरेब;<br/>
अपनी ही आरजू के हुए हम शिकार हैं!
    दुनिया की क्या मजाल देता हमें कोई फरेब;
    अपनी ही आरजू के हुए हम शिकार हैं!
  • हमारी तो तासीर ही यूँ है तावीजों की तरह;<br/>
जिसके भी गले मिलते हैं उसकी बरकत हो जाती है!
    हमारी तो तासीर ही यूँ है तावीजों की तरह;
    जिसके भी गले मिलते हैं उसकी बरकत हो जाती है!
  • रेत पर नाम लिखते नहीं क्योंकि रेत पर लिखे नाम कभी टिकते नहीं;<br/>
लोग कहते हैं पत्थर दिल हैं हम लेकिन पत्थरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं!
    रेत पर नाम लिखते नहीं क्योंकि रेत पर लिखे नाम कभी टिकते नहीं;
    लोग कहते हैं पत्थर दिल हैं हम लेकिन पत्थरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं!
  • ये इश्क़ और मोहब्बत की रवायत भी अजीब है;<br/>
जिसको पाया नहीं उसको खोना भी नहीं चाहते!
    ये इश्क़ और मोहब्बत की रवायत भी अजीब है;
    जिसको पाया नहीं उसको खोना भी नहीं चाहते!
  • एक फ़क़त याद है जाना उसका;
    और कुछ उसके सिवा याद नहीं!
  • हमने वक़्त से दोस्ती कर ली है,<br/>
सुना है ये अच्छे अच्छों को बदल देता है!
    हमने वक़्त से दोस्ती कर ली है,
    सुना है ये अच्छे अच्छों को बदल देता है!
  • फुर्सत में भी फुर्सत नहीं मिली उन्हें हमें याद करने की,<br/>
आजकल हम किसी के लिये इतने फ़िज़ूल हो गये।
    फुर्सत में भी फुर्सत नहीं मिली उन्हें हमें याद करने की,
    आजकल हम किसी के लिये इतने फ़िज़ूल हो गये।
  • नफरतों के शहर में चालाकियों के डेरे हैं!<br/>
यहाँ वो लोग रहते हैं जो तेरे मुँह पर तेरे हैं और मेरे मुँह पर मेरे हैं!
    नफरतों के शहर में चालाकियों के डेरे हैं!
    यहाँ वो लोग रहते हैं जो तेरे मुँह पर तेरे हैं और मेरे मुँह पर मेरे हैं!
  • किसी के इंतज़ार में हमने वक़्त को खाक़ में मिला दिया;<br/>
किसी ने इंतज़ार करा कर हमको खाक़ कर दिया!
    किसी के इंतज़ार में हमने वक़्त को खाक़ में मिला दिया;
    किसी ने इंतज़ार करा कर हमको खाक़ कर दिया!