• राहत-ए-जाँ से तो:

    राहत-ए-जाँ से तो ये दिल का बवाल अच्छा है,
    उसने पूछा तो है इतना तेरा हाल अच्छा है;

    माह अच्छा है बहुत ही न ये साल अच्छा है,
    फिर भी हर एक से कहता हूँ कि हाल अच्छा है;

    तेरे आने से कोई होश रहे या न रहे,
    अब तलक तो तेरे बीमार का हाल अच्छा है;

    आओ फिर दिल के समंदर की तरफ़ लौट चलें;
    वही पानी, वही मछली, वही जाल अच्छा है;

    कोई दीनार न दिरहम न रियाल अच्छा है,
    जो ज़रूरत में हो मौजूद वो माल अच्छा है;

    क्यों परखते हो सवालों से जवाबों को,
    होंठ अच्छे हों तो समझो कि सवाल अच्छा है!
  • लुत्फ़-ए-कलाम क्या जो न हो दिल में दर्द-ए-इश्क;<br/>
बिस्मिल नहीं है तू तो तड़पना भी छोड़ दे!Upload to Facebook
    लुत्फ़-ए-कलाम क्या जो न हो दिल में दर्द-ए-इश्क;
    बिस्मिल नहीं है तू तो तड़पना भी छोड़ दे!
  • है आशिक़ी में रस्म, अलग सब से बैठना;<br/>
बुत ख़ाना भी, हरम भी, कलीसा भी छोड़ दे!Upload to Facebook
    है आशिक़ी में रस्म, अलग सब से बैठना;
    बुत ख़ाना भी, हरम भी, कलीसा भी छोड़ दे!
    ~ Allama Iqbal
  • अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;<br/>
लेकिन कभी-कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!<br/><br/>
पासबान-ए-अक़्ल: बुद्धी का निरीक्षक, Guardian of the mind, Intution Upload to Facebook
    अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
    लेकिन कभी-कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!

    पासबान-ए-अक़्ल: बुद्धी का निरीक्षक, Guardian of the mind, Intution
    ~ Allama Iqbal
  • ग़ुज़री तमाम उम्र उसी शहर में जहाँ;<br/>
वाक़िफ़ सभी थे पहचानता कोई न था!Upload to Facebook
    ग़ुज़री तमाम उम्र उसी शहर में जहाँ;
    वाक़िफ़ सभी थे पहचानता कोई न था!
  • अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;<br/>
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
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    अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;
    तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
    ~ Allama Iqbal
  • दिल से रुख़स्त हुई कोई ख़्वाहिश;<br/>
गिर्या कुछ बे-सबब नहीं आता!<br/><br/>
Rukhsat, रुख़स्त: Departing<br/>
Giryaa, गिर्या: Tears, Crying<br/>
Be-Sabab, बे-सबब: Without any causeUpload to Facebook
    दिल से रुख़स्त हुई कोई ख़्वाहिश;
    गिर्या कुछ बे-सबब नहीं आता!

    Rukhsat, रुख़स्त: Departing
    Giryaa, गिर्या: Tears, Crying
    Be-Sabab, बे-सबब: Without any cause
    ~ Meer Taqi Meer
  • महफ़िल में हँसना तो हमारा मिज़ाज़ बन गया,<br/>
तन्हाई में रोना एक राज़ बन गया;<br/>
दिल के दर्द को चेहरे से ज़ाहिर ना होने दिया,<br/>
यही ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ बन गया!Upload to Facebook
    महफ़िल में हँसना तो हमारा मिज़ाज़ बन गया,
    तन्हाई में रोना एक राज़ बन गया;
    दिल के दर्द को चेहरे से ज़ाहिर ना होने दिया,
    यही ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ बन गया!
  • जी में क्या-क्या है अपने ऐ हम-दम;<br/>
पर सुखन ता-बलब नहीं आता!Upload to Facebook
    जी में क्या-क्या है अपने ऐ हम-दम;
    पर सुखन ता-बलब नहीं आता!
    ~ Meer Taqi Meer
  • न ग़रज़ किसी से, न वास्ता, मुझे काम अपने ही काम से;<br/>
तिरे ज़िक्र से, तिरी फ़िक्र से, तिरी याद से तिरे नाम!Upload to Facebook
    न ग़रज़ किसी से, न वास्ता, मुझे काम अपने ही काम से;
    तिरे ज़िक्र से, तिरी फ़िक्र से, तिरी याद से तिरे नाम!