• बरस पड़ी थी जो रुख़ से नक़ाब उठाने में;<br/>
वो चाँदनी है अभी तक मेरे ग़रीब-ख़ाने में|
    बरस पड़ी थी जो रुख़ से नक़ाब उठाने में;
    वो चाँदनी है अभी तक मेरे ग़रीब-ख़ाने में|
    ~ Kaifi Azmi
  • सितारों से आगे जहां और भी हैं;<br/>
अभी इश्क के इम्तिहां और भी हैं।
    सितारों से आगे जहां और भी हैं;
    अभी इश्क के इम्तिहां और भी हैं।
    ~ Allama Iqbal
  • मयखाने की इज्जत का सवाल था जनाब;<br/>
पास से गुजरे तो थोडा लडख़ड़ा दिए!
    मयखाने की इज्जत का सवाल था जनाब;
    पास से गुजरे तो थोडा लडख़ड़ा दिए!
  • चालाकी कहाँ मिलती है, मुझे भी बता दो दोस्तों;<br/>
हर कोई ठग ले जाता है, जरा सा मीठा बोल कर!
    चालाकी कहाँ मिलती है, मुझे भी बता दो दोस्तों;
    हर कोई ठग ले जाता है, जरा सा मीठा बोल कर!
  • मेरे क़त्ल की कोशिश तो उनकी निगाहों ने की थी;<br/>
पर अदालत ने उन्हें हथियार मानने से इनकार कर दिया!
    मेरे क़त्ल की कोशिश तो उनकी निगाहों ने की थी;
    पर अदालत ने उन्हें हथियार मानने से इनकार कर दिया!
  • आज जिस्म में जान है तो देखते नही हैं लोग;<br/>
जब रूह निकल जाएगी तो कफन हटा हटा कर देखेंगे लोग!
    आज जिस्म में जान है तो देखते नही हैं लोग;
    जब रूह निकल जाएगी तो कफन हटा हटा कर देखेंगे लोग!
  • कोई सुलह करा दे जिदंगी की उलझनों से;<br/>
बड़ी तलब लगी है आज मुस्कुराने की!
    कोई सुलह करा दे जिदंगी की उलझनों से;
    बड़ी तलब लगी है आज मुस्कुराने की!
  • बचा लिया मुझे तूफां की मौज ने वर्ना;<br/>
किनारे वाले सफीना मेरा डुबो देते।<br/><br/>
अर्थ:<br/>
सफीना - नाव
    बचा लिया मुझे तूफां की मौज ने वर्ना;
    किनारे वाले सफीना मेरा डुबो देते।

    अर्थ:
    सफीना - नाव
    ~ Majrooh Sultanpuri
  • अब उसे रोज़ न सोचूँ तो बदन टूटता है फ़राज़;<br/>
उमर गुजरी है उस की याद का नशा किये हुए।
    अब उसे रोज़ न सोचूँ तो बदन टूटता है फ़राज़;
    उमर गुजरी है उस की याद का नशा किये हुए।
    ~ Ahmad Faraz
  • हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम;<br/>
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
    हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम;
    वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
    ~ Akbar Allahabadi