• दिल के रिश्ते हैं बस किस्मत से बनते हैं;<br/>
वरना मुलाक़ात तो हज़ारों से होती हैं!
    दिल के रिश्ते हैं बस किस्मत से बनते हैं;
    वरना मुलाक़ात तो हज़ारों से होती हैं!
  • रिश्तों को जेबों में नहीं हुजूर दिलों में रखिये;<br/>
क्योंकि वक्त से शातिर कोई जेब कतरा नहीं होता!
    रिश्तों को जेबों में नहीं हुजूर दिलों में रखिये;
    क्योंकि वक्त से शातिर कोई जेब कतरा नहीं होता!
  • बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं;<br/>
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं!
    बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं;
    तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • दिल की बेताबी नहीं ठहरने देती है मुझे;<br/>
दिन कहीं रात कहीं सुब्ह कहीं शाम कहीं!
    दिल की बेताबी नहीं ठहरने देती है मुझे;
    दिन कहीं रात कहीं सुब्ह कहीं शाम कहीं!
    ~ Nazeer Akbarabadi
  • इंतजार, इज़हार, इबादत सब तो किया मैंने;<br/>
कैसे बताऊं कि तुमसे इश्क़ कितना किया मैंने!
    इंतजार, इज़हार, इबादत सब तो किया मैंने;
    कैसे बताऊं कि तुमसे इश्क़ कितना किया मैंने!
  • तोड़ दे मेरे दिल को पर इसे अपने पास तो रख;<br/>
मुझे खुद से दूर ना कर मेरे मरने तक मुझे साथ तो रख!
    तोड़ दे मेरे दिल को पर इसे अपने पास तो रख;
    मुझे खुद से दूर ना कर मेरे मरने तक मुझे साथ तो रख!
  • फिर छलावे में हमदर्दों के चोट खाओगे;<br/>
किसी को ज़ख्म दिखाए तो सज़ा पाओगे!
    फिर छलावे में हमदर्दों के चोट खाओगे;
    किसी को ज़ख्म दिखाए तो सज़ा पाओगे!
  • कोई जिस्म पर अटक गया कोई दिल पर अटक गया,<br/>
इश्क उसका ही मुकम्मल हुआ जो रूह तक पहुँच गया!
    कोई जिस्म पर अटक गया कोई दिल पर अटक गया,
    इश्क उसका ही मुकम्मल हुआ जो रूह तक पहुँच गया!
  • कोई कब तक एक नाम दिन-रात पुकारे?<br/>
शाम उतर आई खिड़की में बिना तुम्हारे!
    कोई कब तक एक नाम दिन-रात पुकारे?
    शाम उतर आई खिड़की में बिना तुम्हारे!
    ~ Dr. Kumar Vishwas
  • तू अपनी रफ्तार पे इतना ना इतरा,ऐ जिंदगी;<br/>
अगर मैंने रोक ली साँस तो, तू भी चल नही पायेगी!
    तू अपनी रफ्तार पे इतना ना इतरा,ऐ जिंदगी;
    अगर मैंने रोक ली साँस तो, तू भी चल नही पायेगी!