• शिद्दत से जिया है हर लम्हें को;<br/>
यूँ ही यादें खुबसूरत तो नहीं होती!
    शिद्दत से जिया है हर लम्हें को;
    यूँ ही यादें खुबसूरत तो नहीं होती!
  • तुम कितने दूर हो मुझसे मैं कितना पास हूँ तुमसे,<br/>
तुम्हें पाना भी नामुमकिन तुम्हें खोना भी नामुमकिन।
    तुम कितने दूर हो मुझसे मैं कितना पास हूँ तुमसे,
    तुम्हें पाना भी नामुमकिन तुम्हें खोना भी नामुमकिन।
  • होंठो ने तेरा ज़िक्र न किया पर मेरी आंखे तुझे पैग़ाम देती है;<br/>
हम दुनियाँ से तुझे छुपाएँ कैसे मेरी हर शायरी तेरा ही नाम लेती है!
    होंठो ने तेरा ज़िक्र न किया पर मेरी आंखे तुझे पैग़ाम देती है;
    हम दुनियाँ से तुझे छुपाएँ कैसे मेरी हर शायरी तेरा ही नाम लेती है!
  • नहीं जो दिल में जगह तो नजर में रहने दो,<br/>

मेरी हयात को तुम अपने असर में रहने दो,<br/>

मैं अपनी सोच को तेरी गली में छोड़ आया हूँ,<br/>

मेरे वजूद को ख़्वाबों के घर में रहने दो।
    नहीं जो दिल में जगह तो नजर में रहने दो,
    मेरी हयात को तुम अपने असर में रहने दो,
    मैं अपनी सोच को तेरी गली में छोड़ आया हूँ,
    मेरे वजूद को ख़्वाबों के घर में रहने दो।
  • उसने मुझसे ना जाने क्यों ये दूरी कर ली,<br/>
बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी,<br/>
मेरे मुकद्दर में दर्द आया तो क्या हुआ,<br/>
खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।
    उसने मुझसे ना जाने क्यों ये दूरी कर ली,
    बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी,
    मेरे मुकद्दर में दर्द आया तो क्या हुआ,
    खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।
  • न रुकी वक़्त की गर्दिश और न ज़माना बदला;<br/>
पेड़ सूखा तो परिन्दों ने भी ठिकाना बदला!
    न रुकी वक़्त की गर्दिश और न ज़माना बदला;
    पेड़ सूखा तो परिन्दों ने भी ठिकाना बदला!
  • नजाकत तो देखिये, की सूखे पत्ते ने डाली से कहा,<br/>
चुपके से अलग करना वरना, लोगो का रिश्तों से भरोसा उठ जायेगा!
    नजाकत तो देखिये, की सूखे पत्ते ने डाली से कहा,
    चुपके से अलग करना वरना, लोगो का रिश्तों से भरोसा उठ जायेगा!
  • आँखों से छलकती मोहब्बत को यूँ अल्फ़ाज़ मिलते है,<br/>
जो गिरे आँखों से दो बुँदे वो भी तो प्यार बयां करते है!
    आँखों से छलकती मोहब्बत को यूँ अल्फ़ाज़ मिलते है,
    जो गिरे आँखों से दो बुँदे वो भी तो प्यार बयां करते है!
  • क्यों चाँदनी रातों में दरिया पे नहाते हो,<br/>
सोये हुए पानी में क्या आग लगानी है।
    क्यों चाँदनी रातों में दरिया पे नहाते हो,
    सोये हुए पानी में क्या आग लगानी है।
  • यारों कुछ तो जिक्र करो, उनकी क़यामत बाहों का,<br/>
जो सिमटते होंगें उनमे, वो तो मर जाते होंगे!
    यारों कुछ तो जिक्र करो, उनकी क़यामत बाहों का,
    जो सिमटते होंगें उनमे, वो तो मर जाते होंगे!