• कर दो तब्दील अदालतों को मय खानों में;<br/>
सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता!
    कर दो तब्दील अदालतों को मय खानों में;
    सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता!
  • रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल;<br/>
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है!
    रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल;
    जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है!
    ~ Mirza Ghalib
  • दिल टूटने से थोड़ी सी तकलीफ़ तो हुई;<br/>
लेकिन तमाम उम्र को आराम हो गया!
    दिल टूटने से थोड़ी सी तकलीफ़ तो हुई;
    लेकिन तमाम उम्र को आराम हो गया!
  • बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने;<br/>
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है!
    बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने;
    किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है!
    ~ Nida Fazli
  • इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन;<br/>
देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के!
    इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन;
    देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • शब्दों को होठों पर रखकर दिल के भेद ना खोलो;<br/>
आंखें मेरी सुन लेंगी बस तुम आँखों से बोलो!
    शब्दों को होठों पर रखकर दिल के भेद ना खोलो;
    आंखें मेरी सुन लेंगी बस तुम आँखों से बोलो!
  • दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;<br/>
ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!
    दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है;
    ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया!
  • मुद्दतें गुजरी हैं हमको करीब आए हुए;<br/>
रात है बेचैन शमा प्यार की जलाए हुए;<br/>
बिखरी हुई हैं साँसों में तेरी ख्वाहिशें;<br/>
मेरी नज़रों में ख्वाब हैं मुस्कुराए हुए!
    मुद्दतें गुजरी हैं हमको करीब आए हुए;
    रात है बेचैन शमा प्यार की जलाए हुए;
    बिखरी हुई हैं साँसों में तेरी ख्वाहिशें;
    मेरी नज़रों में ख्वाब हैं मुस्कुराए हुए!
  • वो इत्र-दान सा लहजा मेरे बुज़ुर्गों का;<br/>
रची-बसी हुई उर्दू ज़बान की ख़ुश्बू!
    वो इत्र-दान सा लहजा मेरे बुज़ुर्गों का;
    रची-बसी हुई उर्दू ज़बान की ख़ुश्बू!
    ~ Bashir Badr
  • मत बनाओ मुझे फुर्सत के लम्हों का खिलोना;<br/>
मैं भी इंसान हूँ, दर्द मुझे भी होता है!
    मत बनाओ मुझे फुर्सत के लम्हों का खिलोना;
    मैं भी इंसान हूँ, दर्द मुझे भी होता है!