• जिस दिल को सौंपा था मोड़ भी आया उसे;<br/>
वो चाहता था छोड़ना मैं छोड़ भी आया उसे;<br/>
अब के ताल्लुक ना रखेगा वो कोई मुझसे;<br/>
मैं दोनों हाथों को अब जोड़ भी आया उसे!
    जिस दिल को सौंपा था मोड़ भी आया उसे;
    वो चाहता था छोड़ना मैं छोड़ भी आया उसे;
    अब के ताल्लुक ना रखेगा वो कोई मुझसे;
    मैं दोनों हाथों को अब जोड़ भी आया उसे!
  • ले जा के हमें साँकी जहाँ शाम ढले;<br/>
कर जन्नत नसीब खुदा जहाँ जाम चले!
    ले जा के हमें साँकी जहाँ शाम ढले;
    कर जन्नत नसीब खुदा जहाँ जाम चले!
  • इश्क जाने ये  कैसा  मौसम ले आया है;<br/>
के ग़म की बरसात में दोनों भीग रहे!
    इश्क जाने ये कैसा मौसम ले आया है;
    के ग़म की बरसात में दोनों भीग रहे!
  • उभर फिर पुराना इक ग़म आ गया है;<br/>
आँखों में बरसात का मौसम आ गया है!
    उभर फिर पुराना इक ग़म आ गया है;
    आँखों में बरसात का मौसम आ गया है!
  • जाँ-ब-लब ठहरी अब तो प्यारे मेरे;<br/>
तेरी इन निगाहों ने होश सँभाले मेरे;<br/>
हर शाम को होती हैं यही खवाहिशें;<br/>
आ बैठोगे तुम दिल के किनारे मेरे!
    जाँ-ब-लब ठहरी अब तो प्यारे मेरे;
    तेरी इन निगाहों ने होश सँभाले मेरे;
    हर शाम को होती हैं यही खवाहिशें;
    आ बैठोगे तुम दिल के किनारे मेरे!
  • हिज्र के साहिल पे था जो इश्क का आशियाना;<br/>
ग़म की बरसात में नदीम इक रोज़ ढह गया!
    हिज्र के साहिल पे था जो इश्क का आशियाना;
    ग़म की बरसात में नदीम इक रोज़ ढह गया!
  • इन आँखों में सूरत तेरी सुहानी है;<br/>
मोम सी पिघल रही मेरी जवानी है;<br/>
जिस शिद्दत से सितम हुए थे हम पर;<br/>
मर जाना चाहिए था, जिंदा हैं, हैरानी है!
    इन आँखों में सूरत तेरी सुहानी है;
    मोम सी पिघल रही मेरी जवानी है;
    जिस शिद्दत से सितम हुए थे हम पर;
    मर जाना चाहिए था, जिंदा हैं, हैरानी है!
  • बरसात में जो ग़म भीग जाते हैं;<br/>
मैं धूप में उन्हें सुखाता रहता हूँ!
    बरसात में जो ग़म भीग जाते हैं;
    मैं धूप में उन्हें सुखाता रहता हूँ!
  • थक गया मेरा पुर्जा-पुर्जा तकलीफों से निकलने में;<br/>
हार मानने का दिल नहीं करता और जीत नजर नहीं आती!
    थक गया मेरा पुर्जा-पुर्जा तकलीफों से निकलने में;
    हार मानने का दिल नहीं करता और जीत नजर नहीं आती!
  • मोहब्बत के आँसू को यूँ बहाया नहीं जाता;<br/>
इस मोती को पागल यूँ गंवाया नहीं जाता;<br/>
लिए हैं बोसे मैंने लब-ए-जाना के जब से;<br/>
ऐसे - वैसों से मुंह अब लगाया नहीं जाता!
    मोहब्बत के आँसू को यूँ बहाया नहीं जाता;
    इस मोती को पागल यूँ गंवाया नहीं जाता;
    लिए हैं बोसे मैंने लब-ए-जाना के जब से;
    ऐसे - वैसों से मुंह अब लगाया नहीं जाता!