• अरबाबे-सितम की खिदमत में इतनी ही गुजारिश है मेरी;<br/>
दुनिया से कयामत दूर सही, दुनिया की कयामत दूर नहीं।<br/><br/>

Meaning:<br/>
अरबाबे-सितम  =  सितम ढाने वाला
    अरबाबे-सितम की खिदमत में इतनी ही गुजारिश है मेरी;
    दुनिया से कयामत दूर सही, दुनिया की कयामत दूर नहीं।

    Meaning:
    अरबाबे-सितम = सितम ढाने वाला
    ~ Jigar Moradabadi
  • मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू;<br/>
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना।
    मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू;
    मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना।
    ~ Munawwar Rana
  • गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो;<br/>
डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ।<br/><br/>

Meaning:<br/>
नाख़ुदा  =  नाविक
    गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो;
    डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ।

    Meaning:
    नाख़ुदा = नाविक
    ~ Kaifi Azmi
  • जादू है या तिलिस्म है तुम्हारी जुबान में;<br/><br/>
तुम झूठ कह रहे थे, मुझे ऐतबार था।<br/><br/>

Meaning:<br/>
तिलिस्म - माया, इंद्रजाल, जादू, दृष्टिबंध, नजरबंदी
    जादू है या तिलिस्म है तुम्हारी जुबान में;

    तुम झूठ कह रहे थे, मुझे ऐतबार था।

    Meaning:
    तिलिस्म - माया, इंद्रजाल, जादू, दृष्टिबंध, नजरबंदी
    ~ Bekhud Dehlvi
  • हमने भी कभी चाहा था एक ऐसे शख्स को;<br/>
जो था आइने से नाज़ुक मगर था संगदिल।
    हमने भी कभी चाहा था एक ऐसे शख्स को;
    जो था आइने से नाज़ुक मगर था संगदिल।
  • दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं;<br/>
लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते हैं।
    दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं;
    लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते हैं।
    ~ Qateel Shifai
  • प्यास दिल की बुझाने वो कभी आया भी नहीं;<br/>
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं;<br/>
बेरुखी इससे बड़ी और भला क्या होगी;<br/>
एक मुद्दत से हमें उसने सताया भी नहीं।
    प्यास दिल की बुझाने वो कभी आया भी नहीं;
    कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं;
    बेरुखी इससे बड़ी और भला क्या होगी;
    एक मुद्दत से हमें उसने सताया भी नहीं।
  • की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं;<br/>
होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं।
    की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं;
    होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं।
    ~ Mirza Ghalib
  • अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी;<br/>
तिरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर संभल न जाए।
    अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी;
    तिरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर संभल न जाए।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • समझ में साफ़ आ जाए फ़साहत इस को कहते हैं;<br/>
असर हो सुनने वाले पर बलाग़त इस को कहते हैं।<br/><br/>
Meaning:<br/>
फ़साहत  =  शुद्ध या अच्छी भाषा<br/>
बलाग़त  =  भाषण
    समझ में साफ़ आ जाए फ़साहत इस को कहते हैं;
    असर हो सुनने वाले पर बलाग़त इस को कहते हैं।

    Meaning:
    फ़साहत = शुद्ध या अच्छी भाषा
    बलाग़त = भाषण
    ~ Akbar Allahabadi