• ज़िंदगी जब भी आपको रुलाने लगे;<br/>
आप इतना मुस्कुराओ कि दर्द भी शर्माने लगे;<br/>
निकले ना आँसू आँखों से आप के कभी;<br/>
किस्मत भी मज़बूर होकर आपको हँसाने लगे।
    ज़िंदगी जब भी आपको रुलाने लगे;
    आप इतना मुस्कुराओ कि दर्द भी शर्माने लगे;
    निकले ना आँसू आँखों से आप के कभी;
    किस्मत भी मज़बूर होकर आपको हँसाने लगे।
  • फूल बनकर मुस्कुराना ही ज़िंदगी है;<br/>
मुस्कुरा कर गम भुलाना ही ज़िंदगी है;<br/>
जीत कर कोई खुश हो तो अच्छा है;<br/>
हार कर भी खुशियां मनाना ही ज़िंदगी है।
    फूल बनकर मुस्कुराना ही ज़िंदगी है;
    मुस्कुरा कर गम भुलाना ही ज़िंदगी है;
    जीत कर कोई खुश हो तो अच्छा है;
    हार कर भी खुशियां मनाना ही ज़िंदगी है।
  • वो यारों की महफ़िल वो मुस्कुराते पल;<br/>
दिल से जुदा है अपना बीता हुआ कल;<br/>
कभी गुज़रती थी ज़िंदगी वक़्त बिताने में;<br/>
अब वक़्त गुज़रता है चाँद कागज़ के नोट कमाने में।
    वो यारों की महफ़िल वो मुस्कुराते पल;
    दिल से जुदा है अपना बीता हुआ कल;
    कभी गुज़रती थी ज़िंदगी वक़्त बिताने में;
    अब वक़्त गुज़रता है चाँद कागज़ के नोट कमाने में।
  • ख्वाहिश ऐसी करो कि आसमान तक जा सको;<br/>
दुआ ऐसी करो कि खुदा को पा सको;<br/>
यूँ तो जीने के लिए पल बहुत कम हैं;<br/>
जियो ऐसे कि हर पल में ज़िंदगी पा सको।
    ख्वाहिश ऐसी करो कि आसमान तक जा सको;
    दुआ ऐसी करो कि खुदा को पा सको;
    यूँ तो जीने के लिए पल बहुत कम हैं;
    जियो ऐसे कि हर पल में ज़िंदगी पा सको।
  • बहुत कुछ सिखा जाती है ये ज़िंदगी;<br/>
हँसा के भी रुला जाती है ये ज़िंदगी;<br/>
जी सको जितना उतना जी लो दोस्तो;<br/>
क्योंकि बहुत कुछ बाकी रह जाता है और ख़त्म हो जाती है ज़िंदगी।
    बहुत कुछ सिखा जाती है ये ज़िंदगी;
    हँसा के भी रुला जाती है ये ज़िंदगी;
    जी सको जितना उतना जी लो दोस्तो;
    क्योंकि बहुत कुछ बाकी रह जाता है और ख़त्म हो जाती है ज़िंदगी।
  • बचपन में जब धागों के बीच माचिस को फसाकर फोन-फोन खेलते थे,
    तो मालूम नहीं था एक दिन इस फोन में ज़िंदगी सिमटती चली जायेगी।
  • हँस कर जीना यही दस्तूर है ज़िंदगी का;<br/>
एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का;<br/>
बीते हुए पल कभी लौटकर नहीं आते;<br/>
बस यही एक कसूर है ज़िंदगी का।
    हँस कर जीना यही दस्तूर है ज़िंदगी का;
    एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का;
    बीते हुए पल कभी लौटकर नहीं आते;
    बस यही एक कसूर है ज़िंदगी का।
  • क्या है यह ज़िंदगी:<br/>
देखो तो ख्वाब है ये ज़िंदगी;<br/>
पढ़ो तो किताब है ये ज़िंदगी;<br/>
सुनो तो ज्ञान है ये ज़िंदगी;<br/>
हँसते रहो तो आसान है ये ज़िंदगी।
    क्या है यह ज़िंदगी:
    देखो तो ख्वाब है ये ज़िंदगी;
    पढ़ो तो किताब है ये ज़िंदगी;
    सुनो तो ज्ञान है ये ज़िंदगी;
    हँसते रहो तो आसान है ये ज़िंदगी।
  • ज़िंदगी पल-पल ढलती है;<br/>
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है;<br/>
शिकवे कितने भी हों पर हर पल हँसते रहना;<br/>
क्योंकि ये ज़िंदगी जैसी भी एक है बस एक ही बार मिलती है।
    ज़िंदगी पल-पल ढलती है;
    जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है;
    शिकवे कितने भी हों पर हर पल हँसते रहना;
    क्योंकि ये ज़िंदगी जैसी भी एक है बस एक ही बार मिलती है।
  • दिल से कभी तूने पुकारा ही नहीं;<br/>
चाह कर भी दूर कभी हुआ नहीं;<br/>
वक़्त की बेड़ियों ने किया कमज़ोर सही;<br/>
ज़िंदगी का सही मतलब समझा ही नहीं।
    दिल से कभी तूने पुकारा ही नहीं;
    चाह कर भी दूर कभी हुआ नहीं;
    वक़्त की बेड़ियों ने किया कमज़ोर सही;
    ज़िंदगी का सही मतलब समझा ही नहीं।
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