• अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;<br/>
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
    अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;
    तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
    ~ Allama Iqbal
  • दिल से रुख़स्त हुई कोई ख़्वाहिश;<br/>
गिर्या कुछ बे-सबब नहीं आता!<br/><br/>
Rukhsat, रुख़स्त: Departing<br/>
Giryaa, गिर्या: Tears, Crying<br/>
Be-Sabab, बे-सबब: Without any cause
    दिल से रुख़स्त हुई कोई ख़्वाहिश;
    गिर्या कुछ बे-सबब नहीं आता!

    Rukhsat, रुख़स्त: Departing
    Giryaa, गिर्या: Tears, Crying
    Be-Sabab, बे-सबब: Without any cause
    ~ Meer Taqi Meer
  • महफ़िल में हँसना तो हमारा मिज़ाज़ बन गया,<br/>
तन्हाई में रोना एक राज़ बन गया;<br/>
दिल के दर्द को चेहरे से ज़ाहिर ना होने दिया,<br/>
यही ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ बन गया!
    महफ़िल में हँसना तो हमारा मिज़ाज़ बन गया,
    तन्हाई में रोना एक राज़ बन गया;
    दिल के दर्द को चेहरे से ज़ाहिर ना होने दिया,
    यही ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ बन गया!
  • जी में क्या-क्या है अपने ऐ हम-दम;<br/>
पर सुखन ता-बलब नहीं आता!
    जी में क्या-क्या है अपने ऐ हम-दम;
    पर सुखन ता-बलब नहीं आता!
    ~ Meer Taqi Meer
  • न ग़रज़ किसी से, न वास्ता, मुझे काम अपने ही काम से;<br/>
तिरे ज़िक्र से, तिरी फ़िक्र से, तिरी याद से तिरे नाम!
    न ग़रज़ किसी से, न वास्ता, मुझे काम अपने ही काम से;
    तिरे ज़िक्र से, तिरी फ़िक्र से, तिरी याद से तिरे नाम!
  • गुनाहगार के दिल से न बच के चल ज़ाहिद;<br/>
यहीं कहीं तिरी जन्नत भी पाई जाती है!<br/><br/>

ज़ाहिद  =  धार्मिक व्यक्ति
    गुनाहगार के दिल से न बच के चल ज़ाहिद;
    यहीं कहीं तिरी जन्नत भी पाई जाती है!

    ज़ाहिद = धार्मिक व्यक्ति
    ~ Jigar Moradabadi
  • दर पे रहने को कहा और कह के कैसा फिर गया;<br/>
जितने अर्से में मेरा लिपटा हुआ बिस्तर खुला!
    दर पे रहने को कहा और कह के कैसा फिर गया;
    जितने अर्से में मेरा लिपटा हुआ बिस्तर खुला!
    ~ Mirza Ghalib
  • चलो बाँट लेते हैं अपनी सज़ायें;<br/>
न तुम याद आओ न हम याद आयें!
    चलो बाँट लेते हैं अपनी सज़ायें;
    न तुम याद आओ न हम याद आयें!
    ~ Sardar Anjum
  • हम अपने दिल के मुकामात से हैं बेगाने;<br/>
इसी में वरना हरम है, इसी में बुतखाने!<br/><br/>

मुकामात = स्थान, घर;<br/>
बेगाना = अपरिचित, अनजान;<br/>
हरम  = काबा, खुदा का घर;<br/>  
बुतखाना - मंदिर, मूर्तिगृह
    हम अपने दिल के मुकामात से हैं बेगाने;
    इसी में वरना हरम है, इसी में बुतखाने!

    मुकामात = स्थान, घर;
    बेगाना = अपरिचित, अनजान;
    हरम = काबा, खुदा का घर;
    बुतखाना - मंदिर, मूर्तिगृह
    ~ Shad Azeembadi
  • दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं;<br/>
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं!
    दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं;
    कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं!