• तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँ उभरती है;<br/>
कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ।<br/><br/>

रुस्वा  =  बदनाम
    तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँ उभरती है;
    कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ।

    रुस्वा = बदनाम
    ~ Jaan Nisar Akhtar
  • आँखें शराब:

    आँखें शराब खाना,
    दिल हो गया दीवाना;

    नजरों के तीर खा कर,
    घायल हुआ जमाना;

    भटकेंगी ये तो दर-दर,
    नजरों का क्या ठिकाना;

    नजरों की कदर करना,
    नजरों से ना गिराना;

    नज़रों की आब, इज्जत,
    इस को सदा बढ़ाना;

    शर्म-ओ-हया का जेवर,
    नज़रों का है खज़ाना;

    नज़रों के दायरे में,
    गैरों को ना बसाना;

    नज़रों में बंद रखना,
    तुम राज-ए-दिल छुपाना!
  • फलक देता है जिसको ऐश उसको गम भी देता है;<br/>
जहाँ बजते हैं नक्कारे, वहीं मातम भी होते हैं।<br/><br/>

फलक - आकाश, आसमान, अर्
    फलक देता है जिसको ऐश उसको गम भी देता है;
    जहाँ बजते हैं नक्कारे, वहीं मातम भी होते हैं।

    फलक - आकाश, आसमान, अर्
    ~ Daagh Dehlvi
  • वो शायर होते हैं जो शायरी करते हैं;<br/>
हम तो बदनाम से लोग हैं, बस दर्द लिखते हैं।
    वो शायर होते हैं जो शायरी करते हैं;
    हम तो बदनाम से लोग हैं, बस दर्द लिखते हैं।
  • क्या बेचकर हम खरीदें फुर्सत-ए-जिंदगी;<br/>
सब कुछ तो गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में।
    क्या बेचकर हम खरीदें फुर्सत-ए-जिंदगी;
    सब कुछ तो गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में।
  • हम भी दरिया हैं हमें, अपना हुनर मालूम है;<br/>
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा।
    हम भी दरिया हैं हमें, अपना हुनर मालूम है;
    जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा।
    ~ Bashir Badr
  • मैं भी ठहरूँ किसी के होंठों पे;<br/>
काश कोई मेरे लिए भी दुआ कर दे!
    मैं भी ठहरूँ किसी के होंठों पे;
    काश कोई मेरे लिए भी दुआ कर दे!
  • कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से;<br/>
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।
    कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से;
    ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।
    ~ Bashir Badr
  • एक सुकून की तालाश में, ना जाने कितनी बेचैनियाँ पाल ली;<br/>
और लोग कहते हैं, हम बड़े हो गये और ज़िन्दगी संभाल ली।
    एक सुकून की तालाश में, ना जाने कितनी बेचैनियाँ पाल ली;
    और लोग कहते हैं, हम बड़े हो गये और ज़िन्दगी संभाल ली।
  • खामोश लबों से निभाना था ये रिश्ता;<br/>
पर धड़कनों ने चाहत का शोर मचा दिया।
    खामोश लबों से निभाना था ये रिश्ता;
    पर धड़कनों ने चाहत का शोर मचा दिया।