• दिल का दर्द छुपाना कितना मुश्किल है,<br/>
ग़म में मुस्कुराना कितना मुश्किल है,<br/> 
दूर तक जब चलो किसी के साथ,<br/> 
फिर तन्हा लौट के आना कितना मुश्किल है।
    दिल का दर्द छुपाना कितना मुश्किल है,
    ग़म में मुस्कुराना कितना मुश्किल है,
    दूर तक जब चलो किसी के साथ,
    फिर तन्हा लौट के आना कितना मुश्किल है।
  • साहेब अब ये ना पूछना की अल्फाज कहा से लाता हूँ;<br/>
कुछ चुराता हूँ दर्द दूसरों के, कुछ अपनी सुनाता हूँ!
    साहेब अब ये ना पूछना की अल्फाज कहा से लाता हूँ;
    कुछ चुराता हूँ दर्द दूसरों के, कुछ अपनी सुनाता हूँ!
  • रोज एक नई तकलीफ रोज एक नया गम;<br/>
ना जाने कब एलान होगा कि मर गए हम!
    रोज एक नई तकलीफ रोज एक नया गम;
    ना जाने कब एलान होगा कि मर गए हम!
  • किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो,<br/>
जिस्म से रूह को लेने फ़रिश्ते नहीं आते।
    किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो,
    जिस्म से रूह को लेने फ़रिश्ते नहीं आते।
  • तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है,<br/>
खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है,<br/>
फिर आवाज़ लगायी जाती है आ जाओ टूटे दिल वालों,<br/>
यहाँ दर्द-ए-दिल की दवा पिलाई जाती है।
    तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है,
    खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है,
    फिर आवाज़ लगायी जाती है आ जाओ टूटे दिल वालों,
    यहाँ दर्द-ए-दिल की दवा पिलाई जाती है।
  • हुजूर लाजमी है महफिलों मे बवाल होना;<br/>
एक तो हुस्न कयामत उस पे होठो का लाल होना!
    हुजूर लाजमी है महफिलों मे बवाल होना;
    एक तो हुस्न कयामत उस पे होठो का लाल होना!
  • अपनी यादों को मिटाना बहुत कठिन है,<br/>
अपने गम को भूल जाना बहुत कठिन है।<br/>
जब राहे-मयखानों पर चलते हैं कदम,<br/>
होश में लौट कर आना बहुत कठिन है।
    अपनी यादों को मिटाना बहुत कठिन है,
    अपने गम को भूल जाना बहुत कठिन है।
    जब राहे-मयखानों पर चलते हैं कदम,
    होश में लौट कर आना बहुत कठिन है।
  • क्या फूलों की कतरन से बनें हैं तेरे लब;<br/>
थके हैं मेरे होंठ इन्हें आराम चाहिये!
    क्या फूलों की कतरन से बनें हैं तेरे लब;
    थके हैं मेरे होंठ इन्हें आराम चाहिये!
  • शौक-ए-आज़माइश भी एक रोग है;<br/>
लग जाए तो रिश्तों को किश्तों से गुजरना पड़ता है!
    शौक-ए-आज़माइश भी एक रोग है;
    लग जाए तो रिश्तों को किश्तों से गुजरना पड़ता है!
  • शिकवे आँखों से गिर पड़े वरना;<br/>
होठों से शिकायत कब की हमने!
    शिकवे आँखों से गिर पड़े वरना;
    होठों से शिकायत कब की हमने!