• आज से हम भी बदलेंगे अंदाज-ऐ-ज़िंदगी,<br/>

राब्ता सबसे होगा, वास्ता किसी से नही।
    आज से हम भी बदलेंगे अंदाज-ऐ-ज़िंदगी,
    राब्ता सबसे होगा, वास्ता किसी से नही।
  • जरुरी नहीं है कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाए;<br/>
अंदाज बदल कर बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है!
    जरुरी नहीं है कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाए;
    अंदाज बदल कर बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है!
  • लफ़्ज़ों के बोझ से थक जाती हैं, ज़ुबान कभी कभी;<br/>
पता नहीं 'खामोशी मज़बूरी हैं या समझदारी!
    लफ़्ज़ों के बोझ से थक जाती हैं, ज़ुबान कभी कभी;
    पता नहीं 'खामोशी मज़बूरी हैं या समझदारी!
  • कोई प्यार से जरा सी फुंक मार दे तो बुझ जाऊं;<br/>
नफरत से तो तुफान भी हार गए मुझे बुझाने में!
    कोई प्यार से जरा सी फुंक मार दे तो बुझ जाऊं;
    नफरत से तो तुफान भी हार गए मुझे बुझाने में!
  • वो शायद मतलब से मिलते है;<br/>
मुझे तो मिलने से मतलब है!
    वो शायद मतलब से मिलते है;
    मुझे तो मिलने से मतलब है!
  • ऐसे माहौल में दवा क्या है दुआ क्या है;<BR/>
जहां कातिल ही खुद पूछे कि हुआ क्या है!
    ऐसे माहौल में दवा क्या है दुआ क्या है;
    जहां कातिल ही खुद पूछे कि हुआ क्या है!
  • जिंदगी खेलती उसी से है;<BR/>
जो अच्छा खिलाड़ी होता है!
    जिंदगी खेलती उसी से है;
    जो अच्छा खिलाड़ी होता है!
  • हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते;<br/>
हर तकलीफ़ में ताक़त की दवा देते हैं।
    हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते;
    हर तकलीफ़ में ताक़त की दवा देते हैं।
  • रिश्ते बनाना इतना आसान जैसे,<br/>
'मिट्टी' पर 'मिट्टी' से  `मिट्टी`  लिखना;<br/>
लेकिन रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल जैसे,<br/>
'पानी' पर 'पानी' से  `पानी`  लिखना!
    रिश्ते बनाना इतना आसान जैसे,
    'मिट्टी' पर 'मिट्टी' से "मिट्टी" लिखना;
    लेकिन रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल जैसे,
    'पानी' पर 'पानी' से "पानी" लिखना!
  • ये जो जिंदगी की किताब है;<br/>
ये किताब भी क्या किताब है;<br/>
इंसान जिल्द संवारने में व्यस्त है;<br/>
और पन्ने बिखरने को बेताब हैं!
    ये जो जिंदगी की किताब है;
    ये किताब भी क्या किताब है;
    इंसान जिल्द संवारने में व्यस्त है;
    और पन्ने बिखरने को बेताब हैं!