• दिल को इसी फ़रेब में रखा है उम्र भर;
    इस इम्तिहां के बाद कोई इम्तिहां नहीं!
  • इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है;<br/>
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर!
    इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है;
    लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर!
  • फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में;
    मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी!
  • ताश के पत्ते तो खुशनसीब है यारों;
    बिखरने के बाद उठाने वाला तो कोई है!
  • मिलना इतिफाक था बिछरना नसीब था;
    वो तुना हे दूर चला गया जितना वो करीब था;
    हम उसको देखने क लिए तरसते रहे;
    जिस शख्स की हथेली पे हमारा नसीब था!
  • मत पूछो की कैसा हूँ मैं;<br/>
कभी भूल ना पाओगे वैसा हूँ मैं!
    मत पूछो की कैसा हूँ मैं;
    कभी भूल ना पाओगे वैसा हूँ मैं!
  • कुछ गैर ऐसे मिले, जो मुझे अपना बना गए;
    कुछ अपने ऐसे निकले, जो गैर का मतलब बता गए!
  • मेरी ज़िन्दगी में खुशियाँ तेरे बहाने से हैं;<br/>
आधी तुझे सताने से हैं आधी तुझे मनाने से हैं!
    मेरी ज़िन्दगी में खुशियाँ तेरे बहाने से हैं;
    आधी तुझे सताने से हैं आधी तुझे मनाने से हैं!
  • वो सज़दा ही क्या, जिसमे सर उठाने का होश रहे;
    इज़हार-ए-इश्क़ का मजा तब, जब मैं बेचैन रहूँ और वो ख़ामोश रहे!
  • फिर नहीं बसते वो दिल जो एक बार उजड़ जाते है;<br/>
कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता!
    फिर नहीं बसते वो दिल जो एक बार उजड़ जाते है;
    कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता!