• किसी ने पूछा कैसे हो!<br/>
मैंने कहा, `मैं तो शुरू से ऐसा ही हूँ! बस बाक़ी निर्भर आपकी ज़रूरत पर है कि आपको मुझसे काम है या नहीं!`
    किसी ने पूछा कैसे हो!
    मैंने कहा, "मैं तो शुरू से ऐसा ही हूँ! बस बाक़ी निर्भर आपकी ज़रूरत पर है कि आपको मुझसे काम है या नहीं!"
  • कहने के लिए तो पिछले 50 दिन से कोई रोड पर नहीं आया लेकिन<br/>
हकीकत ये है कि कई लोग रोड पर आ गये हैं!
    कहने के लिए तो पिछले 50 दिन से कोई रोड पर नहीं आया लेकिन
    हकीकत ये है कि कई लोग रोड पर आ गये हैं!
  • समय कितना बदल गया है!<br/>
पहले बैंक/एटीएम के बाहर लिखा होता था, `चेहरा ढक कर प्रवेश ना करें।`<br/>
अब लिखा होता है, `बिना मास्क के प्रवेश ना करें!`
    समय कितना बदल गया है!
    पहले बैंक/एटीएम के बाहर लिखा होता था, "चेहरा ढक कर प्रवेश ना करें।"
    अब लिखा होता है, "बिना मास्क के प्रवेश ना करें!"
  • रास्ते हैं खुले हुए सारे,<br/>
फिर भी ये ज़िंदगी रुकी हुई है।
    रास्ते हैं खुले हुए सारे,
    फिर भी ये ज़िंदगी रुकी हुई है।
  • गुनाह तो कुछ घिनोने हुए हैं कायनात से;<br/>
वरना गंगाजल के बजाय शराब से हाथ न धोने पड़ते!
    गुनाह तो कुछ घिनोने हुए हैं कायनात से;
    वरना गंगाजल के बजाय शराब से हाथ न धोने पड़ते!
  • किये होंगे कुछ अलग से गुनाह हम सब ने;<br/>
इसीलिए गंगाजल की बजाय... हाथ मदिरा से धोने पड़ रहे हैं।
    किये होंगे कुछ अलग से गुनाह हम सब ने;
    इसीलिए गंगाजल की बजाय... हाथ मदिरा से धोने पड़ रहे हैं।
  • किसी से उम्मीद लगाने से बेहतर है मुल्तानी मिट्टी लगा लो!<br/>
रंग भी निखर जायेगा और और दिल को भी सुकून मिलेगा!
    किसी से उम्मीद लगाने से बेहतर है मुल्तानी मिट्टी लगा लो!
    रंग भी निखर जायेगा और और दिल को भी सुकून मिलेगा!
  • हमको अपनी अच्छाई पर ग़ुरूर नहीं करना चाहिये!<br/>
क्योंकि किसी की कहानी में शायद हम भी ग़लत हैं!
    हमको अपनी अच्छाई पर ग़ुरूर नहीं करना चाहिये!
    क्योंकि किसी की कहानी में शायद हम भी ग़लत हैं!
  • लॉकडाउन ख़त्म होने का इंतज़ार सिर्फ आप ही नहीं 'कोरोना' भी कर रहा है!<br/>
सतर्कता रखिये और सुरक्षित रहें!
    लॉकडाउन ख़त्म होने का इंतज़ार सिर्फ आप ही नहीं 'कोरोना' भी कर रहा है!
    सतर्कता रखिये और सुरक्षित रहें!
  • महफूज़ सारे बादशाह वज़ीर और शहज़ादे हैं;<br/>
जो बेघर हैं इस तूफ़ान में वो महज़ पयादे हैं!
    महफूज़ सारे बादशाह वज़ीर और शहज़ादे हैं;
    जो बेघर हैं इस तूफ़ान में वो महज़ पयादे हैं!