• लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में;<br/>
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।
    लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में;
    तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।
    ~ Bashir Badr
  • अब तो है इश्क़-ए-बुताँ में ज़िंदगानी का मज़ा;<br/>
जब ख़ुदा का सामना होगा तो देखा जाएगा।
    अब तो है इश्क़-ए-बुताँ में ज़िंदगानी का मज़ा;
    जब ख़ुदा का सामना होगा तो देखा जाएगा।
    ~ Akbar Allahabadi
  • दुनिया करे सवाल तो हम क्या जवाब दें;<br/>
तुमको ना हो ख्याल तो हम क्या जवाब दें।
    दुनिया करे सवाल तो हम क्या जवाब दें;
    तुमको ना हो ख्याल तो हम क्या जवाब दें।
    ~ Majrooh Sultanpuri
  • भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा;<br/>
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा;<br/>
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का;<br/>
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा।
    भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा;
    हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा;
    अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का;
    मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा।
    ~ Dr. Kumar Vishwas
  • एक नारी का भावुक सन्देश:<br/>
मैं एक बेटी हूँ, मैं एक बहन हूँ, मैं एक बीवी हूँ, मैं एक माँ भी हूँ लेकिन...<br/>
खबरदार जो किसी ने आंटी बोला तो।
    एक नारी का भावुक सन्देश:
    मैं एक बेटी हूँ, मैं एक बहन हूँ, मैं एक बीवी हूँ, मैं एक माँ भी हूँ लेकिन...
    खबरदार जो किसी ने आंटी बोला तो।
  • वो बात बात पे देता है परिंदों की मिसाल;<br/>
साफ़ साफ़ नहीं कहता मेरा शहर ही छोड़ दो।
    वो बात बात पे देता है परिंदों की मिसाल;
    साफ़ साफ़ नहीं कहता मेरा शहर ही छोड़ दो।
    ~ Ahmad Faraz
  • बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना;<br/>
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना।
    बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना;
    आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना।
    ~ Mirza Ghalib
  • अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं;<br/>
पता चला हैं कि मेहमान आने वाले हैं।
    अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं;
    पता चला हैं कि मेहमान आने वाले हैं।
    ~ Rahat Indori
  • मेरा जो भी तर्जुबा है, तुम्हें बतला रहा हूँ मैं;<br/>
कोई लब छू गया था तब, कि अब तक गा रहा हूँ मैं;<br/>
बिछुड़ के तुम से अब कैसे, जिया जाये बिना तड़पे;<br/>
जो मैं खुद ही नहीं समझा, वही समझा रहा हूँ मैं।
    मेरा जो भी तर्जुबा है, तुम्हें बतला रहा हूँ मैं;
    कोई लब छू गया था तब, कि अब तक गा रहा हूँ मैं;
    बिछुड़ के तुम से अब कैसे, जिया जाये बिना तड़पे;
    जो मैं खुद ही नहीं समझा, वही समझा रहा हूँ मैं।
    ~ Dr. Kumar Vishwas
  • जफा जो इश्क में होती है वह जफा ही नहीं;<br/>
सितम न हो तो मोहब्बत में कुछ मजा ही नहीं।<br/><br/>

Meaning:<br/>
जफा - जुल्म
    जफा जो इश्क में होती है वह जफा ही नहीं;
    सितम न हो तो मोहब्बत में कुछ मजा ही नहीं।

    Meaning:
    जफा - जुल्म
    ~ Allama Iqbal