• तेरे बदलने के बावसफ भी तुझ को चाहा है;<br/>
यह एतराफ़ भी शामिल मेरे गुनाहों में है!
    तेरे बदलने के बावसफ भी तुझ को चाहा है;
    यह एतराफ़ भी शामिल मेरे गुनाहों में है!
    ~ Parveen Shakir
  • कदम-कदम पे नया इम्तहान रखती है;<br/>
जिंदगी तू भी मेरा कितना ध्यान रखती है!
    कदम-कदम पे नया इम्तहान रखती है;
    जिंदगी तू भी मेरा कितना ध्यान रखती है!
  • आज पी लेने दे साक़ी मुझे जी लेने दे;<br/>
कल मिरी रात ख़ुदा जाने कहाँ गुज़रेगी!
    आज पी लेने दे साक़ी मुझे जी लेने दे;
    कल मिरी रात ख़ुदा जाने कहाँ गुज़रेगी!
    ~ Wasim Barelvi
  • गिरी मिली इक बोतल शराब तो यूँ लगा मुझे;<br/>
जैसे बिखरा पडा था इक रात का सुकून किसी का ।
    गिरी मिली इक बोतल शराब तो यूँ लगा मुझे;
    जैसे बिखरा पडा था इक रात का सुकून किसी का ।
  • अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी;<br/>
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन!
    अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी;
    तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन!
    ~ Allama Iqbal
  • बारिश की तरह कोई बरसता रहे मुझ पर;<br/>
मिट्टी की तरह मैं भी महकती चली जाऊंगी!
    बारिश की तरह कोई बरसता रहे मुझ पर;
    मिट्टी की तरह मैं भी महकती चली जाऊंगी!
  • अब मुझे मानें न मानें ऐ 'हफ़ीज़';<BR/>
मानते हैं सब मिरे उस्ताद को !
    अब मुझे मानें न मानें ऐ 'हफ़ीज़';
    मानते हैं सब मिरे उस्ताद को !
    ~ Hafeez Jalandhari
  • अफ़ीमी आँखें, शर्बती गाल और शराबी होंठ;<BR/>
ख़ुदा ही जाने, नशे में हम हैं, या हम में नशा!
    अफ़ीमी आँखें, शर्बती गाल और शराबी होंठ;
    ख़ुदा ही जाने, नशे में हम हैं, या हम में नशा!
  • अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;<br/>
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!
    अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
    लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!
    ~ Allama Iqbal
  • उडती हुई अफवाहों के जवाब तो बहुत थे मेरे पास;<br/>
मगर खत्म हुए किस्सों की खामोशी ही बेहतर लगी!
    उडती हुई अफवाहों के जवाब तो बहुत थे मेरे पास;
    मगर खत्म हुए किस्सों की खामोशी ही बेहतर लगी!