• मेरी दीवानगी का उधार 'श्याम' तुझे चुकाने की जरुरत नही है,<br/>
मैं तुझे देखता हूँ और किश्तें अदा हो जाती है।Upload to Facebook
    मेरी दीवानगी का उधार 'श्याम' तुझे चुकाने की जरुरत नही है,
    मैं तुझे देखता हूँ और किश्तें अदा हो जाती है।
  • कन्हैया इतना प्यार भी ना करो कि बिखर जाऊँ मैं;
    थोड़ा रूठा भी करो कि सुधर जाऊँ मैं;
    अगर हो जाये खता तो हो जाना खफा;
    पर इतना भी ना होना कि मर ही जाऊँ मैं।
  • आत्मा को निरंतर साफ करते रहें,
    दुनिया को निरंतर माफ़ करते रहें,
    परमात्मा को निरंतर याद करते रहें।
  • कैसे शुक्र करूँ तेरी रहमतों का ए खुदा,<br/>
मुझे माँगने का सलीका नही हैं, पर तू देने की हर अदा जानता है।Upload to Facebook
    कैसे शुक्र करूँ तेरी रहमतों का ए खुदा,
    मुझे माँगने का सलीका नही हैं, पर तू देने की हर अदा जानता है।
  • ज़िन्दगी हसीन है ज़िन्दगी से प्यार करो,
    हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो,
    वो पल भी आएगा, जिस पल का इंतज़ार है आपको,
    बस रब पे भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो।
  • दौलत छोड़ी दुनिया छोड़ी सारा खज़ाना छोड़ दिया;
    सतगुरु के प्यार में दीवानों ने राज घराना छोड़ दिया;
    दरवाज़े पे जब लिखा हमने नाम हमारे सतगुरु का;
    मुसीबत ने दरवाज़े पे आना छोड़ दिया।
  • भगवान कहते हैं,
    'तलाश ना कर मुझे ज़मीन-ओ-आसमान की गर्दिशों में, अगर तेरे दिल में नहीं तो कहीं नहीं हूँ मैं।'
  • कान्हा तेरे वादे तू ही जाने, मेरा तो आज भी वही कहना है,<br/>
जिस दिन साँस टूटेगी, उस दिन ही तेरी आस छूटेगी।Upload to Facebook
    कान्हा तेरे वादे तू ही जाने, मेरा तो आज भी वही कहना है,
    जिस दिन साँस टूटेगी, उस दिन ही तेरी आस छूटेगी।
  • 'श्याम' से मोहब्बत कोई बारिश का नाम नहीं<br/>
जो बरसे और थम जाए।<br/>
'श्याम' से मोहब्बत सूरज भी नहीं<br/> 
जो चमके और डूब जाए।<br/>
'श्याम' से मोहब्बत तो नाम है सांस का<br/> 
जो चले तो जिदंगी चले और रूके तो मौत बन जाए।<br/>
जय जय श्री राधे - हरे कृष्णा!Upload to Facebook
    'श्याम' से मोहब्बत कोई बारिश का नाम नहीं
    जो बरसे और थम जाए।
    'श्याम' से मोहब्बत सूरज भी नहीं
    जो चमके और डूब जाए।
    'श्याम' से मोहब्बत तो नाम है सांस का
    जो चले तो जिदंगी चले और रूके तो मौत बन जाए।
    जय जय श्री राधे - हरे कृष्णा!
  • मुझे अक्ल उतनी ही देना मेरे साहिब,<br/>
कि कभी दखल ना कर सकूँ तेरी रज़ा में।Upload to Facebook
    मुझे अक्ल उतनी ही देना मेरे साहिब,
    कि कभी दखल ना कर सकूँ तेरी रज़ा में।
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