• दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;<br/>
ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!Upload to Facebook
    दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;
    ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!
  • पसंद आ गए हैं कुछ लोगों को हम;<br/>
कुछ लोगों को ये बात पसंद नहीं आयी।Upload to Facebook
    पसंद आ गए हैं कुछ लोगों को हम;
    कुछ लोगों को ये बात पसंद नहीं आयी।
  • दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में;<br/>
इक आइना था टूट गया देख-भाल में!
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    दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में;
    इक आइना था टूट गया देख-भाल में!
    ~ Seemab Akbarabadi
  • अगर नए रिश्ते न बनें तो, मलाल मत करना;<br/>
पुराने टूट ना जायें बस, इतना ख्याल रखना।Upload to Facebook
    अगर नए रिश्ते न बनें तो, मलाल मत करना;
    पुराने टूट ना जायें बस, इतना ख्याल रखना।
  • दिल दिया जिस ने किसी को वो हुआ साहेब-ए-दिल;<br/>
हाथ आ जाती है खो देने से दौलत दिल की!
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    दिल दिया जिस ने किसी को वो हुआ साहेब-ए-दिल;
    हाथ आ जाती है खो देने से दौलत दिल की!
    ~ Aasi Ghazipuri
  • बहुत दिनों के बाद उसका कोरा कागज़ आया;<br/>
शायर हूँ साहब, लिखी हुई खामोशी पढ़ ली मैंने!Upload to Facebook
    बहुत दिनों के बाद उसका कोरा कागज़ आया;
    शायर हूँ साहब, लिखी हुई खामोशी पढ़ ली मैंने!
  • हर एक चश्म में जैसे कि एक जहां गुम है,
    हर एक दिल में लगे एक दास्तां गुम है;

    कहीं तलाश फ़लक की दिखे है सतह-ज़मीं,
    कहीं लगे कि ज़मीं से एक आस्मां गुम है;

    कहीं मलाल चमन को कि उड़ गए पंछी,
    कहीं गुलों को शिकायत कि बाग़बां गुम हैं;

    रखेगी याद ये दुनिया यहाँ बस इतना ही,
    वहाँ वो कितना मुक़म्मल है, जो जहाँ गुम है;

    बढ़ा हुआ सा लगे दायरा ये खोने का,
    यह न पूछ किसी से कि वो कहाँ गुम है।
  • नसीम-ए-सुबह बू-ए-गुल से क्या इतराती फिरती है,<br/>
जरा सूंघ-ए-शमीम-ए-जुल्फ खुश्बू इसको कहते हैं।<br/><br/>

1. नसीम-ए-सुबह - सुबह चलने वाली ठंडी और धीमी हवा<br/>
2. शमीम - सुगन्ध, खुश्बू, महकUpload to Facebook
    नसीम-ए-सुबह बू-ए-गुल से क्या इतराती फिरती है,
    जरा सूंघ-ए-शमीम-ए-जुल्फ खुश्बू इसको कहते हैं।

    1. नसीम-ए-सुबह - सुबह चलने वाली ठंडी और धीमी हवा
    2. शमीम - सुगन्ध, खुश्बू, महक
    ~ Anwar Allahabadi
  • मज़हब, दौलत, ज़ात, घराना, सरहद, ग़ैरत, खुद्दारी;<br/>
एक मोहब्बत की चादर को, कितने चूहे कुतर गए।Upload to Facebook
    मज़हब, दौलत, ज़ात, घराना, सरहद, ग़ैरत, खुद्दारी;
    एक मोहब्बत की चादर को, कितने चूहे कुतर गए।
  • गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;<br/>
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।Upload to Facebook
    गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;
    यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।