• पूरी ज़िंदगी हम इसी बात को सोच कर गुज़ार देते हैं कि चार लोग क्या कहेंगे,<br/>
और अंत में चार लोग बस यही कहते हैं 'राम नाम सत्य है'।Upload to Facebook
    पूरी ज़िंदगी हम इसी बात को सोच कर गुज़ार देते हैं कि चार लोग क्या कहेंगे,
    और अंत में चार लोग बस यही कहते हैं 'राम नाम सत्य है'।
  • आज का फालतू ज्ञान:<br/>
अपनी तारीफ खुद करें क्योंकि बुराई करने के लिए बहुत से हरामखोर बैठे हैं।Upload to Facebook
    आज का फालतू ज्ञान:
    अपनी तारीफ खुद करें क्योंकि बुराई करने के लिए बहुत से हरामखोर बैठे हैं।
  • सभी रिश्तों में पुरुषों का नाम पहले आता है।<br/>
दादा - दादी, नाना - नानी, मामा - मामी, चाचा - चाची, भईया - भाभी, लेकिन सिर्फ एक रिश्ता ऐसा है जिसमे पुरुष बाद में आता है और वो है... माँ - बाप का क्योंकि माँ से बड़ा कोई नहीं।Upload to Facebook
    सभी रिश्तों में पुरुषों का नाम पहले आता है।
    दादा - दादी, नाना - नानी, मामा - मामी, चाचा - चाची, भईया - भाभी, लेकिन सिर्फ एक रिश्ता ऐसा है जिसमे पुरुष बाद में आता है और वो है... माँ - बाप का क्योंकि माँ से बड़ा कोई नहीं।
  • गीता में पढ़ा था:<br/>
शरीर मर जाता है परन्तु आत्मा जीवित रहती है लेकिन आज के समय में देख रहा हूँ कि शरीर तो जीवित हैं परन्तु आत्मायें मर चुकी हैं।Upload to Facebook
    गीता में पढ़ा था:
    शरीर मर जाता है परन्तु आत्मा जीवित रहती है लेकिन आज के समय में देख रहा हूँ कि शरीर तो जीवित हैं परन्तु आत्मायें मर चुकी हैं।
  • कड़वा सत्य<br/>
माता - पिता की 'नसीहत' को लोग अक्सर भूल जाते हैं;<br/>
मगर उनकी 'वसीयत' को लोग हरगिज़ नहीं भूलते।Upload to Facebook
    कड़वा सत्य
    माता - पिता की 'नसीहत' को लोग अक्सर भूल जाते हैं;
    मगर उनकी 'वसीयत' को लोग हरगिज़ नहीं भूलते।
  • किसी ने धूल क्या झोंकी आँखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है।
  • बचपन में माँ कहती है -<br/>
तुझे कुछ समझ नहीं आता।<br/>
जवानी में बीवी कहती है -<br/>
आपको कुछ समझ नहीं आता।<br/>
बुढ़ापे में बच्चे कहते हैं -<br/>
आपको कुछ समझ नहीं आता।<br/>
साला समझने की कौन सी उम्र है बस ये ही समझ नहीं आता।Upload to Facebook
    बचपन में माँ कहती है -
    तुझे कुछ समझ नहीं आता।
    जवानी में बीवी कहती है -
    आपको कुछ समझ नहीं आता।
    बुढ़ापे में बच्चे कहते हैं -
    आपको कुछ समझ नहीं आता।
    साला समझने की कौन सी उम्र है बस ये ही समझ नहीं आता।
  • इलायची के दानों सा है मुकद्दर अपना;<br/>
महक उतनी बिखरी पीसे गए जितना।Upload to Facebook
    इलायची के दानों सा है मुकद्दर अपना;
    महक उतनी बिखरी पीसे गए जितना।
  • ना खुशी खरीद पाता हूँ, ना ही गम बेच पाता हूँ,<br/>
फिर भी मैं ना जाने क्यों हर रोज कमाने जाता हूँ।Upload to Facebook
    ना खुशी खरीद पाता हूँ, ना ही गम बेच पाता हूँ,
    फिर भी मैं ना जाने क्यों हर रोज कमाने जाता हूँ।
  • क्या विडंबना है:
    एक चाय वाला टेक्नोलॉजी / भविष्य / बिजनेस की बातें करके Digital India लांच कर रहा है;
    और दूसरी तरफ एक IITian सुबह से शाम रायता फैला रहा है।
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