• स्वयं से दूर हो तुम भी, स्वयं से दूर हैं हम भी,<br/>
बहुत मशहूर हो तुम भी, बहुत मशहूर हैं हम भी;<br/>
बड़े मगरूर हो तुम भी, बड़े मगरूर हैं हम भी,<br/>
अत: मज़बूर हो तुम भी, अत: मज़बूर हैं हम भी!
    स्वयं से दूर हो तुम भी, स्वयं से दूर हैं हम भी,
    बहुत मशहूर हो तुम भी, बहुत मशहूर हैं हम भी;
    बड़े मगरूर हो तुम भी, बड़े मगरूर हैं हम भी,
    अत: मज़बूर हो तुम भी, अत: मज़बूर हैं हम भी!
    ~ Kumar Vishwas
  • अल्फाज़ अकसर अधूरे ही रह जाते हैं मोहब्बत में;<br/>
हर शख़्स किसी ना किसी की चाहत दिल में दबाये रखता है!
    अल्फाज़ अकसर अधूरे ही रह जाते हैं मोहब्बत में;
    हर शख़्स किसी ना किसी की चाहत दिल में दबाये रखता है!
  • इक जहाँ है जिसका मुश्ताक-ए-जमाल;<br/>
सख्त हैरत है, वह क्यों रूपोश है!
    इक जहाँ है जिसका मुश्ताक-ए-जमाल;
    सख्त हैरत है, वह क्यों रूपोश है!
    ~ Hasrat Mohani
  • तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगह;<br/>
आप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं!<br/><br/>
Meaning:<br/>
तेग़-बाज़ी  =  तलवार बाज़ी, तलवार चलाना
    तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगह;
    आप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं!

    Meaning:
    तेग़-बाज़ी = तलवार बाज़ी, तलवार चलाना
    ~ Jon Elia
  • झट से बदल दूं, इतनी न हैसियत न आदत है मेरी;<br/>
रिश्ते हों या लिबास, मैं बरसों चलाता हूँ!
    झट से बदल दूं, इतनी न हैसियत न आदत है मेरी;
    रिश्ते हों या लिबास, मैं बरसों चलाता हूँ!
  • खुदा के घर से चंद फरिश्ते फरार हो गये;<br/>
कुछ पकड़े गये कुछ हमारे यार हो गये!
    खुदा के घर से चंद फरिश्ते फरार हो गये;
    कुछ पकड़े गये कुछ हमारे यार हो गये!
  • हाथ मिलाओ इस क़दर के दिल में हज़ारों मशालें जल जाएँ;<br/>
किसी मुफ़लिस का घर तुम्हारे कर्मों रोशन हो जाए!
    हाथ मिलाओ इस क़दर के दिल में हज़ारों मशालें जल जाएँ;
    किसी मुफ़लिस का घर तुम्हारे कर्मों रोशन हो जाए!
  • ज़िंदगी निकली मुसलसल इम्तिहाँ-दर-इम्तिहाँ;<br/>
ज़िंदगी को दास्ताँ ही दास्ताँ समझा था मैं!<br/><br/>
Meaning:<br/><br/>

मुसलसल  -  लगातार, निरंतर
    ज़िंदगी निकली मुसलसल इम्तिहाँ-दर-इम्तिहाँ;
    ज़िंदगी को दास्ताँ ही दास्ताँ समझा था मैं!

    Meaning:

    मुसलसल - लगातार, निरंतर
    ~ Jigar Moradabadi
  • सैर-ए-साहिल कर चुके ऐ मौज-ए-साहिल सिर ना मार;<br/>
तुझ से क्या बहलेंगे तूफानों के बहलाए हुए!
    सैर-ए-साहिल कर चुके ऐ मौज-ए-साहिल सिर ना मार;
    तुझ से क्या बहलेंगे तूफानों के बहलाए हुए!
    ~ Majrooh Sultanpuri
  • याद उसकी अभी भी आती है;<br/>
बुरी आदत है कहाँ जाती है।
    याद उसकी अभी भी आती है;
    बुरी आदत है कहाँ जाती है।