• शाम-ए-ग़म कुछ उस निग़ाह-ए-नाज़ की बातें करो;<br/>
बेखुदी बढ़ती चली है, राज़ की बातें करो!Upload to Facebook
    शाम-ए-ग़म कुछ उस निग़ाह-ए-नाज़ की बातें करो;
    बेखुदी बढ़ती चली है, राज़ की बातें करो!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त;<br/>
आह अब मुझ से तेरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं!Upload to Facebook
    मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त;
    आह अब मुझ से तेरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • बहुत शौक था मुझे सबको जोडकर रखने का,<br/>
होश तब आया जब खुद के वजूद के टुकडे हो गये।Upload to Facebook
    बहुत शौक था मुझे सबको जोडकर रखने का,
    होश तब आया जब खुद के वजूद के टुकडे हो गये।
  • आगे आती थी हाल-ए-दिल पर हंसी;<br/>
अब किसी बात पर नहीं आती!

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    आगे आती थी हाल-ए-दिल पर हंसी;
    अब किसी बात पर नहीं आती!
    ~ Mirza Ghalib
  • कुछ सोच के इक राह-ए-पुर-ख़ार से गुज़रा था;<br/>
काँटे भी न रास आए दामन भी न काम आया! 
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    कुछ सोच के इक राह-ए-पुर-ख़ार से गुज़रा था;
    काँटे भी न रास आए दामन भी न काम आया!
    ~ Nushur Wahidi
  • मुझको एक बार:

    मुझको एक बार आजमाते तो सही,
    वो मेरी बज़्म में आते तो सही;

    मैंने रखा था सर-ए-शाम से घर को सजाकर,
    तुम न रुकते एक पल को आते तो सही;

    आपकी खातिर आपकी खुशियों की खातिर,
    खुद भी हो जाता नीलाम, बताते तो सही;

    यकीनन आपके हिस्से में रोशनी होती,
    शम्म-ए-वफ़ा दिल में एक बार जलाते तो सही;

    मैं भी इंसान हूँ पत्थर नहीं, क्यूँ ठुकराया,
    खुद हो जाता टुकड़े-टुकड़े बताते तो सही!
  • है रश्क-ए-इरम वादी-ए-पुर-ख़ार-ए-मोहब्बत;<br/>
शायद उसे सींचा है किसी आबला-पा ने!Upload to Facebook
    है रश्क-ए-इरम वादी-ए-पुर-ख़ार-ए-मोहब्बत;
    शायद उसे सींचा है किसी आबला-पा ने!
    ~ Iqbal Suhail
  • आह को चाहिये इक उम्र असर होने तक;<br/>
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक!Upload to Facebook
    आह को चाहिये इक उम्र असर होने तक;
    कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक!
    ~ Mirza Ghalib
  • इबादतखानो में क्या ढूंढते हो मुझे;<br/>
मैं वहाँ भी हूँ, जहाँ तुम गुनाह करते हो!Upload to Facebook
    इबादतखानो में क्या ढूंढते हो मुझे;
    मैं वहाँ भी हूँ, जहाँ तुम गुनाह करते हो!
  • मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़्सूस होते हैं;<br/>
ये वो नग़्मा है जो हर साज़ पर गाया नहीं जाता!Upload to Facebook
    मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़्सूस होते हैं;
    ये वो नग़्मा है जो हर साज़ पर गाया नहीं जाता!
    ~ Makhmoor Dehlvi