• ख्वाहिशें हैं कि तेरे दिल मे उतर जाऊं,
    मुद्दतों बाद मैं हद से गुज़र जाऊं;

    कतारों में हैं मेरे कई चाहने वाले,
    तुम कहो तो मैं सब से मुकर जाऊं;

    तुम परेशान हो शायद मेरी हरकतों से,
    सोचता हूँ कि अब मैं सुधर जाऊं;

    जब भी तुम फूलों सा महकती हो,
    दिल करता है कि तुम्हे कुतर जाऊं;

    बहूत महीन हो गया है मेरा मुकद्दर,
    काश मैं फिर से उभर जाऊं।
  • नजर अदांज करने की कुछ तो वजह बताई होती;<br/>
अब मैं कहाँ-कहाँ खुद में बुराई खोज सकता हूँ।
    नजर अदांज करने की कुछ तो वजह बताई होती;
    अब मैं कहाँ-कहाँ खुद में बुराई खोज सकता हूँ।
  • अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,<br/>
गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।<br/><br/>

1. आस्ताँ - चौखट, दहलीज, ड्योढ़ी
    अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,
    गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।

    1. आस्ताँ - चौखट, दहलीज, ड्योढ़ी
    ~ Jaleel Manikpuri
  • ये जो तुम ने खुद को बदला है;<br/>
ये बदला है, या बदला है।
    ये जो तुम ने खुद को बदला है;
    ये बदला है, या बदला है।
  • मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया,<br/>
तुम क्यों उदास हो गए तुम्हें क्या याद आ गया;<br/>
कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख़्तसर मगर,<br/>
कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया।
    मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया,
    तुम क्यों उदास हो गए तुम्हें क्या याद आ गया;
    कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख़्तसर मगर,
    कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया।
  • अब उतर आये हैं वह तारीफ पर,<br/>
हम जो आदी हो गये दुश्नाम के।
    अब उतर आये हैं वह तारीफ पर,
    हम जो आदी हो गये दुश्नाम के।
    ~ Daagh Dehlvi
  • मुकम्मल ना सही अधूरा ही रहने दो;<br/>
ये इश्क़ है कोई मक़सद तो नहीं।
    मुकम्मल ना सही अधूरा ही रहने दो;
    ये इश्क़ है कोई मक़सद तो नहीं।
  • चलते थे इस जहाँ में कभी सीना तान के हम भी;<br/>
ये कम्बख्त इश्क़ क्या हुआ घुटनो पे आ गए।
    चलते थे इस जहाँ में कभी सीना तान के हम भी;
    ये कम्बख्त इश्क़ क्या हुआ घुटनो पे आ गए।
  • अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;<br/>
मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।<br/><br/>

1. अजल - मृत्यु<br/>
2. सोगवारों - शोक करने वालों
    अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;
    मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।

    1. अजल - मृत्यु
    2. सोगवारों - शोक करने वालों
    ~ Daagh Dehlvi
  • हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी,
    फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी;

    सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ,
    अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी;

    हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते,
    हर तरफ आदमी का शिकार आदमी;

    रोज जीता हुआ रोज मरता हुआ,
    हर नए दिन नया इंतज़ार आदमी;

    ज़िंदगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र,
    आखिरी सांस तक बेक़रार आदमी!
    ~ Nida Fazli