• आशिक़ था एक मेरे अंदर, कुछ साल पहले गुज़र गया;<br/>
अब कोई शायर सा है, अज़ीब-अज़ीब सी बातें करता है!
    आशिक़ था एक मेरे अंदर, कुछ साल पहले गुज़र गया;
    अब कोई शायर सा है, अज़ीब-अज़ीब सी बातें करता है!
  • क्या जाने किसी की प्यास बुझाने किधर गयीं;<br/>
उस सिर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गयीं!
    क्या जाने किसी की प्यास बुझाने किधर गयीं;
    उस सिर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गयीं!
    ~ Kaifi Azmi
  • उदास आँखों में अपनी करार देखा है,<br/>
पहली बार उसे बेक़रार देखा है;<br/>
जिसे खबर ना होती थी मेरे आने-जाने की,
उसकी आँखों में अब इंतज़ार देखा है!
    उदास आँखों में अपनी करार देखा है,
    पहली बार उसे बेक़रार देखा है;
    जिसे खबर ना होती थी मेरे आने-जाने की, उसकी आँखों में अब इंतज़ार देखा है!
  • रवा होते-होते एक दिन:

    रवा होते-होते एक दिन रवा हो जायेगी,
    यादें रह जायेंगीं, जिंदगी हवा हो जायेगी;

    परवान तो चढने दो, गम को उरूज तक,
    दर्द ही दर्द की, देखना, दवा हो जायेगी;

    तुम हर रोज मिलना मुझे, घुंघट में से झांकते,
    पुराने जमाने की, ये नयी अदा हो जायेगी;

    जरूरी है फांसले मोहब्बत की रस्मों-रिवाज में वरना,
    हमसे खता हो जायेगी या तुमसे खता हो जायेगी;

    खूबाँ को देखकर, कहते हैं, बस में ठसे हुए मर्द,
    दिल में जगाह चाहिए, बैठने को भी जगाह हो जायेगी।
  • मेरे फन को तराशा है सभी के नेक इरादों ने;<br/>
किसी की बेवफाई ने, किसी के झूठे वादों ने।
    मेरे फन को तराशा है सभी के नेक इरादों ने;
    किसी की बेवफाई ने, किसी के झूठे वादों ने।
  • गर मर जाए एहसास किसी की रूह से बेवक्त,<br/>
ज़िंदगी की तल्ख़ हक़ीक़त से आदमी रू-ब-रू होता है!
    गर मर जाए एहसास किसी की रूह से बेवक्त,
    ज़िंदगी की तल्ख़ हक़ीक़त से आदमी रू-ब-रू होता है!
  • कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,<br/>
दोनों जहान की सैरें, हासिल हैं सब यहीं से!<br/><br/>


सरजमीं  =  पृथ्वी, जमीन, देश, मुल्क
    कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,
    दोनों जहान की सैरें, हासिल हैं सब यहीं से!

    सरजमीं = पृथ्वी, जमीन, देश, मुल्क
    ~ Jigar Moradabadi
  • ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गयी तू;<br/>
मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे!
    ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गयी तू;
    मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • देखकर पलकें मेरी कहने लगा कोई फक़ीर,<br/>
इन पे बरख़ुरदार सपनों का वज़न कुछ कम करो!
    देखकर पलकें मेरी कहने लगा कोई फक़ीर,
    इन पे बरख़ुरदार सपनों का वज़न कुछ कम करो!
  • किसी के पास होने का जब हर वक़्त एहसास होता है;<br/>
यक़ीं मानों कि यहीं मोहब्बत का आगाज होता है!
    किसी के पास होने का जब हर वक़्त एहसास होता है;
    यक़ीं मानों कि यहीं मोहब्बत का आगाज होता है!