• ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा,<br/>
मैं खुद तन्हा रहा मगर दिल को तन्हा नहीं रखा,<br/>
तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज़ रखे हैं,<br/>
तुम्हारी नफरतों की पीर को ज़िंदा नहीं रखा।
    ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा,
    मैं खुद तन्हा रहा मगर दिल को तन्हा नहीं रखा,
    तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज़ रखे हैं,
    तुम्हारी नफरतों की पीर को ज़िंदा नहीं रखा।
  • जिसकी आँखों में कटी थी सदियाँ,<br/>
उसने सदियों की जुदाई दी है।
    जिसकी आँखों में कटी थी सदियाँ,
    उसने सदियों की जुदाई दी है।
  • जुदा हुए हैं बहुत से लोग एक तुम भी सही,<br/>
अब इतनी सी बात पे क्या जिंदगी हैरान करें।
    जुदा हुए हैं बहुत से लोग एक तुम भी सही,
    अब इतनी सी बात पे क्या जिंदगी हैरान करें।
  • इक बार दिखाकर चले जाओ झलक अपनी;<br/>
हम जल्वा-ए-पैहम के तलबगार कहाँ है।<br/><br/>

जल्वा-ए-पैहम - लगातार दर्शन<br/>
तलबगार - ख्वाहिशमंद, मुश्ताक, अभिलाषी
    इक बार दिखाकर चले जाओ झलक अपनी;
    हम जल्वा-ए-पैहम के तलबगार कहाँ है।

    जल्वा-ए-पैहम - लगातार दर्शन
    तलबगार - ख्वाहिशमंद, मुश्ताक, अभिलाषी
  • दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ;<br/>
बाज़ार से ग़ुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ!
    दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ;
    बाज़ार से ग़ुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ!
    ~ Akbar Allahabadi
  • एक तुम हो कि वफा तुमसे न होगी, न हुई,<br/>
एक हम कि तकाजा न किया है, न करेंगे।
    एक तुम हो कि वफा तुमसे न होगी, न हुई,
    एक हम कि तकाजा न किया है, न करेंगे।
  • तुझ पे उठ्ठी हैं वो खोई हुयी साहिर आँखें;<br/>
तुझ को मालूम है क्यों उम्र गवाँ दी हमने!
    तुझ पे उठ्ठी हैं वो खोई हुयी साहिर आँखें;
    तुझ को मालूम है क्यों उम्र गवाँ दी हमने!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • हवस की बस्तियों में:

    हवस की बस्तियों में यूँ गुजारा कर लिया हमने,
    ज़मीर मार डाला खुद इशारा कर लिया हमने;

    मुझे शक है कि मंदिर में कभी भगवान रहते थे,
    बढ़ी हैवानियत से कब्जा सारा कर लिया हमने;

    दरिंदे नन्ही कलियों को कुचल कर फेंक देते हैं,
    ज़ालिम सल्तनत में हैं गंवारा कर लिया हमने;

    अगर हैं बागबां करता शिकायत कोई हाकिम से,
    तो उसको मार देते हैं नजारा कर लिया हमने;

    बढ़ो आगे जुबां खोलो अगर थोड़े भी जिंदा हो,
    कभी ये सोचना भी मत किनारा कर लिया हमने!
  • कलम की नोक पे कहानी रखी है;<br/>
मैंने इक ग़ज़ल तुम्हारे सानी रखी है;<br/>
इन आँखों को अब क्या कहें हम;<br/>
दो प्यालों में शराब पुरानी रखी है!
    कलम की नोक पे कहानी रखी है;
    मैंने इक ग़ज़ल तुम्हारे सानी रखी है;
    इन आँखों को अब क्या कहें हम;
    दो प्यालों में शराब पुरानी रखी है!
  • तेरे ग़म ने ही संभाला है दिल को;<br/>
वरना निकल गई हर हसरत होती;<br/>
मेरे दिल में अगर तेरी चाहत ना होती;<br/>
हर शख्स से मुझे फिर नफ़रत होती!
    तेरे ग़म ने ही संभाला है दिल को;
    वरना निकल गई हर हसरत होती;
    मेरे दिल में अगर तेरी चाहत ना होती;
    हर शख्स से मुझे फिर नफ़रत होती!