• यह मेरी ज़ात की सब से बड़ी तमन्ना थी,<br/>
काश, के वो मेरा होता, मेरे नाम की तरहँ!
    यह मेरी ज़ात की सब से बड़ी तमन्ना थी,
    काश, के वो मेरा होता, मेरे नाम की तरहँ!
    ~ Parveen Shakir
  • शायरी उसी के लबों पर सजती है साहिब;<br/>

जिसकी आँखों में इश्क रोता हो!
    शायरी उसी के लबों पर सजती है साहिब;
    जिसकी आँखों में इश्क रोता हो!
  • अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे;<br/>
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे!
    अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे;
    तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे!
    ~ Wasim Barelvi
  • परदो की क्या बिसात जो दीदार को रोक दे;<br/>

नजर में धार हो तो क्या इस पार क्या उस पार!
    परदो की क्या बिसात जो दीदार को रोक दे;
    नजर में धार हो तो क्या इस पार क्या उस पार!
  • पतझड़ की कहानियाँ सुना सुना के उदास ना कर,<br/>
नए मौसमों का पता बता, जो गुज़र गया सो गुज़र गया!
    पतझड़ की कहानियाँ सुना सुना के उदास ना कर,
    नए मौसमों का पता बता, जो गुज़र गया सो गुज़र गया!
    ~ Bashir Badr
  • शिकायतें शोर मचाती हैं बहुत,<br/>
प्यार की आवाज अब ठीक से सुनाई नहीं देती!
    शिकायतें शोर मचाती हैं बहुत,
    प्यार की आवाज अब ठीक से सुनाई नहीं देती!
  • उसके क़दमों में:

    उसके क़दमों में अब हयात रख के,
    लौट आया मैं दिल की बात रख के;

    ये क्या कम है इतना जी गया हूँ मैं,
    उसके ग़म को अपने साथ रख के;

    वफ़ा ना कर पाया तेरी यादों से भी,
    रुखसत करता हूँ इन्हें रात रख के;

    लिख के इक ग़ज़ल फिर तुम्हारे लिए,
    सो गया हूँ सिरहाने जज़्बात रख के;

    रूह फिर से छटपटाने सी लगी है,
    वो आ बैठा है क़ब्र पे हाथ रख के|
  • जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा,<br/>
हया यकलखत आई, और शबाब आहिस्ता-आहिस्ता!
    जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा,
    हया यकलखत आई, और शबाब आहिस्ता-आहिस्ता!
    ~ Ameer Minai
  • कुछ इस तरह अपने दिल को बेवकूफ बनाता हूँ मैं;<br/>
कि तुमसे बिछड़ते वक़्त भी खुल के मुस्कुराता हूँ मैं।
    कुछ इस तरह अपने दिल को बेवकूफ बनाता हूँ मैं;
    कि तुमसे बिछड़ते वक़्त भी खुल के मुस्कुराता हूँ मैं।
  • पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात;<br/>
तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा!
    पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात;
    तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा!
    ~ Allama Iqbal