• ख्वाहिश तो ना थी किसी से दिल लगाने की;<br/>
मगर जब किस्मत में ही दर्द लिखा था, तो मोहब्बत कैसे ना होती!
    ख्वाहिश तो ना थी किसी से दिल लगाने की;
    मगर जब किस्मत में ही दर्द लिखा था, तो मोहब्बत कैसे ना होती!
  • एक नजर का झोंका आए, और छू जाए दिल को;<br/>
मोहब्बत हो जाने में, वक्त ही कितना लगता है!
    एक नजर का झोंका आए, और छू जाए दिल को;
    मोहब्बत हो जाने में, वक्त ही कितना लगता है!
  • मुझ पर इल्ज़ाम झूठा है दोस्तों;<br/>
मोहब्बत की नहीं... हो गयी थी!
    मुझ पर इल्ज़ाम झूठा है दोस्तों;
    मोहब्बत की नहीं... हो गयी थी!
  • अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे,<br/>
फिर भी मशहूर हैं, शहरों में फ़साने मेरे;<br/>
ज़िंदगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे,<br/>
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे|
    अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे,
    फिर भी मशहूर हैं, शहरों में फ़साने मेरे;
    ज़िंदगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे,
    अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे|
    ~ Rahat Indori
  • अब वो मिलते भी हैं तो यूँ कि कभी;<br/>
गोया हमसे कुछ वास्ता न था!
    अब वो मिलते भी हैं तो यूँ कि कभी;
    गोया हमसे कुछ वास्ता न था!
    ~ Hasrat Mohani
  • तेरा चेहरा, तेरी बातें, तेरा गम, तेरी यादें;<br/>
इतनी दौलत पहले कहाँ थी पास मेरे!
    तेरा चेहरा, तेरी बातें, तेरा गम, तेरी यादें;
    इतनी दौलत पहले कहाँ थी पास मेरे!
  • इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया;<br/>
दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।
    इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया;
    दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।
    ~ Mirza Ghalib
  • पहली मोहब्बत पुराने मुक़द्दमे की तरह होती है;<br/>
न ख़त्म होती है और न इन्सान बाइज्जत बरी होता है।
    पहली मोहब्बत पुराने मुक़द्दमे की तरह होती है;
    न ख़त्म होती है और न इन्सान बाइज्जत बरी होता है।
  • बता किस कोने में सुखाऊं तेरी यादें;<br/>
बरसात बाहर भी है और अन्दर भी।
    बता किस कोने में सुखाऊं तेरी यादें;
    बरसात बाहर भी है और अन्दर भी।
  • मैं ज़हर तो पी लूँ शौक़ से तेरी ख़ातिर;<br/>
पर शर्त ये है कि तुम सामने बैठ कर सासों को टूटता देखो।
    मैं ज़हर तो पी लूँ शौक़ से तेरी ख़ातिर;
    पर शर्त ये है कि तुम सामने बैठ कर सासों को टूटता देखो।