• मेरे ईश्वर! हज़ारों ऐब हैं मुझमे, नहीं कोई हुनर बेशक;<br/>
मेरी खामी को तू मेरी खूबी को तब्दील कर देना;<br/>
मेरी हस्ती है एक खारे समंदर सी मेरे दाता;<br/>
तू अपनी रहमतों से इसको मीठी झील कर देना।
    मेरे ईश्वर! हज़ारों ऐब हैं मुझमे, नहीं कोई हुनर बेशक;
    मेरी खामी को तू मेरी खूबी को तब्दील कर देना;
    मेरी हस्ती है एक खारे समंदर सी मेरे दाता;
    तू अपनी रहमतों से इसको मीठी झील कर देना।
  • मुश्किल राहें भी आसान हो जाती हैं;
    हर राह पर पहचान हो जाती है;
    जो कहते हैं मुस्कुरा कर 'शुक्र है मालिक';
    किस्मत उनकी गुलाम हो जाती है।
  • इतिहास कहता है कि कल सुख था,
    विज्ञान कहता है कि कल सुख होगा,
    लेकिन धर्म कहता है कि,
    अगर मन सच्चा और दिल अच्छा है तो हर रोज़ सुख होगा।
  • ना ऊंच-नीच में रहूँ ना जात पात में रहूँ;<br/>
तू मेरे दिल में रहे मौला और मैं औकात में रहूँ;<br/>
तेरी हर रजा दिल से कबूल हो मुझे;<br/>
शुकराना करता रहूँ तेरा जिस भी हालत में रहूँ।
    ना ऊंच-नीच में रहूँ ना जात पात में रहूँ;
    तू मेरे दिल में रहे मौला और मैं औकात में रहूँ;
    तेरी हर रजा दिल से कबूल हो मुझे;
    शुकराना करता रहूँ तेरा जिस भी हालत में रहूँ।
  • आँसू पोंछ कर हँसाया है मुझे;<br/>
मेरी गलती पर भी सीने से लगाया है मुझे;<br/>
ऐसे गुरु पर कैसे प्यार ना हो;<br/>
जिस गुरु ग्रंथ साहिब जी ने जीना सिखाया है मुझे।
    आँसू पोंछ कर हँसाया है मुझे;
    मेरी गलती पर भी सीने से लगाया है मुझे;
    ऐसे गुरु पर कैसे प्यार ना हो;
    जिस गुरु ग्रंथ साहिब जी ने जीना सिखाया है मुझे।
  • सुख भी बहुत हैं, परेशानियां भी बहुत हैं,<br/>

ज़िन्दगी में लाभ हैं, तो हानियां भी बहुत हैं,<br/>

क्या हुआ जो प्रभु ने हमें थोड़े गम दे दिए,<br/>

उस की हम पर मेहरबानियाँ भी बहुत हैं।
    सुख भी बहुत हैं, परेशानियां भी बहुत हैं,
    ज़िन्दगी में लाभ हैं, तो हानियां भी बहुत हैं,
    क्या हुआ जो प्रभु ने हमें थोड़े गम दे दिए,
    उस की हम पर मेहरबानियाँ भी बहुत हैं।
  • इंसान जीवन में रिश्ते नातों को निभाता चला गया;<br/>
जीवन की इस दौड़ में खुद को भुलाता चला गया;<br/>
बंदगी भी ना कर पाया उस खुदा की रहमतों की;<br/>
खाली हाथ आया था और मुठी बंद कर चला गया।
    इंसान जीवन में रिश्ते नातों को निभाता चला गया;
    जीवन की इस दौड़ में खुद को भुलाता चला गया;
    बंदगी भी ना कर पाया उस खुदा की रहमतों की;
    खाली हाथ आया था और मुठी बंद कर चला गया।
  • प्रभु के आगे जो झुकता है वो सबको अच्छा लगता है;
    लेकिन, जो सबके आगे झुकता है वो प्रभु को अच्छा लगता है।
  • दौलत छोड़ी दुनिया छोड़ी सारा खज़ाना छोड़ दिया;
    वाहेगुरू के प्यार में दीवानों ने राज घराना छोड़ दिया; दरवाज़े पे जब लिखा हमने नाम हमारे वाहेगुरू का;
    मुसीबत ने दरवाज़े पे आना छोड़ दिया।
  • सिमरन कर लोगे तुम जितना, उतना ही अज्ञान मिटेगा;
    सुख-दुःख तुमको एक लगेंगे, जब सच्चा वो ज्ञान मिलेगा;
    जब औरों के काम आओगे. तब-तब जीवन सफल रहेगा;
    उससे मिलना फिर मुमकिन है, जब औरों का ध्यान रहेगा।
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