• ग़म में हँसने वालों को कभी रुलाया नहीं जाता;<br/>
लहरों से पानी को हटाया नहीं जाता;<br/>
होने वाले हो जाते हैं खुद ही दिल से जुदा;<br/>
किसी को जबर्दस्ती दिल में बसाया नहीं जाता।
    ग़म में हँसने वालों को कभी रुलाया नहीं जाता;
    लहरों से पानी को हटाया नहीं जाता;
    होने वाले हो जाते हैं खुद ही दिल से जुदा;
    किसी को जबर्दस्ती दिल में बसाया नहीं जाता।
  • बिताए हुए कल में आज को ढूँढता हूँ;<br/>
सपनों में सिर्फ आपको देखता हूँ;<br/>
क्यों हो गए आप मुझसे दूर, यह सोचता हूँ;<br/>
तन्हा, यारों से छुपकर रोता हूँ।
    बिताए हुए कल में आज को ढूँढता हूँ;
    सपनों में सिर्फ आपको देखता हूँ;
    क्यों हो गए आप मुझसे दूर, यह सोचता हूँ;
    तन्हा, यारों से छुपकर रोता हूँ।
  • भुला कर हमें वो क्या खुश रह पाएंगे;
    साथ में नहीं हमारे जाने के बाद मुस्कुराएंगे;
    दुआ है खुद से कि उन्हें दर्द ना देना;
    हम तो सह गए, पर वो टूट जाएंगे।
  • भूल जाने का हौसला ना हुआ;
    दूर रह कर भी वो जुदा ना हुआ;
    उनसे मिल कर किसी और से क्या मिलते;
    कोई दूसरा उनके जैसा ना हुआ!
  • नज़र नवाज़ नज़रों में ज़ी नहीं लगता;<br/>
फ़िज़ा गई तो बहारों में ज़ी नहीं लगता;<br/>
ना पूछ मुझसे तेरे ग़म में क्या गुजरती है;<br/>
यही कहूंगा हज़ारों में ज़ी नहीं लगता।
    नज़र नवाज़ नज़रों में ज़ी नहीं लगता;
    फ़िज़ा गई तो बहारों में ज़ी नहीं लगता;
    ना पूछ मुझसे तेरे ग़म में क्या गुजरती है;
    यही कहूंगा हज़ारों में ज़ी नहीं लगता।
  • नफ़रत कभी ना करना तुम हमसे;
    यह हम सह नहीं पायेंगे;
    एक बार कह देना हमसे, ज़रूरत नहीं अब तुम्हारी;
    तुम्हारी दुनियाँ से हंसकर चले जायेंगे!
  • हर किसी के नसीब में सच्चा प्यार नहीं होता;<br/>
सब किस्मत का खेल है,<br/>
किसी का कोई दोष नहीं होता;<br/>
मेरे नसीब में सिर्फ तड़प, जुदाई, और नफरत ही बची है, अब खुश रह नहीं होता।
    हर किसी के नसीब में सच्चा प्यार नहीं होता;
    सब किस्मत का खेल है,
    किसी का कोई दोष नहीं होता;
    मेरे नसीब में सिर्फ तड़प, जुदाई, और नफरत ही बची है, अब खुश रह नहीं होता।
  • पलकों के किनारे हमने भिगोए ही नहीं;<br/>
वो सोचते हैं हम रोए ही नहीं;<br/>
वो पूछते हैं कि ख़्वाबों में किसे देखते हो;<br/>
हम हैं कि एक उम्र से सोए ही नहीं।
    पलकों के किनारे हमने भिगोए ही नहीं;
    वो सोचते हैं हम रोए ही नहीं;
    वो पूछते हैं कि ख़्वाबों में किसे देखते हो;
    हम हैं कि एक उम्र से सोए ही नहीं।
  • ज़ुबान खामोश आँखों में नमी होगी;
    ये बस एक दास्तां-ए ज़िंदगी होगी;
    भरने को तो हर ज़ख्म भर जाएगा;
    कैसे भरेगी वो जगह जहाँ तेरी कमी होगी?
  • सुन लिया हम ने फैसला तेरा;<br/>
और सुन के उदास हो बैठे;<br/>
ज़हन चुप चाप आँख खाली;<br/>
जैसे हम क़ायनात खो बैठे।
    सुन लिया हम ने फैसला तेरा;
    और सुन के उदास हो बैठे;
    ज़हन चुप चाप आँख खाली;
    जैसे हम क़ायनात खो बैठे।
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