• किमतें गिर गई मोहब्बत की,<br/>
चलो कोई दूसरा कारोबार करते है!
    किमतें गिर गई मोहब्बत की,
    चलो कोई दूसरा कारोबार करते है!
  • खुदा तो इक तरफ, खुद से भी कोसों दूर होता है,<br/>
बशर जिस वक्त ताकत के नशे में चूर होता है!<br/><br/>

बशर - मानव
    खुदा तो इक तरफ, खुद से भी कोसों दूर होता है,
    बशर जिस वक्त ताकत के नशे में चूर होता है!

    बशर - मानव
  • जुबाँ न भी बोले तो, मुश्किल नहीं;<br/>
फिक्र तब होती है जब, खामोशी भी बोलना छोड़ दें|
    जुबाँ न भी बोले तो, मुश्किल नहीं;
    फिक्र तब होती है जब, खामोशी भी बोलना छोड़ दें|
  • चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत;<br/>
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
    चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत;
    बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
    ~ Mirza Ghalib
  • गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई,<br/>
परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए!
    गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई,
    परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए!
  • ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें;<br/>
चादर बड़ी करें या, ख़्वाहिशे दफ़न करे!
    ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें;
    चादर बड़ी करें या, ख़्वाहिशे दफ़न करे!
  • मसरूफ़ हैं यहाँ लोग, दूसरों की कहानियाँ जानने में,<br/>
इतनी शिद्दत से ख़ुद को अगर पढ़ते, तो ख़ुद़ा हो जाते|
    मसरूफ़ हैं यहाँ लोग, दूसरों की कहानियाँ जानने में,
    इतनी शिद्दत से ख़ुद को अगर पढ़ते, तो ख़ुद़ा हो जाते|
  • आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है;<br/>
जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है!
    आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है;
    जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है!
    ~ Gulzar
  • एक तिल का पहरा भी जरूरी है, लबो के आसपास,<br/>
मुझे डर है कहीं तेरी मुस्कुराहट को, कोई नज़र न लगा दे|
    एक तिल का पहरा भी जरूरी है, लबो के आसपास,
    मुझे डर है कहीं तेरी मुस्कुराहट को, कोई नज़र न लगा दे|
  • इतना दर्द तो मुझे मरने से भी नही होगा;<br/>
जितना दर्द तुम्हारी खामोशी ने दिया है!
    इतना दर्द तो मुझे मरने से भी नही होगा;
    जितना दर्द तुम्हारी खामोशी ने दिया है!