• ज़िन्दगी की आखिरी शाम लिखते हैं;
    आप की याद में गुजरते पल तमाम लिखते हैं;
    वो कलम भी दीवानी हो जाती है आप की;
    जिस कलम से हम आपका नाम लिखते हैं।
  • जुदाई की कसक लिए;
    तेरी याद से जुड़ा आंसू;
    हर शब् मेरी आँख से टपका है;
    गुज़रे कल की तरह आज का दिन भी;
    तुम बिन उदास गुज़रता है।
  • ये इश्क़ वालों की क़िस्मत बुरी होती है;<br/>
हर मुलाक़ात जुदाई से जुडी होती है;<br/>
कहीं भी देख लेना आज़माकर;<br/>
सच्चे प्यार को जुदाई ही नसीब होती है।Upload to Facebook
    ये इश्क़ वालों की क़िस्मत बुरी होती है;
    हर मुलाक़ात जुदाई से जुडी होती है;
    कहीं भी देख लेना आज़माकर;
    सच्चे प्यार को जुदाई ही नसीब होती है।
  • धोखा दिया था जब तूने मुझे;<br/>
जिंदगी से मैं नाराज था; <br/>
सोचा कि दिल से तुझे निकाल दूं;<br/>
मगर कंबख्त दिल भी तेरे पास था। Upload to Facebook
    धोखा दिया था जब तूने मुझे;
    जिंदगी से मैं नाराज था;
    सोचा कि दिल से तुझे निकाल दूं;
    मगर कंबख्त दिल भी तेरे पास था।
  • लम्हें जुदाई को बेकरार करते हैं;<br/>
हालात मेरे मुझे लाचार करते हैं;<br/>
आँखे मेरी पढ़ लो कभी;<br/>
हम खुद कैसे कहें कि आपसे प्यार करते हैं।
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    लम्हें जुदाई को बेकरार करते हैं;
    हालात मेरे मुझे लाचार करते हैं;
    आँखे मेरी पढ़ लो कभी;
    हम खुद कैसे कहें कि आपसे प्यार करते हैं।
  • जिस घड़ी तेरी यादों का समय होता है;<br/>
फिर हमें आराम कहाँ होता है;<br/>
हौंसला नहीं मुझमें तुम्हें भुला देने का;<br/>
काम सदियों का है यह, लम्हों में कहाँ होता है।Upload to Facebook
    जिस घड़ी तेरी यादों का समय होता है;
    फिर हमें आराम कहाँ होता है;
    हौंसला नहीं मुझमें तुम्हें भुला देने का;
    काम सदियों का है यह, लम्हों में कहाँ होता है।
  • लम्हें जुदाई के बेकरार करते हैं;<br/>
हालात मेरे मुझे लाचार करते हैं;<br/>
आँखें मेरी पढ़ लो कभी भी;<br/>
हम खुद कैसे कहें कि आपसे प्यार करते हैं।Upload to Facebook
    लम्हें जुदाई के बेकरार करते हैं;
    हालात मेरे मुझे लाचार करते हैं;
    आँखें मेरी पढ़ लो कभी भी;
    हम खुद कैसे कहें कि आपसे प्यार करते हैं।
  • जिंदगी की कश्ती कब लगे कौन से किनारे;
    कब मिलेंगी मनचली बहारें;
    जीना तो पड़ेगा ही कैसे भी प्यारे;
    कभी दोस्तों की भीड़ में कभी तन्हाई के सहारे।
  • कितना चाहता हूँ तुझे यह मुझको पता नहीं; <br/>
मगर तुम्हारे सिवा कोई और दिल में बसा नहीं; <br/>
ज़माना दुश्मन हो गया चाहत का हमारी; <br/>
जुदा हो गए फिर से यह मेरी खता नहीं।
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    कितना चाहता हूँ तुझे यह मुझको पता नहीं;
    मगर तुम्हारे सिवा कोई और दिल में बसा नहीं;
    ज़माना दुश्मन हो गया चाहत का हमारी;
    जुदा हो गए फिर से यह मेरी खता नहीं।
  • तमन्ना से नहीं तनहाई से डरते हैं;
    प्यार से नहीं रुसवाई से डरते हैं;
    मिलने की तो बहुत चाहत है;
    पर मिलने के बाद जुदाई से डरते हैं।
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