• दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में;<br/>
इक आइना था टूट गया देख-भाल में!
    दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में;
    इक आइना था टूट गया देख-भाल में!
    ~ Seemab Akbarabadi
  • अगर नए रिश्ते न बनें तो, मलाल मत करना;<br/>
पुराने टूट ना जायें बस, इतना ख्याल रखना।
    अगर नए रिश्ते न बनें तो, मलाल मत करना;
    पुराने टूट ना जायें बस, इतना ख्याल रखना।
  • दिल दिया जिस ने किसी को वो हुआ साहेब-ए-दिल;<br/>
हाथ आ जाती है खो देने से दौलत दिल की!
    दिल दिया जिस ने किसी को वो हुआ साहेब-ए-दिल;
    हाथ आ जाती है खो देने से दौलत दिल की!
    ~ Aasi Ghazipuri
  • बहुत दिनों के बाद उसका कोरा कागज़ आया;<br/>
शायर हूँ साहब, लिखी हुई खामोशी पढ़ ली मैंने!
    बहुत दिनों के बाद उसका कोरा कागज़ आया;
    शायर हूँ साहब, लिखी हुई खामोशी पढ़ ली मैंने!
  • हर एक चश्म में जैसे कि एक जहां गुम है,
    हर एक दिल में लगे एक दास्तां गुम है;

    कहीं तलाश फ़लक की दिखे है सतह-ज़मीं,
    कहीं लगे कि ज़मीं से एक आस्मां गुम है;

    कहीं मलाल चमन को कि उड़ गए पंछी,
    कहीं गुलों को शिकायत कि बाग़बां गुम हैं;

    रखेगी याद ये दुनिया यहाँ बस इतना ही,
    वहाँ वो कितना मुक़म्मल है, जो जहाँ गुम है;

    बढ़ा हुआ सा लगे दायरा ये खोने का,
    यह न पूछ किसी से कि वो कहाँ गुम है।
  • नसीम-ए-सुबह बू-ए-गुल से क्या इतराती फिरती है,<br/>
जरा सूंघ-ए-शमीम-ए-जुल्फ खुश्बू इसको कहते हैं।<br/><br/>

1. नसीम-ए-सुबह - सुबह चलने वाली ठंडी और धीमी हवा<br/>
2. शमीम - सुगन्ध, खुश्बू, महक
    नसीम-ए-सुबह बू-ए-गुल से क्या इतराती फिरती है,
    जरा सूंघ-ए-शमीम-ए-जुल्फ खुश्बू इसको कहते हैं।

    1. नसीम-ए-सुबह - सुबह चलने वाली ठंडी और धीमी हवा
    2. शमीम - सुगन्ध, खुश्बू, महक
    ~ Anwar Allahabadi
  • मज़हब, दौलत, ज़ात, घराना, सरहद, ग़ैरत, खुद्दारी;<br/>
एक मोहब्बत की चादर को, कितने चूहे कुतर गए।
    मज़हब, दौलत, ज़ात, घराना, सरहद, ग़ैरत, खुद्दारी;
    एक मोहब्बत की चादर को, कितने चूहे कुतर गए।
  • गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;<br/>
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।
    गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;
    यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।
  • जब खाक ही होना था मुझको तो खाक-ए-रह-ए-सहरा होता,<br/>
इक कोशिश-ए-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।<br/><br/>
 
1. खाक - धूल, रंज, गर्द, मिट्टी जमीन<br/>
2. खाक-ए-रह-ए-सहरा - मरूस्थल या रेगिस्तान के रास्ते की धूल
    जब खाक ही होना था मुझको तो खाक-ए-रह-ए-सहरा होता,
    इक कोशिश-ए-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।

    1. खाक - धूल, रंज, गर्द, मिट्टी जमीन
    2. खाक-ए-रह-ए-सहरा - मरूस्थल या रेगिस्तान के रास्ते की धूल
    ~ Jameel Mazhari
  • ख्वाहिशें हैं कि तेरे दिल मे उतर जाऊं,
    मुद्दतों बाद मैं हद से गुज़र जाऊं;

    कतारों में हैं मेरे कई चाहने वाले,
    तुम कहो तो मैं सब से मुकर जाऊं;

    तुम परेशान हो शायद मेरी हरकतों से,
    सोचता हूँ कि अब मैं सुधर जाऊं;

    जब भी तुम फूलों सा महकती हो,
    दिल करता है कि तुम्हे कुतर जाऊं;

    बहूत महीन हो गया है मेरा मुकद्दर,
    काश मैं फिर से उभर जाऊं।