• तन महि मैल नाही मन राता ॥<br/>
गुर बचनी सच सबदि पछाता ॥<br/>
तेरा ताण नाम की वडिआई ॥<br/>
नानक रहणा भगति सरणाई ॥४॥१०॥<br/><br/>

जिसका मन प्रभु के अभ्यस्त है, उसके शरीर में कोई प्रदूषण नहीं है;<br/>
गुरु के शब्द के माध्यम से सच्चे शब्द का एहसास होता है;<br/>
सभी शक्तियां तुम्हारे नाम के माध्यम से तुम्हारी हैं;<br/>
नानक अपने भक्तों के अभयारण्य में पालन करता है।<br/>
गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब की शुभ कामनायें!Upload to Facebook
    तन महि मैल नाही मन राता ॥
    गुर बचनी सच सबदि पछाता ॥
    तेरा ताण नाम की वडिआई ॥
    नानक रहणा भगति सरणाई ॥४॥१०॥

    जिसका मन प्रभु के अभ्यस्त है, उसके शरीर में कोई प्रदूषण नहीं है;
    गुरु के शब्द के माध्यम से सच्चे शब्द का एहसास होता है;
    सभी शक्तियां तुम्हारे नाम के माध्यम से तुम्हारी हैं;
    नानक अपने भक्तों के अभयारण्य में पालन करता है।
    गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब की शुभ कामनायें!
  • सरम खंड की बाणी रूपु ॥<br/>
तिथै घाड़ति घड़ीऐ बहुतु अनूपु ॥<br/>
ता कीआ गला कथीआ ना जाहि ॥<br/>
जे को कहै पिछै पछुताइ ॥<br/>
तिथै घड़ीऐ सुरति मति मनि बुधि ॥<br/>
तिथै घड़ीऐ सुरा सिधा की सुधि ॥३६॥<br/><br/>

विनम्रता के दायरे में, शब्द सौंदर्य है;<br/>
अतुलनीय सौंदर्य के प्रपत्र वहाँ विचारों के हैं;<br/>
जिसको वर्णित नहीं किया जा सकता;<br/>
जो इसे वर्णित करना चाहे वो पछतायेगा;<br/>
मन की सहज चेतना, बुद्धि और समझ वहाँ आकार लेते हैं;<br/>
आध्यात्मिक योद्धाओं और सिद्ध, की आध्यात्मिक पूर्णता चेतना वहां आकार लेती है।<br/>
गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब की शुभ कामनायें!Upload to Facebook
    सरम खंड की बाणी रूपु ॥
    तिथै घाड़ति घड़ीऐ बहुतु अनूपु ॥
    ता कीआ गला कथीआ ना जाहि ॥
    जे को कहै पिछै पछुताइ ॥
    तिथै घड़ीऐ सुरति मति मनि बुधि ॥
    तिथै घड़ीऐ सुरा सिधा की सुधि ॥३६॥

    विनम्रता के दायरे में, शब्द सौंदर्य है;
    अतुलनीय सौंदर्य के प्रपत्र वहाँ विचारों के हैं;
    जिसको वर्णित नहीं किया जा सकता;
    जो इसे वर्णित करना चाहे वो पछतायेगा;
    मन की सहज चेतना, बुद्धि और समझ वहाँ आकार लेते हैं;
    आध्यात्मिक योद्धाओं और सिद्ध, की आध्यात्मिक पूर्णता चेतना वहां आकार लेती है।
    गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब की शुभ कामनायें!
  • सलोकु मरदाना १॥<br/>
कलि कलवाली कामु मदु मनूआ पीवणहारु ॥<br/>
क्रोध कटोरी मोहि भरी पीलावा अहंकारु ॥<br/>
मजलस कूड़े लब की पी पी होइ खुआरु ॥<br/>
करणी लाहणि सतु गुड़ु सचु सरा करि सारु ॥<br/>
गुण मंडे करि सीलु घिउ सरमु मासु आहारु ॥<br/>
गुरमुखि पाईऐ नानका खाधै जाहि बिकार ॥१॥<br/>
गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की बधाई!Upload to Facebook
    सलोकु मरदाना १॥
    कलि कलवाली कामु मदु मनूआ पीवणहारु ॥
    क्रोध कटोरी मोहि भरी पीलावा अहंकारु ॥
    मजलस कूड़े लब की पी पी होइ खुआरु ॥
    करणी लाहणि सतु गुड़ु सचु सरा करि सारु ॥
    गुण मंडे करि सीलु घिउ सरमु मासु आहारु ॥
    गुरमुखि पाईऐ नानका खाधै जाहि बिकार ॥१॥
    गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की बधाई!
  • ੴ सतिगुर प्रसादि॥<br/>
नमसकारु गुरदेव को सति नामु जिसु मंत्र सुणाइआ।<br/>
भवजल विचों कढि कै मुकति पदारथि माहि समाइआ।<br/>
जनम मरण भउ कटिआ संसा रोगु वियोगु मिटाइआ।<br/>
संसा इहु संसारु है जनम मरन विचि दुखु सवाइआ।<br/>
जम दंडु सिरौं न उतरै साकति दुरजन जनमु गवाइआ।<br/>
चरन गहे गुरदेव दे सति सबदु दे मुकति कराइआ।<br/>
भाउ भगति गुरपुरबि करि नामु दानु इसनानु द्रिड़ाइआ।<br/>
जेहा बीउ तेहा फलु पाइआ॥१॥<br/>
गुरु नानक देव जी प्रकाश पुरब की बधाई!Upload to Facebook
    ੴ सतिगुर प्रसादि॥
    नमसकारु गुरदेव को सति नामु जिसु मंत्र सुणाइआ।
    भवजल विचों कढि कै मुकति पदारथि माहि समाइआ।
    जनम मरण भउ कटिआ संसा रोगु वियोगु मिटाइआ।
    संसा इहु संसारु है जनम मरन विचि दुखु सवाइआ।
    जम दंडु सिरौं न उतरै साकति दुरजन जनमु गवाइआ।
    चरन गहे गुरदेव दे सति सबदु दे मुकति कराइआ।
    भाउ भगति गुरपुरबि करि नामु दानु इसनानु द्रिड़ाइआ।
    जेहा बीउ तेहा फलु पाइआ॥१॥
    गुरु नानक देव जी प्रकाश पुरब की बधाई!
  • जन को नदरि कर्म तिन कार।।<br/>
नानक नदरी नदिर निहाल।।<br/>
गुरु नानक देव जी के गुरुपुरब की आप को बधाई!Upload to Facebook
    जन को नदरि कर्म तिन कार।।
    नानक नदरी नदिर निहाल।।
    गुरु नानक देव जी के गुरुपुरब की आप को बधाई!
  • नानक नीच कहे विचार,<br/>
वारेया ना जावाँ एक वार;<br/>
जो तुध भावे साईं भली कार,<br/>
तू सदा सलामत निरंकार।<br/>
गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की आपको बधाई!Upload to Facebook
    नानक नीच कहे विचार,
    वारेया ना जावाँ एक वार;
    जो तुध भावे साईं भली कार,
    तू सदा सलामत निरंकार।
    गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की आपको बधाई!
  • तुमने सिखाया उंगली पकड़कर चलना;<br/>
तुमने बताया कैसे गिरने पर है संभलना;<br/>
तुम्हारी वजह से आज हम पहुंचे इस मुकाम पे;<br/>
गुरु पूरब बीते प्रभु नाम में।<br/>
हैप्पी गुरु नानक जयंती!Upload to Facebook
    तुमने सिखाया उंगली पकड़कर चलना;
    तुमने बताया कैसे गिरने पर है संभलना;
    तुम्हारी वजह से आज हम पहुंचे इस मुकाम पे;
    गुरु पूरब बीते प्रभु नाम में।
    हैप्पी गुरु नानक जयंती!
  • नानक नाम चढ़दी कला तेरे भाने सरबत दा भला;<br/>
धन धन साहिब श्री गुरु नानक देव जी दे आगमन पुरब दी लख लख वधाई!Upload to Facebook
    नानक नाम चढ़दी कला तेरे भाने सरबत दा भला;
    धन धन साहिब श्री गुरु नानक देव जी दे आगमन पुरब दी लख लख वधाई!
  • मन में सींचो हर हर नाम अंदर कीर्तन होर गुण गाम, <br/>
ऐसी प्रीत करो मन मेरे आठ पहर प्रभ जानो नेहरे, <br/>
कहो गुरु जी का निर्मल बाग हर चरणी ता का मन लाग,<br/>
नानक नीच कहे विचार वारिआ ना जावा एक वार,<br/>
जो तुद भावे साई भली कार तू सदा सलामत निरंकार ।<br/>
गुरुपुरब दी लख लख वधाई!
Upload to Facebook
    मन में सींचो हर हर नाम अंदर कीर्तन होर गुण गाम,
    ऐसी प्रीत करो मन मेरे आठ पहर प्रभ जानो नेहरे,
    कहो गुरु जी का निर्मल बाग हर चरणी ता का मन लाग,
    नानक नीच कहे विचार वारिआ ना जावा एक वार,
    जो तुद भावे साई भली कार तू सदा सलामत निरंकार ।
    गुरुपुरब दी लख लख वधाई!
  • जो कर सूरज निक्ल्या;<br />
तारे छुपे हनेर पलोआ;<br />
मिट्टी धुन्ध जग चानन होआ;<br />
कल तारण गुरु नानक आया!<br />
गुरु नानक देव जी दे प्रकाश उत्सव दियां लख-लख वधाईयां!Upload to Facebook
    जो कर सूरज निक्ल्या;
    तारे छुपे हनेर पलोआ;
    मिट्टी धुन्ध जग चानन होआ;
    कल तारण गुरु नानक आया!
    गुरु नानक देव जी दे प्रकाश उत्सव दियां लख-लख वधाईयां!
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT