• जब भी उमड़े हैँ सैलाब तेरे तसव्वुर के,<br/>
मयख़ाना गवाह है कैसे हर जाम बेअसर हुआ है!
    जब भी उमड़े हैँ सैलाब तेरे तसव्वुर के,
    मयख़ाना गवाह है कैसे हर जाम बेअसर हुआ है!
  • वक्त-वक्त की बात है;<br/>
कल जो रंग थे, आज दाग हो गये।
    वक्त-वक्त की बात है;
    कल जो रंग थे, आज दाग हो गये।
  • तप्त हृदय को:

    तप्त हृदय को, सरस स्नेह से,
    जो सहला दे, मित्र वही है;

    रूखे मन को, सराबोर कर,
    जो नहला दे, मित्र वही है;

    प्रिय वियोग, संतप्त चित्त को,
    जो बहला दे, मित्र वही है;

    अश्रु बूँद की, एक झलक से,
    जो दहला दे, मित्र वही है।
  • यूँ ही नहीं ये सिरहाने, तेरी खुशबू से भर गए होंगे,<br/>

महके हुए कुछ ख़्वाब तेरे, मेरी आँखों से गिर गए होंगे!
    यूँ ही नहीं ये सिरहाने, तेरी खुशबू से भर गए होंगे,
    महके हुए कुछ ख़्वाब तेरे, मेरी आँखों से गिर गए होंगे!
  • ना तंग कर प्यार करने दे ऐ जिन्दगी;<br/>
तेरी कसम तुझसे भी हसींन है वो!
    ना तंग कर प्यार करने दे ऐ जिन्दगी;
    तेरी कसम तुझसे भी हसींन है वो!
  • शायद किसी लकीर में मिल जाऊं;<br/>
मुझे कुछ क़रीब से देखने दे हथेली तेरी!
    शायद किसी लकीर में मिल जाऊं;
    मुझे कुछ क़रीब से देखने दे हथेली तेरी!
  • आज से हम भी बदलेंगे अंदाज-ऐ-ज़िंदगी,<br/>

राब्ता सबसे होगा, वास्ता किसी से नही।
    आज से हम भी बदलेंगे अंदाज-ऐ-ज़िंदगी,
    राब्ता सबसे होगा, वास्ता किसी से नही।
  • जरुरी नहीं है कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाए;<br/>
अंदाज बदल कर बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है!
    जरुरी नहीं है कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाए;
    अंदाज बदल कर बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है!
  • लफ़्ज़ों के बोझ से थक जाती हैं, ज़ुबान कभी कभी;<br/>
पता नहीं 'खामोशी मज़बूरी हैं या समझदारी!
    लफ़्ज़ों के बोझ से थक जाती हैं, ज़ुबान कभी कभी;
    पता नहीं 'खामोशी मज़बूरी हैं या समझदारी!
  • कोई प्यार से जरा सी फुंक मार दे तो बुझ जाऊं;<br/>
नफरत से तो तुफान भी हार गए मुझे बुझाने में!
    कोई प्यार से जरा सी फुंक मार दे तो बुझ जाऊं;
    नफरत से तो तुफान भी हार गए मुझे बुझाने में!