• मुझे कुछ अफ़सोस नहीं कि मेरे पास सब कुछ होना चाहिए था;<br/>
मैं उस वक़्त भी मुस्कुराता था जब मुझे रोना चाहिए था।
    मुझे कुछ अफ़सोस नहीं कि मेरे पास सब कुछ होना चाहिए था;
    मैं उस वक़्त भी मुस्कुराता था जब मुझे रोना चाहिए था।
  • जिसको दिल में बसाया हमने वो दूर हमसे रहने लगे,
    जिनको अपना माना हमने वो पराया हमको कहने लगे;

    जो बने कभी हमदर्द हमारे वो दर्द हमको देने लगे,
    जब लगी आग मेरे घर में तो पत्ते भी हवा देने लगे;

    जिनसे की वफ़ा हमने वो बेवफा हमको कहने लगे,
    जिनको दिया मरहम हमने वो ज़ख्म हमको देने लगे;

    बचकर निकलता था काँटों से मगर फूल भी ज़ख्म देने लगे,
    जब लगी आग मेरे घर में तो पत्ते भी हवा देने लगे;

    बनायी जिनकी तस्वीर हमने अब चेहरा वो बदलने लगे,
    जो रहते थे दिल में मेरे अब महलों में जाकर रहने लगे।
  • आँखों में आ जाते हैं आँसू;<br/>
फिर भी लबों पे हँसी रखनी पडती है;<br/>
ये मोहब्बत भी क्या चीज है यारों;<br/>
जिस से करते हैं उसी से छुपानी पडती है।
    आँखों में आ जाते हैं आँसू;
    फिर भी लबों पे हँसी रखनी पडती है;
    ये मोहब्बत भी क्या चीज है यारों;
    जिस से करते हैं उसी से छुपानी पडती है।
  • दी क़सम वस्ल में उस बुत को ख़ुदा की तो कहा;<br/>
तुझ को आता है ख़ुदा याद हमारे होते।<br/><br/>

वस्ल  =  मिलन
    दी क़सम वस्ल में उस बुत को ख़ुदा की तो कहा;
    तुझ को आता है ख़ुदा याद हमारे होते।

    वस्ल = मिलन
    ~ Bekhud Dehlvi
  • रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल;<br/>
जब आँख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है।
    रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल;
    जब आँख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है।
    ~ Mirza Ghalib
  • उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो;<br/>
जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो;<br/>
इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते हैं;<br/>
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो।
    उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो;
    जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो;
    इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते हैं;
    इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो।
  • जिंदगी में दर्द सब सहते रहे,
    जो मिला था प्यार हम खोते रहे;

    नफरतों के बीच नाजुक दिल मेरा,
    तोड़ के वादे सभी चलते रहे;

    बढ रही बेचैनियां मेरी यहाँ,
    रात को तुम ख्वाब में आते रहे;

    लौट आयी जिंदगी फिर से वहीं,
    पेट की उस भूख से रोते रहे;

    आँखों में छाया नशा है प्यार का,
    इश्क में तेरे वफा मिलते रहे;

    चाहतों के दरमियां इंतजार है,
    भूलकर भी आज हम मिलते रहे;

    रख लिया पत्थर दिलों में हमने भी,
    दर्द की दास्तान को सुनते रहे|
  • और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा;<br/>
मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा;<br/>
यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार;<br/>
प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा।
    और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा;
    मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा;
    यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार;
    प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा।
  • ज़िन्दगी तो अपने क़दमों पे चलती है 'फ़राज़';<br/>
औरों के सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं।
    ज़िन्दगी तो अपने क़दमों पे चलती है 'फ़राज़';
    औरों के सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं।
    ~ Ahmad Faraz
  • होंठो ने तेरा ज़िक्र न किया पर मेरी आँखें तुम्हें पैग़ाम देती हैं;<br/>
हम दुनियाँ से तुम्हें छुपाएँ कैसे, मेरी हर शायरी तेरा ही नाम लेती है।
    होंठो ने तेरा ज़िक्र न किया पर मेरी आँखें तुम्हें पैग़ाम देती हैं;
    हम दुनियाँ से तुम्हें छुपाएँ कैसे, मेरी हर शायरी तेरा ही नाम लेती है।