• तेरे पास में बैठना भी इबादत;<br/>

तुझे दूर से देखना भी इबादत;<br/>

न माला, न मंतर, न पूजा, न सजदा;<br/>

तुझे हर घड़ी सोचना भी इबादत!
    तेरे पास में बैठना भी इबादत;
    तुझे दूर से देखना भी इबादत;
    न माला, न मंतर, न पूजा, न सजदा;
    तुझे हर घड़ी सोचना भी इबादत!
  • दो चार लफ्ज़ प्यार के ले कर मैं क्या करूंगा;<br/>

करनी है तो वफ़ा की मुकम्मल किताब मेरे नाम कर !
    दो चार लफ्ज़ प्यार के ले कर मैं क्या करूंगा;
    करनी है तो वफ़ा की मुकम्मल किताब मेरे नाम कर !
  • लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये;<br/>
ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये!
    लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये;
    ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये!
  • यूँ तो कोई सबूत नहीं है कि तुम मेरे हो;<br/>
 
ये दिल का रिश्ता तो बस यकीन से चलता है!
    यूँ तो कोई सबूत नहीं है कि तुम मेरे हो;
    ये दिल का रिश्ता तो बस यकीन से चलता है!
  • शोहरत बेशक चुपचाप गुजर जाये;<br/>
कम्बख्त बदनामी बड़ा शोर करती है!
    शोहरत बेशक चुपचाप गुजर जाये;
    कम्बख्त बदनामी बड़ा शोर करती है!
  • दरिया का सारा नशा:

    दरिया का सारा नशा उतरता चला गया,
    मुझको डुबोया और मैं उभरता चला गया;

    वो पैरवी तो झूठ की करता चला गया,
    लेकिन बस उसका चेहरा उतरता चला गया;

    हर साँस उम्र भर किसी मरहम से कम न थी,
    मैं जैसे कोई जख्म था भरता चला गया।
    ~ Wasim Barelvi
  • चाँद को अपनी चौकट पे सजाने की तमन्ना ना कर,<BR/>
ये जमाना तो आँखों से ख्वाब भी छीन लेता है!
    चाँद को अपनी चौकट पे सजाने की तमन्ना ना कर,
    ये जमाना तो आँखों से ख्वाब भी छीन लेता है!
  • वक़्त का सितम तो देखिए;<BR/>
खुद गुज़र गया हमे वही छोड़ कर!
    वक़्त का सितम तो देखिए;
    खुद गुज़र गया हमे वही छोड़ कर!
  • लौटा जो सज़ा काट के, वो बिना ज़ुर्म की;<br/>
घर आ के उसने, सारे परिंदे रिहा कर दिए!
    लौटा जो सज़ा काट के, वो बिना ज़ुर्म की;
    घर आ के उसने, सारे परिंदे रिहा कर दिए!
  • फासला भी जरूरी है, चिराग रौशन करने वक्त;<br/>
तजुर्बा ये हुआ हाथ जल जाने के बाद।
    फासला भी जरूरी है, चिराग रौशन करने वक्त;
    तजुर्बा ये हुआ हाथ जल जाने के बाद।