• ना जाने जिंदगी का, ये कैसा दौर है,<br/>
इंसान खामोश है, और ऑनलाइन कितना शोर है।
    ना जाने जिंदगी का, ये कैसा दौर है,
    इंसान खामोश है, और ऑनलाइन कितना शोर है।
  • मेह वो क्यों बहुत पीते बज़्म-ऐ-ग़ैर में या रब;<BR/>
आज ही हुआ मंज़ूर उन को इम्तिहान अपना,<BR/>
मँज़र इक बुलंदी पर और हम बना सकते `ग़ालिब`;<BR/>
अर्श से इधर होता काश के माकन अपना!
    मेह वो क्यों बहुत पीते बज़्म-ऐ-ग़ैर में या रब;
    आज ही हुआ मंज़ूर उन को इम्तिहान अपना,
    मँज़र इक बुलंदी पर और हम बना सकते `ग़ालिब`;
    अर्श से इधर होता काश के माकन अपना!
  • थोड़ा सा बचपन साथ रखियेगा जिंदगी की शाम में,<br/>
उम्र महसूस ही न होगी, सफ़र के आखरी मुकाम में!
    थोड़ा सा बचपन साथ रखियेगा जिंदगी की शाम में,
    उम्र महसूस ही न होगी, सफ़र के आखरी मुकाम में!
  • शर्मिंदा होंगे, जाने भी दो इम्तिहान को;<br/>
रखेगा तुम को कौन अज़ीज़, अपनी जान से!
    शर्मिंदा होंगे, जाने भी दो इम्तिहान को;
    रखेगा तुम को कौन अज़ीज़, अपनी जान से!
    ~ Mir Taqi Mir
  • किमतें गिर गई मोहब्बत की,<br/>
चलो कोई दूसरा कारोबार करते है!
    किमतें गिर गई मोहब्बत की,
    चलो कोई दूसरा कारोबार करते है!
  • खुदा तो इक तरफ, खुद से भी कोसों दूर होता है,<br/>
बशर जिस वक्त ताकत के नशे में चूर होता है!<br/><br/>

बशर - मानव
    खुदा तो इक तरफ, खुद से भी कोसों दूर होता है,
    बशर जिस वक्त ताकत के नशे में चूर होता है!

    बशर - मानव
  • जुबाँ न भी बोले तो, मुश्किल नहीं;<br/>
फिक्र तब होती है जब, खामोशी भी बोलना छोड़ दें|
    जुबाँ न भी बोले तो, मुश्किल नहीं;
    फिक्र तब होती है जब, खामोशी भी बोलना छोड़ दें|
  • चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत;<br/>
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
    चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत;
    बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
    ~ Mirza Ghalib
  • गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई,<br/>
परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए!
    गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई,
    परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए!
  • ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें;<br/>
चादर बड़ी करें या, ख़्वाहिशे दफ़न करे!
    ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें;
    चादर बड़ी करें या, ख़्वाहिशे दफ़न करे!