• बदल गए सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता;<br/>
अब तो अपना भी हक़ बनता है!Upload to Facebook
    बदल गए सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता;
    अब तो अपना भी हक़ बनता है!
  • अगर इश्क करो तो आदाब-ए-वफ़ा भी सीखो;<br/>
ये चंद दिन की बेकरारी मोहब्बत नहीं होती!Upload to Facebook
    अगर इश्क करो तो आदाब-ए-वफ़ा भी सीखो;
    ये चंद दिन की बेकरारी मोहब्बत नहीं होती!
  • गम-ए-ज़ज़्बात से घायल:

    गम-ए-ज़ज़्बात से घायल, कोई दामन न रह जाये,
    बिना खुशियों की फुलवारी के कोई आंगन न रह जाये;

    बजाओ इस तरह की धुन, कि हर गैरत के सीने में,
    लरजते आंसुओं का शेष कोई सावन न रह जाये;

    खताओं के समंदर में न ढूंढो सत्य का मोती,
    कहीं जीवन चमन का घट अपावन न रह जाये;

    मुक्ति की राह में भक्ति के खंजर इस तरह मारो,
    किसी भी शख्स के दुर्व्यसन का साधन न रह जाये;

    जलाओ इस तरह से दीप हर जीवन के दरवाजे पे,
    उजाले से महरूम, कोई आंगन न रह जाये।
  • एक पल में ले गई सारे ग़म खरीदकर;<br/>
कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की।Upload to Facebook
    एक पल में ले गई सारे ग़म खरीदकर;
    कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की।
  • आज गुमनाम हूँ तो ज़रा फासला रख मुझसे;<br/>
कल फिर मशहूर हो जाऊँ तो कोई रिश्ता निकाल लेना!Upload to Facebook
    आज गुमनाम हूँ तो ज़रा फासला रख मुझसे;
    कल फिर मशहूर हो जाऊँ तो कोई रिश्ता निकाल लेना!
  • दुश्मन के सितम का ख़ौफ़ नहीं हमको;<br/>
हम तो दोस्तों के रुठ जाने से डरते हैं।Upload to Facebook
    दुश्मन के सितम का ख़ौफ़ नहीं हमको;
    हम तो दोस्तों के रुठ जाने से डरते हैं।
  • कभी-कभी यूँ ही चले आया करो दिल की दहलीज पर;<br/>
अच्छा लगता है, यूँ तन्हाइयों में तुम्हारा दस्तक देना।Upload to Facebook
    कभी-कभी यूँ ही चले आया करो दिल की दहलीज पर;
    अच्छा लगता है, यूँ तन्हाइयों में तुम्हारा दस्तक देना।
  • सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको:

    सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको,
    जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको;

    सदियों का रत जगा मेरी रातों में आ गया,
    मैं एक हसीन शख्स की बातों में आ गया;

    जब तस्सवुर मेरा चुपके से तुझे छू आए,
    देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आए;

    गुस्ताख हवाओं की शिकायत न किया कर,
    उड़ जाए दुपट्टा तो खनक औढ लिया कर;

    तुम पूछो और में न बताउ ऐसे तो हालात नहीं,
    एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं;

    रात के सन्नाटे में हमने क्या-क्या धोके खाए है,
    अपना ही जब दिल धड़का तो हम समझे वो आए है!
    ~ Qateel Shifai
  • जन्नत-ए-इश्क में हर बात अजीब होती है;<br/>
किसी को आशिकी तो किसी को शायरी नसीब होती है!Upload to Facebook
    जन्नत-ए-इश्क में हर बात अजीब होती है;
    किसी को आशिकी तो किसी को शायरी नसीब होती है!
  • शरीर के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नज़र;<br/>
सिर पर है कितना बोझ, कोई देखता नहीं।Upload to Facebook
    शरीर के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नज़र;
    सिर पर है कितना बोझ, कोई देखता नहीं।